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मऊ का सड़क हादसा खींच ले गया 14 साल पीछे, तब भी हुई थी चार छात्र नेताओं की दर्दनाक मौत 

Wed, 12 Dec 2018 10:42 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,मऊ
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इनकी हुई मौत - फोटो : amar ujala
मऊ जिले के हलधरपुर थाना क्षेत्र के पहसा गांव के पास हुए सोमवार की रात हुए सड़क हादसे ने 14 साल पहले हुए एक हादसे की याद ताजा कर दी। उस समय भी चार छात्र नेताओं की मौत हुई। आगे की स्लाइड्स में देखें...

 
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mau - फोटो : amar ujala
बताते चलें कि 29 मार्च 2004 को डीसीएसके पीजी कालेज के उस वक्त के वर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष होसिल सिंह अपने दोस्त छात्र नेताओं अंजनी कुमार सिंह, सर्वजीत सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, ज्ञानेश प्रताप सिंह, रिंकू खरवार के साथ चैत्र नवरात्र में मध्य प्रदेश के मैहर देवी दर्शन करने गए थे। लौटते समय इलाहाबाद वर्तमान में हादसा हो गया। 

 
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कार के परखच्चे उड़ गये - फोटो : अमर उजाला
जिसमें छात्रसंघ अध्यक्ष होसिल सिंह, अंजनी कुमार सिंह, सर्वजीत सिंह और कृष्ण कुमार सिंह की दर्दनाक मौत हो गई। जबकि ज्ञानेश प्रताप सिंह और रिंकू खरवार और अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। ज्ञानेश ने बताया कि वह दर्दनाक हादसा आज भी याद कर वह सिहर जाते हैं। आठ महिने इलाज के बाद उन्हें नई जिंदगी मिली। 

 

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mau - फोटो : amar ujala
रविकांत यादव, उदय यादव, अभिनेंद्र यादव और संदीप कुमार सिंह वैगनआर कार से सरायलखंसी थाना क्षेत्र के बड़ागांव में एक तिलकोत्सव में गए थे। रात को वहां से निकल कर चारों जिला मुख्यालय पर एक स्थान पर दावत में शामिल हुए। वहां से यह लोग रविकांत और उदय को छोड़ने के लिए पहसा जा रहे थे। कार पहसा बाजार स्थित तिराहे से इटौरा रोड पर मुड़ी कि आगे स्पीड ब्रेकर पर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। हादसे में चारों की मौत हो गई। 

 
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mau - फोटो : amar ujala
उदय यादव की बहन की शादी पहली मई को तय है। बहन की डोली उठाने से पहले ही उदय की अर्थी उठ गई। उदय की मां और बहन का रो रोकर बुरा हाल हो गया। वहीं बात करें  उदय यादव की तो उसको मौत खींचकर दोस्तों के साथ ले गई। 

 
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mau - फोटो : amar ujala
उदय का घर सैरुल्लाह गांव में था, जबकि रविकांत का घर उसके गांव के बाद पड़ता है। रात को उदय अपने गांव के पास इस लिए नहीं उतरा कि जब उसके साथी रविकांत को छोड़कर वापस लौटेंगे तो वह साथियों के साथ वापस आकर घर चला जाएगा लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। चारों ने जीते जी ही नहीं मरने के बाद भी एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा।    
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