विश्व की प्राचीन नगरी काशी काशी मंदिरों और घाटों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां का खुशमिजाजी,रहन-सहन, अक्खड़पन और सुकून लोगों को काफी पसंद है। बनारस की एक और चीज है, जो लोगों को इस शहर की तरफ खींच लाती है। वो है यहां का खान-पान। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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- फोटो : अमर उजाला
यहां के खान-पान की सबसे बड़ी खासियत उसकी वेरिएशन है। इसी अनूठेपन के कारण बाहर से आने वाला यहां के खान-पान की तारीफ करता नहीं थकता और बार-बार आने की इच्छा रखता है। बनारसी पान हो या फिर लिट्टी चोखा,ठंडाई हो या फिर कचौड़ी, जो एक बार यहां के लजीज व्यंजनों का स्वाद चखता है, वो वाराणसी का और भी मुरीद हो जाता है।
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- फोटो : अमर उजाला
ऐसा ही एक नजारा शुक्रवार को काशी के दश्वामेघ घाट पर दिखा। यहां विदेशी पर्यटकों का एक दल यहां का पारंपरिक भोजन लिट्टी-चोखा बड़े चाव से खाते दिखा। बेल्जियम से आया पर्यटकों का यह दल पहले भी काशी आ चुका है। वो यहां के खानपान से पुरी तरह परिचित है। खास बात यह कि यह दल इस बार विशेष आमंत्रण पर काशी पहुंचा है।
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- फोटो : अमर उजाला
यह आमंत्रण भेजा था काशी के ही रहने वाले राजेंद्र ने। राजेंद्र ने बताया कि इनसे हमारी दोस्ती 10 वर्ष पहले से है। यह दल करीब पांच साल के बाद काशी पहुंचा है। राजेंद्र ने बताया कि शुक्रवार को मैनें ही इनके लिए दावत रखी थी। दावत में विशेश तौर पर हमने पूर्वांचल के पारंपरिक भोजन को परोसा। भोजन में लिट्टी-चोखा,दाल,चावल, चने की सब्जी, चटनी और लस्सी था। विदेशी पर्यटकों ने खाने की बहुत तारीफ की।
लिट्टी-चोखा देवरिया, बलिया, जौनपुर, बस्ती, गोरखपुर, वाराणसी आदि जिलों के साथ बिहार के कई जिलों में बड़े शौक से खाया जाता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह व्यंजन काफी अच्छा है। पहले तो इसमें तेल-मसाला ना होने की वजह से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा नहीं है। दूसरा इसमें चने का सत्तू है जो पेट के लिए काफी अच्छा और पाचक होता है।