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Flood in Varanasi: अगले सात दिन चिंताजनक, 72 मीटर के ऊपर पहुंच सकता है गंगा का पानी; किनारे वाले रहें सतर्क

Sat, 30 Aug 2025 06:12 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में गंगा का पानी लगातार बढ़ रहा है। इस कारण उसकी सहायक नदी वरुणा भी उफान पर है। आबादी वाले क्षेत्र में लोग राहत शिविर में जाकर रह रहे हैं। यहां उनके भोजन और दवाइयों की व्यवस्था है।
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वाराणसी के नमो घाट पर गंगा का पानी। - फोटो : अमर उजाला
लगातार 12 घंटे स्थिर होने के बाद गंगा का जलस्तर धीमी गति से कम होने लगा है। वहीं, केंद्रीय जल आयोग ने आगामी एक सप्ताह के अंदर जलस्तर में फिर से बढ़ोतरी की आशंका जताई है। सात दिनों के पूर्वानुमान के अनुसार गंगा का जलस्तर 72 मीटर के ऊपर जाने की संभावना जताई गई है। रात नौ बजे गंगा का जलस्तर 70.91 मीटर दर्ज किया गया।
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गलियों के रास्ते घरों में घुसा बाढ़ का पानी। - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय जल आयोग की ओर से जारी बाढ़ बुलेटिन के अनुसार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 71 मीटर पर स्थिर था। गंगा के जलस्तर में मध्यरात्रि से ही ठहराव आया था। दोपहर 12 बजे से गंगा के जलस्तर में एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गिरावट शुरू हो गई। हर घंटे एक सेंटीमीटर की रफ्तार से गिरावट का सिलसिला जारी रहा और रात नौ बजे तक जलस्तर 70.91 मीटर तक पहुंच गया। पूर्वानुमान के अनुसार 30 अगस्त को सुबह आठ बजे तक गंगा का जलस्तर 70.65 मीटर तक पहुंच सकता है।
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बाढ़ के पानी के बीच दूसरे स्थान पर जाता युवक। - फोटो : अमर उजाला
गंगा का जलस्तर गिरने से तटीय इलाकों में थोड़ी राहत मिली है। हालांकि, अस्सी से राजघाट के बीच घाट किनारे बने सारे मंदिर जलमग्न हो चुके हैं। दशाश्वमेध घाट की पुलिस चौकी में बाढ़ का पानी घुसा हुआ है। मणिकर्णिका घाट पर छत पर और हरिश्चंद्र घाट पर गलियों में शवदाह हो रहा है।

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घरों में घुस गया बाढ़ का पानी। - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय जल आयोग ने अगले एक सप्ताह का जो पूर्वानुमान जारी किया है। उसके अनुसार गंगा के जलस्तर में अभी बढ़ोतरी होगी। सप्ताह भर के अंदर डेढ़ मीटर तक जलस्तर बढ़ सकता और बनारस में गंगा का जलस्तर 72 मीटर से ऊपर पहुंच जाएगा।
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ड्रोन से ली गई बाढ़ की फोटो। - फोटो : अमर उजाला
कई बस्तियों में अब भी बाढ़ का संकट
दोबारा बाढ़ आने के कारण वरुणा किनारे बसे तातेपुर, सलारपुर, रसूलगढ़, पैगंबरपुर, दनियालपुर, मौजहाल, शक्करतालाब, हिदायतनगर, तालिमनगर, मीरघाट, शैलपुत्री समेत दर्जनों इलाकों में वरुणा का पानी घुस गया है।
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दशाश्वमेध घाट पर बाढ़ के कारण खड़ी नाव। - फोटो : अमर उजाला
बाढ़ का पानी घरों में घुसने के बाद अब संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। हालांकि, प्रशासन की ओर से राहत शिविर सक्रिय कर पीड़ितों को दवा, भोजन और आवश्यक सामान मुहैया कराया जा रहा है लेकिन बाढ़ के पानी से घिरे लोग चोरी की आशंका से अपना घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
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बाढ़ प्रभावितों के लिए बनाए गए शिविर। - फोटो : अमर उजाला
वहीं, कई परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें राहत सामग्री भी नहीं मिल रही है। गौरतलब है कि जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बीते बुधवार को बाढ़ ग्रस्त इलाकों के निरीक्षण के दौरान निर्देश दिया था कि ऊंचे स्थानों पर रह रहे लोगों तक भी खाद्य सामग्री और जरूरी सुविधाएं पहुंचाई जाएं, जब तक कि पानी का स्तर कम न हो जाए। इसके बावजूद बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि लेखपाल और कानूनगो के द्वारा राहत सामग्री बांटने में मनमानी की जा रही है।
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बाढ़ के पानी के बीच पढ़ने जाते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला
दीनदयालपुर के संतोष विश्वकर्मा, बेचन विश्वकर्मा, रोशन बानो, अजीत, रानी देवी और शोभा ने बताया कि वह ऊंचे स्थान पर शरण लेकर रह रहे हैं, लेकिन भोजन और दवा जैसी सुविधाएं अब तक नहीं मिलीं। वहीं, पैगंबरपुर रूपनपुर के सुनील गुप्ता, अन्नु देवी, उमेश, जमाल अंसारी और नासिर हुसैन ने भी यही शिकायत दोहराई कि राहत सामग्री उनके पास नहीं पहुंची। बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि घर छोड़ने वालों के साथ-साथ ऊंचे स्थानों पर टिके हुए परिवारों तक भी राहत सामग्री तत्काल पहुंचाई जाए।

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