यूपी के गाजीपुर में मंगलवार दोपहर डीएम-एसपी ऑफिस के सामने सड़क पर अचानक आलू ही आलू दिखाई देने लगा। सैंकड़ों क्विंटल आलू सड़क पर होने के कारण आवागमन भी ठप्प हो गया। थोड़ी ही देर में वहां पर भीड़ जमा हो गई। आगे की स्लाइड्स में जानिए आखिर क्या है माजरा...
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- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, गाजीपुर में किसानों ने यह आलू सड़क पर फेंक कर विरोध प्रदर्शन किया था। आलू का समर्थन मूल्य 1250 रुपये क्विंटल देने और अन्य मांगों को मनवाने के लिए अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में किसानों ने सरजू पांडेय पार्क में मंगलवार को धरना दिया।
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किसानों ने डीएम-एसपी कार्यालय के सामने सड़क पर सैकड़ों क्विंटल आलू गिराकर विरोध दर्ज कराया। किसान वाहनों पर दर्जनों पशु भी छोड़ने के लिए साथ ले आए थे, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुरोध करने पर नहीं छोड़ा। किसानों ने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्रक जिलाधिकारी के बालाजी को सौंपा। चेतावनी दी की अगर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।
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पूरी सड़क आलुओं से पूरी से पट गई और आवागमन में अवरोध उत्पन्न हो गया। लोग जैसे ही लाखों की संख्या में गिरे आलू के पास पहुंच रहे थे, उन्हें पूछना पड़ रहा था कि अरे सड़क पर इतना आलू कैसे गिर गया। कहीं आलू लदा कोई वाहन तो नहीं पलट गया। जब लोगों द्वारा यह बताया जा रहा था कि यह आलू किसानों के आंदोलन की देन है, तो लोग हंसते हुए यह कहने लग रहे थे कि यह किसानों का सरकार के खिलाफ अनोखा विरोध है।
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सड़क पर इतनी बड़ी मात्रा में आलू गिरे हुए थे कि इनके बीच से लोगों को निकलने में एक बार सोचना पड़ रहा था। बाइक सवार आलुओं के सामने आते ही वाहनों का ब्रेक लगा दे रहे थे और इस सोच में पड़ जा रहे थे कि कैसे निकले। कई बाइक सवारों ने ऐसा सोचा कि ये आलू आवागमन में क्या बाधक बनेंगे। ऐसे लोगों ने जैसे ही तेज रफ्तार से बाइक निकालना चाहा है, बाइक फिसलने लगी।
आसपास के लोगों को जैसे ही यह जानकारी हो रही थी कि किसानों ने सरकार का विरोध करते हुए सड़क पर आलू गिरा दिया है और मवेशियों को छोड़ने के लिए लाए, वह मौके लिए रवाना हो जा रहे थे। आलू गिराने के बाद किसानों को सरजू पांडेय पार्क में जाते ही आसपास के लोगों ने झोला, बोरा, गमछा आदि में आलुओं को बटोरना शुरू कर दिया। घंटों लोगों द्वारा आलू बटोरने का कार्य जारी रहा।