रामलीला में मंचन करते हुए।
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कथा के अनुसार, अपार धन-धान्य, ऐश्वर्य और चक्रवर्ती सम्राट की पदवी होने के बावजूद राजा दशरथ संतानहीनता के कारण गहरे अवसाद में थे। अवध के महल का आंगन बच्चों की किलकारी के बिना सूना था। व्यथित होकर राजा दशरथ कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ के आश्रम पहुंचे और अपना दुख व्यक्त करते हुए भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि आयु का चौथा पड़ाव आ चुका है, किंतु संतान सुख से वंचित रहने के कारण मन अत्यंत खिन्न रहता है।