फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फ्लाईओवर हादसाः गुप्ता कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया सच, इंजीनियरों की इस गलती से गईं 15 जानें

Wed, 30 May 2018 02:08 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
1 of 8
varanasi - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी का फ्लाईओवर हादसे को लेकर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा गठित तकनीकी कमेटी में शामिल पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता वाईके गुप्ता और सुनील कुमार गुप्ता ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। जिससे में हादसे होने सच सामने आया है। आगे की स्लाइड्स में देखें...

 
विज्ञापन

2 of 8
varanasi - फोटो : अमर उजाला
गुप्ता कमेटी की रिपोर्ट अभी शासन को सौंपी नहीं गई है, पर इसके निष्कर्षों से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। रिपोर्ट में इंजीनियरों की गलती साफ तौर दिख रही है। यदि वह सावधानी बरतते तो हादसा नहीं होता और हादसे के शिकार लोग सुरक्षित होते। 

 
विज्ञापन

3 of 8
varanasi - फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी का फ्लाईओवर हादसा एक दिन में नहीं घट गया और न बीम गिरने में एकाएक कोई बाहरी दबाव (एक्सटर्नल फोर्स) इसकी वजह था। यह बीम तीन महीने आहिस्ता-आहिस्ता बेयरिंग से खिसकती रहीं और 18 सेंटीमीटर तक खिसक गईं। 

 

4 of 8
varanasi - फोटो : अमर उजाला
सबसे बड़ी गलती यह है कि साइट इंजीनियरों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इससे लगता है वो नियमित मॉनीटरिंग ही नहीं कर रहे थे। नतीजतन, 15 मई की शाम को पियर कैप (पिलर) से ऐसे नीचे गिरी कि देखते ही देखते 15 जिंदगियां छीन लीं। 

 
विज्ञापन

5 of 8
varanasi - फोटो : अमर उजाला
फरवरी में लोहे के बेयरिंग पर बीम रखी गई थीं। इस स्ट्रक्चर को बांधने या सामान्य भाषा में कहें तो मजबूती देने के लिए क्रॉस बीम हादसे के दिन तक नहीं डाले गए थे। गुप्ता कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बेयरिंग पर सीधे बीम कास्ट नहीं की जानी चाहिए, बल्कि उसी साइज के लकड़ी के स्लीपर (अस्थायी बेयरिंग) पर बीम का निर्माण किया जाना चाहिए था। क्रॉस बीम भी साथ ही साथ डाले जाने चाहिए थे, ताकि पहले दिन से ही स्ट्रक्चर बंधा रहता।

 
विज्ञापन

6 of 8
varanasi - फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर लकड़ी के गर्डर्स पर स्लीपर कास्ट किए गए होते तो किसी भी कारण से पैदा हुआ बाहरी दबाव यानी घर्षण उन्हें खिसका नहीं सकता था। सार रूप में कहें तो मानकों के अनुसार ग्रिड ऑफ बीम्स तैयार नहीं किया गया, जिससे धीरे-धीरे बीम बाहर की ओर खिसकती गईं। 

 
विज्ञापन

7 of 8
varanasi - फोटो : अमर उजाला
गुप्ता कमेटी का अनुमान है कि हर दिन यह बीम औसतन 1-2 मिलीमीटर खिसकीं। इस तरह से तीन महीने में करीब 18 सेंटीमीटर अपने मूल स्थान शिफ्ट हुईं और फिर एकाएक नीचे गईं। हालांकि, कमेटी ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता यानी मजबूती को लेकर किसी तरह का कोई संदेह व्यक्त नहीं किया है। 

 
विज्ञापन

8 of 8
varanasi - फोटो : अमर उजाला
कमेटी का मानना है कि बीम आंधी-तूफान और ट्रैफिक संचालन समेत विभिन्न कारणों से पैदा हुए कंपन्न के कारण खिसके। कुल मिलाकर पूरी रिपोर्ट निर्माण कार्य करा रहे इंजीनियरों और मॉनीटरिंग करने वालों की घोर लापरवाही की ओर इशारा कर रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें