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काशी में बाढ़ से पलायन: अस्सी घाट की सड़क तक आया बाढ़ का पानी, सुबह-ए-बनारस का मंच डूबा

Sat, 22 Aug 2026 05:56 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में गंगा का जलस्तर 24 घंटे में 0.64 सेंटीमीटर बढ़ गया। जलस्तर अब चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से महज 1.24 मीटर दूर है। जलस्तर बढ़ने से गंगा और वरुणा के तटवर्ती इलाकों में मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई निचले क्षेत्रों में पानी पहुंचने से लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
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नमो घाट पर डूब रहा नमस्ते स्टेच्यू। - फोटो : संवाद
काशी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग की शुक्रवार रात 9 बजे की रिपोर्ट के अनुसार, गंगा का जलस्तर को 69.02 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से महज 1.24 मीटर है। जलस्तर 5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। शुक्रवार को अस्सी घाट पर सुबह ए बनारस का मंच भी डूब गया। शनिवार सुबह तक गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर सकता है।

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गंगा आरती का भी स्थल बदला। - फोटो : संवाद
गंगा के साथ वरुणा भी उफान पर हैं। पानी बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में रहने वालों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लोग पलायल कर शिविर या फिर किराए के मकानों में शिफ्ट हो रहे हैं। शुक्रवार को दोपहर तक अस्सी घाट पर स्थित सुबह ए बनारस का मंच डूब गया। 
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गंगा की बाढ़ में डूब रहे मंदिर-शिवालय। - फोटो : संवाद
राजेंद्र प्रसाद और दशाश्वमेध घाट की सीढि़यों तक पानी आ गया। ऐसा ही हाल सभी घाटों का है। सभी 84 घाट डूब गए हैं। संपर्क बहुत पहले ही टूट चुका है। घाट पर पानी भरने के कारण वहां लगने वाली दुकानें भी हट गई हैं। दुकानदारों ने बताया कि करीब दो महीने तक हालात ऐसे ही रहेंगे। जैसे तैसे गुजारा करना होगा। सबसे अधिक समस्या शवदाह को लेकर हो रही है।

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वाराणसी में गंगा में आई बाढ़ का ड्रोन शॉट। - फोटो : पुलिस
वरुणा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटीय इलाकों के किसानों की धड़कनें तेज हो गई हैं। शिवपुर क्षेत्र के पिसौर और दनियालपुर गांवों में नदी का पानी तेजी से खेतों की ओर बढ़ रहा है, जिससे फसलों के डूबने और पूरी तरह बर्बाद होने का संकट गहरा गया है। खेतों में लहलहाती धान, मक्का, भिंडी और बोड़ा (लोबिया) की फसलों को जलमग्न होते देख किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं। क्षेत्र के किसान पप्पू पटेल, अरविंद पटेल, संतोष राजभर और मोहन का कहना है कि उन्होंने गाढ़ी कमाई और मेहनत लगाकर फसल बोई थी, लेकिन अब बाढ़ का पानी सब कुछ तबाह करने पर आमादा है।
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वाराणसी में गंगा में आए बाढ़ में डूबा शीतला मंदिर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गंगा के उफान के चलते कैथी घाट पर भी पानी आ गया है। घाटों के किनारे बोयी गई साग सब्जियों की खेती नष्ट हो गई हैं। सरसौल,लूंठा,बरथरा कलां,मुरीदपुर ,परनापुर घाट, गौरा उपरवार, चंद्रावती, ढकवां कैथी आदि जगहों पर पानी हिचकोले खाने लगा है। चंद्रावती गंगा घाट, ढकना गौरीशंकर महादेव घाट की सीढीयों पर भी पानी चढ़ गया है।
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पानी में डूब जाएगा दशाश्वमेध घाट स्थित जल पुलिस का कार्यालय। - फोटो : संवाद
गंगा में लगातार उफान के चलते ढाब क्षेत्र स्थित सोता का पेटा फूल गया है। सोता का बाढ़ पानी अब खेतों की ओर बढ़ने लगा है। इससे सोता किनारे रोपी गई सब्जियों की फसलें भी बाढ़ की चपेट में आने लगी हैं। मुस्तफाबाद रेता पार, रामपुर ढाब, कुढ़वा, अंबा और छितौना गांवों में सबसे पहले सोता किनारे की फसलें प्रभावित हैं। ढाब क्षेत्र की रामचंदीपुर, गोबरहा, मोकलपुर, मुस्तफाबाद आंशिक, रामपुर, छितौना, अंबा, चांदपुर, जाल्हूपुर, सरसौल, मिश्रपुरा, कुकुढ़ा, रैमला, बभनपुरा और हनुमानपुर समेत कई ग्राम पंचायतें बाढ़ से प्रभावित होंगी।
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