फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: धनंजय सिंह ने छात्र राजनीति से जरायम की दुनिया में बनाया दखल, दर्ज हैं हत्या व अपहरण जैसे 40 मुकदमे 

Fri, 05 Mar 2021 05:55 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
विज्ञापन
1 of 5
पूर्व सांसद धनंजय सिंह - फोटो : अमर उजाला
मऊ के पूर्व ज्येष्ठ उप प्रमुख अजीत सिंह की हत्या में बाहुबली धनंजय सिंह को गिरफ्तार करने का आदेश और फिर 25 हजार का ईनाम घोषित होने के बाद पूर्व सांसद ने शुक्रवार को प्रयागराज के एमपी एमएलए कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण की सूचना के बाद से ही जौनपुर सहित पूर्वांचल के सभी जिलों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। 

दरअसल जब अदालत ने गिरफ्तारी का आदेश दिया था तभी से लखनऊ से बनारस तक खलबली मच गई थी। लखनऊ यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति से जरायम जगत में दखल बनाकर विधानसभा और संसद तक का सफर तय करने वाले धनंजय और उनके समर्थकों के लिए अदालत का आदेश एक बड़ा झटका माना जा रहा है। 

धनंजय सिंह पर जौनपुर, लखनऊ और दिल्ली सहित अन्य जगह 40 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें सर्वाधिक 19 मुकदमे लखनऊ के विभिन्न थानों में हैं। बीते साल 10 मई को जौनपुर जिले में एसटीपी के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिनव सिंघल के अपहरण और रंगदारी के मामले में गिरफ्तार धनंजय सिंह 109 दिन बाद 28 अगस्त को जमानत पर रिहा हुए थे।
विज्ञापन

2 of 5
पूर्व सांसद और बाहुबली धनंजय सिंह। - फोटो : अमर उजाला
जेल से छूटने के बाद नवंबर 2020 में धनंजय ने मल्हनी विधानसभा के उपचुनाव में निर्दल प्रत्याशी के तौर पर किस्मत आजमाई और दूसरे स्थान पर रहे। धनंजय अभी चुनाव में हार के गम से उबरे भी नहीं थे कि अजीत सिंह हत्याकांड में नाम आने के बाद मुश्किलें बढ़ गईं।

पुलिस ने शुरू की थी धनंजय की भूमिका की जांच
आजमगढ़ के कुख्यात डी-11 गैंग के सरगना ध्रुव कुमार सिंह उर्फ कुंटू सिंह और अखंड प्रताप सिंह पर भी इस हत्याकांड में संलिप्त होने का आरोप लगा था। गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ कन्हैया उर्फ डॉक्टर ने शूटरों के साथ लखनऊ में बीती जनवरी महीने के पहले हफ्ते में लखनऊ में अजीत सिंह की हत्या कर दी थी। अजीत सिंह की हत्या में गिरधारी का नाम आते ही पुलिस ने धनंजय की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी थी और साक्ष्य प्रस्तुत करने पर लखनऊ की अदालत ने गिरफ्तार कर पेश करने का आदेश दिया।
विज्ञापन

3 of 5
धनंजय सिंह। - फोटो : अमर उजाला
कभी पुलिस ने मार गिराने का किया था दावा
धनंजय सिंह की कहानी पूरी फिल्मी है। पुलिस ने एक बार धनंजय को एनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया था। बाद में धनंजय ने विधानसभा से लेकर संसद तक का सफर तय किया। इस बीच धनंजय के खिलाफ हत्या, रंगदारी, अपहरण जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज होते रहे। जौनपुर जिले के बनसफा में सामान्य परिवार में जन्मे धनंजय ने जौनपुर के टीडी कॉलेज से छात्र राजनीति की शुरुआत की।

इसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय में मंडल कमीशन का विरोध कर धनंजय ने अपनी छात्र राजनीति को धार दी। लखनऊ विश्वविद्यालय में ही एक नेता के संपर्क में धनंजय आए और फिर हत्या, सरकारी ठेकों से वसूली, रंगदारी जैसे मुकदमों में नाम आने की वजह से धनंजय सुर्खियों में रहे।
 

4 of 5
पूर्व सांसद धनंजय सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
1998 तक धनंजय का नाम लखनऊ से लेकर पूर्वांचल तक जरायम की दुनिया में सुर्खियों में आ चुका था और उन पर पुलिस की ओर से 50 हजार का इनाम घोषित हो चुका था। अक्तूबर 1998 में पुलिस ने बताया कि 50 हजार के इनामी धनंजय सिंह तीन अन्य बदमाशों के साथ भदोही-मिर्जापुर रोड स्थित एक पेट्रोल पंप पर डकैती डालने आए थे।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
अजीत सिंह व पूर्व सांसद धनंजय सिंह। - फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने दावा किया कि मुठभेड़ में धनंजय सहित चारों बदमाश मारे गए हैं। हालांकि धनंजय जिंदा थे और भूमिगत हो गए थे। फरवरी 1999 में धनंजय पुलिस के सामने पेश हुए तो भदोही की फर्जी मुठभेड़ का पर्दाफाश हुआ। धनंजय के जिंदा सामने आने पर मानवाधिकार आयोग ने जांच शुरू की और फर्जी मुठभेड़ में शामिल रहे 34 पुलिसकर्मियों पर मुकदमे दर्ज हुए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें