शिव की नगरी काशी में कार्तिक पूर्णिमा पर होने वाली देव दीपावली का नजारा देखने के लिए देश विदेश के लोगों ने शहर में डेरा डाल दिया है। वैसे तो देव दीपावली की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है लेकिन इस बार खास आयोजन के कारण लोगों की नजर इस अनूठे आयोजन पर है। मुख्यमंत्री सहित कई केंद्रीय मंत्री और फिल्मी सितारे आज वाराणसी आएंगे। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड देव दीपावली का नाम शामिल होने वाला है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
पहली बार देव दीपावली पर काशी के 16 घाटों पर उत्तर प्रदेश पर्यटन और संस्कृति विभाग की ओर से विशेष आयोजन है। इस दौरान लोक कलाओं के साथ-साथ सूफी संगीत सहित कई और कार्यक्रम आकर्षण के केंद्र होंगे। देव दीपावली के आयोजन का शुभारंभ राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजघाट से करेंगे। राजघाट पर आयोजन के बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री नौका विहार करते हुए अस्सी घाट पर देव दीपावली की छटा निहारेंगे। शासन की ओर से पहली बार 50 लाख रुपये का बजट जारी किया गया है।
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अस्सी घाट, पंचकोट घाट,महानिर्वणी घाट,चौकी घाट,मानसरोवर घाट,राजा घाट, डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट, गंगा महल घाट, राम घाट,हनुमानगढ़ी घाट, बद्रीनारायण घाट, त्रिलोचन घाट,नंदेश्वर घाट,तेलियानाला घाट और निषाद घाट पर विविध सांस्कृतिक आयोजन प्रशासन द्वारा किया गया है। कहीं डांडिया तो कहीं घूमर, कहीं ओडिसी नृत्य तो कहीं काल वेलिया नृत्य का नजारा देखने को मिलेगा।
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राजघाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही गंगा की लहरों पर तीन बार लेजर शो का आयोजन किया जाएगा। वहीं हर्षदीप कौर का सूफी गायन होगा। गंगा उस पार रेती पर आतिशबाजी की भी तैयारी है। संयुक्त निदेशक उत्तर प्रदेश पर्यटन अविनाश चंद्र मिश्रा ने बताया कि देव दीपावली पर देश की समृद्ध संस्कृति के दर्शन होंगे। वहीं विदेशी पर्यटकों की सुविधा का विशेष ख्याल रखने का निर्देश दिया गया है।
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कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित होने वाली देव दीपावली पर काशी का वातावरण अद्भुत एवं अलौकिक होता है। इस पर्व को इस बार भव्य रूप से मनाने की तैयारी है। गंगातट पर उतरे देवलोक की छवि जैसी है काशी की देव दीपावली। दिवाली के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा को काशी में गंगा के अर्धचंद्राकार घाटों पर दीपों का अद्भुत जगमग प्रकाश 'देवलोक' जैसे वातावरण की सृष्टि करता है।
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बीते 10-12 सालों में ही पूरे देश और विदेशों में आकर्षण का केंद्र बन चुका देव दीपावली महोत्सव 'देश की सांस्कृतिक राजधानी' काशी की संस्कृति की पहचान बन चुका है। करीब तीन किलोमीटर में फैले अर्धचंद्राकार घाटों पर जगमगाते लाखों-लाख दीप, गंगा की धारा में इठलाते-बहते दीप, एक अलौकिक दृश्य की सृष्टि करते हैं। शाम होते ही सभी घाट दीपों की रोशनी में नहा-जगमगा उठते हैं। इस दृश्य को आंखों में समा लेने के लिए लाखों देशी-विदेशी अतिथि घाटों पर उमड़ पड़ते हैं।
अकेले काशी में मनाई जाने वाली देव दीपावली में देश-विदेश से कई लाख लोग आते हैं। आयोजन की तैयारियां कई माह पूर्व शुरू हो जाती है। पहली बार काशी के 84 घाटों पर अलग अलग आयोजन की तैयारी है। 1986 में पूर्व काशी नरेश स्व. डॉ. विभूति नारायण सिंह ने पंचगंगा पर हजारा दीप जलाकर देव दीपावली की शुरुआत कराई थी। प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर सबसे पहले आरती की शुरुआत 1991 से हुई है। 14 नवंबर, 1997 से गंगा आरती प्रतिदिन की जाने लगी।