सीआरपीएफ के जवान पवन
- फोटो : अमर उजाला
अपनों से बिछड़ना बेदह दुखदायी
पवन ने कहा कि हम देश की सरहद पर तैनात हैं और यह हमारा रोजाना का काम है। लेकिन आप जिनके साथ रहते हैं, उनका हमेशा के लिए बिछुड़ना दुखदायी तो होता ही है। मां-बाप के आशीर्वाद और सीआरपीएफ में मिले प्रशिक्षण से हमने यही सीखा है कि देश के दुश्मनों को सबक सिखाने से कभी पीछे नहीं हटना है।
पति की बहादुर पर गर्व
पवन के पिता सुभाष चंद्र और पत्नी शुभांगी ने बताया कि रोजाना सुबह एक बार वह फोन जरूर करते हैं। बुधवार की सुबह मोबाइल पर घंटी जाने के बाद भी कॉल नहीं रिसीव हुई तो मन घबराने लगा। दोपहर में बात हुई तो पवन ने कहा कि थोड़ी मुश्किल में हैं, अभी कुछ देर बाद बात करते हैं। इससे घबराहट और भी बढ़ गई। तब तक टीवी में समाचार में कश्मीर घाटी की घटना दिखाई जाने लगी तो जानकारी हुई।
इसके बाद पवन ने बात की तो सुकून मिला। शुभांगी ने बताया कि एक बेटी दिव्यांशी (5) और बेटा दिव्यांश (8) है। दिसंबर में पवन घर आए थे, उसके बाद से नहीं आए। जब पता लगा कि उन्होंने एक मासूम बच्चे की जान बचाई है तो पति पर गर्व हुआ। रोजाना ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह सुरक्षित रहें और देश के दुश्मनों को ठिकाने लगाने में कोई कोर कसर न छोड़ें। दोनों बच्चे भी अपने पापा की बहादुरी का किस्सा सुनकर बेहद खुश हैं और उन्होंने फोन पर जय हिंद कहा।