पति का इंतजार कर रही पत्नी गोलियों की आवाज सुनकर बाहर निकली तो पति के कार पर नजर पड़ी। वह कार का दरवाजा खोलते ही चीख पड़ी और मदद मांगने लगी। अंदर ऐसा खैफनाक दृश्य था जिसे देख वह बेसुध हो गई। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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वाराणसी के अतिसुरक्षित क्षेत्र डीरेका (डीएलडब्लू) में बीती रात घटी घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। डीरेका परिसर में कंदवा गेट के पास कर्मचारी नेता ताराधीश मुकेश (43) मंगलवार रात करीब दस बजे बदमाशों ने घर के सामने गोली मारकर हत्या कर दी।
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पति का इंतजार कर रही पत्नी गोलियों की आवाज सुनकर बाहर निकली तो पति के कार पर नजर पड़ी। वह कार का दरवाजा खोलते ही चीख पड़ी और मदद मांगने लगी। आवाज सुनकर पड़ोसी बाहर आ गए और एक युवक की मदद से गंभीर हालत में मुकेश को डीरेका अस्पताल पहुंचाया गया।
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अस्पताल में इलाज के दौरान मुकेश को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मुकेश बिहार के मुंगेर के रहने वाले थे। हत्या का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस के अनुसार वारदात में 32 बोर की पिस्टल का उपयोग किया गया है। दो बाइक पर सवार बदमाशों ने आधा दर्जन राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग की।
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सूचना पाकर मौके पर आईजी रेंज दीपक रतन, एससपी रामकृष्ण भारद्वाज और एसपी सिटी दिनेश कुुमार सिंह मौके पर पहुंचे। एसएसपी ने बताया कि वारदात की तहकीकात के लिए डीरेका परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज आरपीएफ की मदद से खंगाली जा रही है।
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बीती रात डीरेकाकर्मी मुकेश की हत्या के विरोध में बुधवार की सुबह रेलकर्मी धरने पर बैठ गए। डीरेकाकर्मियों ने घटना की सीबीआई जांच की मांग की। कहा कि जब तक प्रशासन इस पर निर्णय नहीं लेता तब तक धरने पर बैठे रहेंगे।
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मुकेश को गोली लगने के बाद बदहवास पत्नी प्रियंका उनके साथ डीरेका अस्पताल चली गई थीं। घर में बेटी नंदिनी और बेटे अभिनव का रो-रोकर बुरा हाल था। दोनो को पड़ोसी अपने घर ले गए तो बार-बार यही पूछ रहे थे कि हमारे पापा को क्या हुआ है और वे कब तक घर आएंगे। मम्मी कहां है, वे कब तक घर आएगी। दोनों बच्चों के इन सवालों का जवाब मुकेश के पड़ोसियों के पास नहीं थे।
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हत्या के बाद अतिसुरक्षित क्षेत्र डीरेका की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। डीरेका में प्रवेश के लिए ककरमत्ता, नाथूपुर, पहाड़ी और कंदवा द्वार हैं। वारदात पहाड़ी और नाथुपुर द्वार के बीच हुई है। पहाड़ी द्वार के आसपास अवांछनीय तत्वों का जमावड़ा रहता है। पहाड़ी गेट पर सीसीटीवी भी खराब है। डीरेका प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब सीसीटीवी खराब है तो ऐसी स्थिति में मरम्मत कराने की जहमत क्यों नहीं उठाई गई।
सुरक्षा के लिए डीरेका ने अपने सुरक्षाकर्मी लगाए हैं। इनके अलावा पुलिस का चक्रमण होता है। सूत्रों की मानें तो डीरेका में माफिया और कुछ अधिकारियों का गठजोड़ काफी पुराना है। आए दिन यहां ठेका को लेकर वर्चस्व की लड़ाई होेती रहती है। अपने लोगों को ठेका दिलवाने के लिए जहां कुछ अधिकारी पैरवी में जुट जाते हैं। इसे लेकर कई बार आला अधिकारियों से शिकायत हो चुकी है। बावजूद इसके इस समस्या का समाधान करने की दिशा में कदम नहीं उठाया जाता है।