चित्रकूट के घने जंगलों में पुलिस और डकैतों के बीच भीषण मुठभेड़ में यूपी पुलिस के जांबाज दरोगा जेपी सिंह शहीद हो गए। सात लाख के इनामी डकैत बबली कोल गैंग के साथ पुलिस की मुठभेड़ के दौरान दरोगा जेपी सिंह ने बहादुरी के साथ डकैतों का सामना किया लेकिन उन्हें सीने में गोली लग गई।
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घटनास्थल पर पुलिस और एसटीएफ के लोग
रैपुरा के उपनिरीक्षक जेपी सिंह को मानिकपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि मुठभेड़ के दौरान दोनों तरफ से फायरिंग हुई जिसमें डकैत लवलेश कौल को पुलिस ने मार गिराया।
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- फोटो : अमर उजाला
वहीं सात लाख का इनामी डकैत बबली कोल गोली लगने के बाद भी भागने में कामयाब हो गया। शहीद दरोगा जयप्रकाश सिंह जौनपुर जिले के नेवढ़िया थाना क्षेत्र के बनेवरा गांव के रहने वाले थे। हादसे की सूचना पाकर पूरा गांव शोक में डूब गया। वहीं कई लोग शव लाने के लिए चित्रकूट रवाना हो गए।
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दरोगा जयप्रकाश सिंह 1991 में सिपाही पद पर भर्ती हुए थे। 2012 में विभागीय परीक्षा देकर वह उपनिरीक्षक बन गए। उनकी शुरुआती शिक्षा गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में हुई थी। इसके बाद उन्होंने आदर्श इंटर कालेज इटाएं से इंटर तक और स्नातक की पढ़ाई पीजी कालेज मड़ियाहूं से की।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि दरोगा जेपी सिंह इससे पहले दो बार चित्रकूट में डकैतों के साथ मुठभेड़ में शामिल रहे थे। गांव से उन्हें बहुत लगाव था। चार दिन पहले ही वह गांव आए थे। उनके पिता जी किसान हैं। वह दो भाई हैं और उनकी एक बहन है। उनका भाई भी पुलिस में है और गोरखपुर में तैनात है।
दरोगा जेपी सिंह की पत्नी का नाम चंदा सिंह है और उनके दो बच्चे शिवम और शुभम हैं। चाचा मंगला सिंह ने बताया कि वे बहुत बहादुर किस्म के थे और घर आने के बाद स्वयं खेती में लग जाते थे। वहीं दूसरी ओर एडीजी एस एन सावंत ने शहीद एसआई जेपी सिंह के परिवार को 25 लाख देने की घोषणा की है।