वर्ष 1993 में मुंबई बम विस्फोट के बाद माफिया डॉन अबू सलेम पुलिस से छिपने के लिए अपने गृह जिले आजमगढ़ भाग आया था। यहां उसने अपने 'शूटरों' का ऐसा नेटवर्क खड़ा किया जिससे पूरे देश में आजमगढ़ कुख्यात हो गया। आगे की स्लाइड में जानें कैसे काम करता था सलेम का नेटवर्क...
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abu salem
आजमगढ़ में गाड़ियों को ठीक गुजारा करने वाला अन्डरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम अच्छी कमाई की तलाश में दिल्ली के रास्ते मुंबई पहुंचा। कुछ दिनों तक डिलीवरी ब्वाय के रूप में काम करने के बाद उसकी मुलाकात दाऊद के छोटे भाई अनीस इब्राहीम से हुई।
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अनीस से मुलाकात के बाद अबु सलेम की जिंदगी बदल गई। इसके बाद वह दाऊद के संपर्क में आया और 12 मार्च 1993 को मुंबई में अलग-अलग जगहों पर 12 बम विस्फोट हुए। इसमें करीब 257 लोगों की मौत हो गई और 713 अन्य लोग घायल हुए।
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अबु सलेम
- फोटो : MID DAY
जानकार बताते हैं कि इस बम विस्फोट के बाद अबू सलेम पुलिस से बचने के लिए आजमगढ़ भाग आया और यहां कई इलाकों में अपने ठिकाने बदलता रहा। इस दौरान अबू सलेम ने आजमगढ़ में धीरे-धीरे अपने शूटरों का पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया।
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- फोटो : अमर उजाला
अबू सलेम के शूटर 20 से 50 हजार रुपये के लिए लोगों की हत्याएं करने लगे। उनसे फिरौती वसूलने लगे। इसी नेटवर्क ने 1998 में टी सीरिज कंपनी के मालिक गुलशन कुमार की हत्या कर दी। हत्याकांड की पुलिस जांच शुरू हुई तो हत्या के लिए इस्तेमाल में आए तमंचे पर लिखे एक शब्द ने पुलिस वालों को चक्कर में डाल दिया।
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अबु सलेम
तमंचे पर लिखा था मेड इन बम्हौर। पुलिस वाले मेड इन बम्हौर का मतलब नहीं समझ पा रहे थे। उन्हें यह सूझ नहीं रहा था कि बम्हौर कोई देश है या कोई शहर। पुलिस की इस मशक्कत के बीच एक सिपाही ने बताया कि आजमगढ़ जिले में एक गांव का नाम बम्हौर है।
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उसने यह भी बताया कि यहीं पर अवैध हथियार भी बनाए जाते हैं। इसके बाद पुलिस आजमगढ़ पहुंची और पहली बार टेरर नेटवर्क पर आजमगढ़ का नाम आया। इसी जांच से पता चला कि गुलशन कुमार की हत्या सलेम के नेटवर्क ने की है जिसे उसने आजमगढ़ में तैयार किया है।
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abu salem home azamgarh
- फोटो : अमर उजाला
बताया जाता है कि उस समय अबू सलेम के नेटवर्क में 10 शूटर शामिल थे। इनमें से कई के खिलाफ अभी भी मुकदमा चल रहा है। पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किए जाने के बाद पहली बार सलेम अपनी मां की मौत पर आजमगढ़ आया था। इसी दौरान उसकी डी कंपनी के मुखिया दाऊद इब्राहिम से अदावत चल रही थी।
इसको देखते हुए उसकी सुरक्षा में करीब 250 पुलिसकर्मी लगाए गए थे। इनमें तीन जिलों की फोर्स और मुंबई पुलिस के जवान शामिल थे। आजमगढ़ में उसकी इतनी सुरक्षा देख आसपास के कई नौजवान बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने अपराध की ओर रुख किया। सलेम के आजमगढ़ आने पर उसे देखने के लिए पूरा इलाका उमड़ आया था।