मऊ सदर विधानसभा क्षेत्र से सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी के नफरती भाषण के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/ विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) डॉ. केपी सिंह की अदालत ने कहा कि राजनीतिक क्षेत्र जैसे लोक सेवा में नफरत या भड़काऊ भाषण की कोई जगह नहीं है। यह तब और गंभीर हो जाता है, जब आशय धर्म के आधार पर अव्यवस्था करके चुनाव को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने की हो।
अदालत ने कहा कि जिले में नियुक्त अधिकारी आदर्श आचार संहिता के समय चुनाव आयोग के सीधे नियंत्रण में होते हैं। उन्हें चुनाव बाद रोककर हिसाब-किताब किए जाने की धमकी दी जाती है तो निश्चित रूप से यह अप्रत्यक्ष रूप से मतदाताओं के मन में भी डर का भाव पैदा करना है।
भारत जैसे विविधता भरे देश में भड़काऊ भाषण से देश व समाज की भी क्षति होती है। ऐसे जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद अपना पूरा समय विपक्षियों को सबक सिखाने में बर्बाद करेंगे, जिसकी लोकतंत्र और समाज में न कोई जगह है न वह स्वीकार्य है।