Varanasi News: शहीदों के दसवें पर वाराणसी के लाट सरैया में जुलूस उठा। इस दौरान ताबूतों की जियारत कर अजादार अश्कबार हुए। एकटक ताबूत को निहारते, आंखों से आंसू पोंछते और दुआएं करते अजादारों के होठों पर या हुसैन... की सदा थी।
शहीदाने कर्बला के दसवें पर रविवार को 72 शहीदों के ताबूत की जियारत के लिए हुजूम उमड़ पड़ा। सरैया सदर इमामबाड़ा की फिजा गमगीन थी। एक-एक ताबूत की जियारत कर अजादार अश्कबार हो उठे। एकटक ताबूत को निहारते, आंखों से आंसू पोंछते और दुआएं करते अजादारों के होठों पर या हुसैन... की सदा थी।
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जुलूस में उमड़ी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
72 ताबूतों की जियारत करने के लिए पूर्वांचल भर से जियारतमंद पहुंचे थे। अंजुमन आबिदिया के जेरे इंतजाम सदर इमामबाड़े में मशहूर 72 ताबूत (बहत्तर ताबूत) की मजलिस-ए-अजा और जुलूस का ये 12वां साल था। जंगे शहीदा (जहां ताबूत रखे थे) में हर कोई ताबूत को चूमता और छूकर खिराज-ए-अकीदत पेश करता। दोपहर बाद जियारतमंदों की भीड़ उमड़ पड़ी।
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जुलूस में उमड़ी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
सोजख्वानी और मजलिस के बाद जीशान आजमी ने शहीदों का तार्रुफ (परिचय) कराना शुरू किया तो अजादारों की आंखों से छलक पड़े। जब इमाम हुसैन के जिगर के टुकड़े और छह माह के अली असगर के झूले का ताबूत जंगे शहीदा से बाहर आया तो क्या मर्द, क्या ख्वातीन सब फफक कर रो पड़े।
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जुलूस में उमड़ी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
18 साल के अली अकबर, 13 साल के कासिम, अलमबरदार हजरत अब्बास और औन व मोहम्मद समेत तमाम शहीदों का जिक्र हुआ। मुजफ्फरनगर के मौलाना सैयद मोहम्मद हुसैनी ने इमाम हुसैन और शहीदान-ए-कर्बला की अजीम कुर्बानी को बयान किया।
काबिश बनारसी, अरम बनारसी, कौसैन सुल्तानपुरी, सलीम बिलग्रामी और अली मूसा ने कलाम पेश किए। इसके पूर्व छपरा के लियाकत अली खान ने सोजख्वानी की। निजामत डॉ. शफीक हैदर और शुक्रिया सलमान हैदर ने किया। अंजुमन जव्वादिया ने नौहा व मातम पेश किया।