गुरु रविदास की जन्मस्थली वाराणसी स्थित सीर गोवर्धन में सोमवार से हर और आस्था का रंग नजर आने लगा है। इस समारोह में सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ भी आज शिरकत करने वाले हैं। सीएम योगी आज संत रविदास मंदिर में मत्था टेकेंगे, सोने की पालकी का दर्शन करेंगे और लंगर में भक्तों के साथ प्रसाद भी ग्रहण करेंगे। इस पालकी का अनावरण 2008 में बसपा सुप्रीमो मायावती ने किया था। आगे की स्लाइड्स में जानिए इस मंदिर की रोचक बातें...
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sir gobardhan
- फोटो : अमर उजाला
धर्म की नगरी काशी में संत रविदास के मंदिर को काशी विश्वनाथ मंदिर के बाद दूसरे ‘गोल्डन टेंपल’ के नाम से जाना जाता है। मंदिर के शिखर का कलश और मंदिर में संत रविदास की पालकी से लेकर छत्र तक सब कुछ सोने का है। जिनका दर्शन जयंती समारोह के दौरान ही मिलता है। हर साल देश-विदेश से बड़ी तादाद में संत के अनुयायी जयंती पर मत्था टेकने यहां आते हैं।
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रविदास जयंती समारोह में शामिल होने के लिए सीएम योगी 31 जनवरी को आने वाले हैं। इसके मद्देनजर सरकारी मशीनरी पूरी व्यवस्था पर नजर बनाए है। वाराणसी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2016 में जयंती पर्व पर यहां आए थे और रविदास मंदिर में मत्था टेका था। उन्होंने सोने की पालकी के दर्शन के साथ ही लंगर में प्रसाद ग्रहण किया था। यहां दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बसपा सुप्रीमो मायावती समेत कई राजनेता यहां आ चुके हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
130 किलो वजनी सोने की पालकी 2008 में यूरोप के अनुयायियों ने पंजाब के जालंधर में बनवाई थी। इसका अनावरण बसपा सुप्रीमो मायावती ने फरवरी 2008 में किया था। इस पालकी को साल में एक बार जयंती के दिन निकाला जाता है। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि पहला स्वर्ण कलश 1994 में संत गरीब दास ने संगत के सहयोग से चढ़ाया था। 2012 में 35 किलो का सोने का स्वर्ण दीपक बनवाया गया। इसमें अखंड ज्योति जल रही है।
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संत रविदास जन्मस्थली पर शुरू हुए लंगर में पांच दिनों तक दस लाख से अधिक लोगों के भोजन की तैयारी की गई है। पांच हजार से अधिक सेवादार व्यवस्था में लगाए गए हैं। अलग-अलग पंडालों में एक समय में 15 हजार से अधिक लोग एक साथ पंगत में बैठ सकते हैं। खाना तैयार करने के लिए पंजाब से पचास से अधिक हलवाई आए हैं। ट्रस्टी केएन सरोवा का कहना है कि पांच दिनों तक मेला क्षेत्र में कोई भूखा नहीं रहेगा।
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आस्था और उल्लास के बीच सीर गोवर्धन में हर तरफ रौनक उतर आई है। तीन किलोमीटर परिक्षेत्र में मेला सज गया है। चरखी-झूले के साथ सैकड़ों दुकानें लगी हैं। सोमवार को बेगमपुरा स्पेशल ट्रेन से डेरा सच्च खंड बल्लां के गद्दीनशीं संत निरंजन दास अनुयायियों के जत्थे के साथ काशी पहुंचेंगे। कैंट रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालु उनकी अगवानी और स्वागत करेंगे। यहां से काफिला सीर गोवर्धन स्थित रविदास मंदिर पहुंचेगा।
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जयंती समारोह शुरू होने के साथ ही सीर में हर तरफ जश्न का माहौल है। मंदिर से लेकर मेला क्षेत्र तक मिनी पंजाब की झलक देखने को मिल रही है। सड़क के दोनों तरफ दुकानें सज चुकी हैं। चरखी और झूले भी लगाए गए हैं। वहीं, श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। भक्तों के भोजन-पानी और ठहरने के पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं। अटूट लंगर चलाया जा रहा है।
30 जनवरी को श्री गुरु रविदास स्मारक पार्क में संत निरंजन दास दीप प्रज्जवलित करेंगे। पूरे पार्क को दीयों से सजाया जाएगा। 31 जनवरी को मुख्य आयोजन होगा। नगवा स्थित पार्क में संत की प्रतिमा पर माल्यार्पण और रविदासिया धर्म का ध्वजारोहण किया जाएगा। इसके साथ ही 17 जनवरी से चल रहे अमृतवाणी पाठ की पूर्णाहुति हो जाएगी। सीर के मुख्य पंडाल में संतों के प्रवचन और कीर्तन के साथ ही मंदिर क्षेत्र में झांकियां निकाली जाएंगी।