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PHOTOS: काशी में छठ का उत्साह, 36 घंटे के निर्जला व्रती ने डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य, घाटों पर अद्भुत नजारा

Sun, 30 Oct 2022 09:44 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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वाराणसी में लोक आस्था का महापर्व डाला छठ - फोटो : अमर उजाला
आसमान के धुंधलके में डूबते सूर्यदेव और हाथों में सुप व सुपली लेकर उनसे मंगलकामना की अरज लगाती व्रती महिलाओं का सैलाब। आस्था, परंपरा और उत्सव की अद्भुत त्रिवेणी का ये नजारा रविवार को आदित्योपसना के महापर्व डाला छठ पर काशी के तमाम घाटों पर देखने को मिला, जब शाम ढलने से पहले रोशनी से जगमगाते घाटों पर व्रती महिलाएं अस्ताचल सूर्य को पहला अर्घ्य देने जुटी थी। शाम पांच बजते-बजते सुशोभिताओं की पूजा कर गंगा के पानी में कमर भर तक पानी में पहुंची व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूरज देवता को अर्घ्य दिया।

महापर्व कोे लेकर काशी के अस्सी घाट से लेकर दशाश्वमेध घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट से लेकर नमो घाट और यहां तक कि आदिकेशव घाट तक वेदियां सजी हुई थी। जहां कुछ घाटों पर सांस्कृतिक मंच से गूंजते छठ के परंपरागत गीत ‘कांचहि बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाई... आपन पूजवा लिहीं ये छठी मइया की गवनई और सुगंधियों ने पूरे घाट को सराबोर किया।
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वाराणसी में लोक आस्था का महापर्व डाला छठ - फोटो : अमर उजाला
सोमवार सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती महिलाएं चार दिवसीय अनुष्ठान व्रत का पारण करेंगी। इसके अलावा शहर के विभिन्न कुंडों व तालाबों के साथ घर की छतों पर कृत्रिम कुंड बनाकर भी सूर्य देव को अर्घ्य दिया। 

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वाराणसी में लोक आस्था का महापर्व डाला छठ - फोटो : अमर उजाला
हाईमास्ट की दूधिया रोशनी संग दीपों की झिलमिलाहट ने शहर के तमाम घाट चमक उठे। चार बजे के आसपास से जुटी तमाम महिलाओं ने छठ माई की गवनई के बीच परंपरागत रूप से पूजा शुरू की। तुलसी गछिया भुइया लोटै डाल, दउरा भरहा होइहै कवनराम बहंगी घाटे पहुंचाई... पूजे चौखंड के पोखरवा जलवा उमड़त जाय.... सुना महादेव... जैसे छठी माई के गीतों के बीच महिलाओं ने सुशोभिताओं को साफ कर गन्ने से घेर कर दीप जलाए। 

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वाराणसी में लोक आस्था का महापर्व डाला छठ - फोटो : अमर उजाला
वेदी को अइपन व रोली से टिकने के बाद उस पर फल व साड़ी चढ़ाई गई। शाम चार बजते बजते लगभग पूरा घाट अर्घ्य देने वाली व्रती महिलाओं से खचाखच भर गया। बैंड बाजों आतिशबाजी के बीच व्रती महिलाओं ने घाटों पर आधे घंटे से ज्यादा  समय तक कमर भर पानी में खड़े होकर पुत्र प्राप्ति, पति की दीर्घायु की मंगलकामना के साथ डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया। 
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वाराणसी में लोक आस्था का महापर्व डाला छठ - फोटो : अमर उजाला
कई महिलाओं तो मनौती पूरा करने के लिए अर्घ्य देने के लिए घर से घाट तक का सफर जमीन पर लेट-लेटकर ही पूरा किया। दोनों हाथ जोड़कर लेटने के बाद एक निशान लगा दिया जाता था, जहां से वह अगले चरण के लिए लेटती थीं, इस तरह उन्होंने घाट तक का सफर पूरा किया। इस बीच अन्य श्रद्घालु उनके लिए रास्ता बनाते रहे। 
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वाराणसी में लोक आस्था का महापर्व डाला छठ - फोटो : अमर उजाला
व्रती महिलाओं की टोली ने आते और जाते हुए छठी माई की महिमा के गीत गाए। इसमें ‘कांच ही कांच की बहंगिया, बहंगी लचकत जाए। बात जो पूछेला बटोहिया, ई बहंगी केकरा के जाय। आन्हर होइबे रे बटोहिया ई बहंगी आदितमल जाय या अन्न दिहले धन दिहले, वंश बढ़इले ना, बबुआ होई हमके त हम छठ करबो ना जैसे गीत गूंजते रहे। 
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वाराणसी में लोक आस्था का महापर्व डाला छठ - फोटो : अमर उजाला
व्रती महिलाओं के साज शृंगार में सबसे खास रहा उनके माथे पर लगा सिंदूर। दरअसल यह सिंदूर सिर्फ माथे नहीं नाक तक दमकता रहा। बिहार में छठ सहित अनेक मांगलिक अवसरों पर ऐसे ही सिंदूर लगाने का रिवाज है सो यहां भी व्रती महिलाओं ने नाक से माथे तक सिंदूर लगाया। 

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वाराणसी में लोक आस्था का महापर्व डाला छठ - फोटो : अमर उजाला
रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया। लेकिन सोमवार को सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसी के साथ व्रत को पूर्णता मिलेगी। व्रती महिलाएं परिवार के साथ भोर से पहले ही घाट के लिए रवाना होंगी ताकि सूर्योदय से पहले पहुंचकर अर्घ्य के लिए तैयार हो सकें। 

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वाराणसी में लोक आस्था का महापर्व डाला छठ - फोटो : अमर उजाला
लोक आस्था का महापर्व डाला छठ पर अस्सी घाट से चेतसिंह घाट तक व्रतियों का तांता लगा रहा। व्रतियों से खचाखच भरे घाट पर जगह की कमी होने से ब्रतियों ने घाट जाने वाले सड़क पर वेदी बनाकर पूजन अर्चन किया। दोपहर से ही श्रद्धावानों के घाट पर आने का सिलसिला शुरू हो गया। तीन बजते बजते घाट पर खड़े होने का जगह नहीं बचा था।
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अस्सी घाट पर विदेशी पर्यटक - फोटो : अमर उजाला
लोक आस्था के महापर्व डाला छठ पर रविवार हो महिलाओं ने अव्यवस्थाओं के बीच सूर्य को प्रथम अर्घ्य दिया। छठ पूजा के अवसर पर नगर निगम की ओर से कुुंडों की सफाई को लेकर केवल औपचारिकता की गई।
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