वाराणसी में लोक आस्था का महापर्व डाला छठ
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व्रती महिलाओं की टोली ने आते और जाते हुए छठी माई की महिमा के गीत गाए। इसमें ‘कांच ही कांच की बहंगिया, बहंगी लचकत जाए। बात जो पूछेला बटोहिया, ई बहंगी केकरा के जाय। आन्हर होइबे रे बटोहिया ई बहंगी आदितमल जाय या अन्न दिहले धन दिहले, वंश बढ़इले ना, बबुआ होई हमके त हम छठ करबो ना जैसे गीत गूंजते रहे।