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बाढ़ के बाद काशी के खूबसूरत घाटों का बुरा हाल: 30 वर्ष बाद छठ पर ऐसी है स्थिति, व्रतियों के सामने बड़ी चुनौती

Fri, 28 Oct 2022 10:05 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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घाटों पर दिन रात सफाई का काम जारी - फोटो : अमर उजाला
गंगा में पिछले दिनों आई बाढ़ का असर अभी तक है। वाराणसी में जलस्तर घट तो रहा है लेकिन उससे निकलने वाली सिल्ट और गाद से सभी घाट पटे हुए हैं।  हाल ये है कि अब काशी के खूबसूरत घाट जो कभी पर्यटकों से गुलजार रहते थे, आज वहां हर तरफ बस गंदगी और सिल्ट का अंबार लगा हुआ है।  लोकआस्था के महापर्व पर बाढ़ का पानी, सिल्ट और गंदगी व्रतियों के सामने चुनौती पेश करेगा। 30 वर्षों के इतिहास में दूसरी बार छठ पर गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है। घाट के तीर्थ पुरोहित भी गंगा के इस रुख को देखकर परेशान हैं।

उनका कहना है कि बाढ़ के कारण घाटों का आपसी संपर्क टूटा हुआ है। गंगा घाट पर सीढ़ियों के ऊपर ही व्रती इस बार अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे, वहीं कुंड, पोखरे और सरोवरों पर भी अर्घ्य दिया जाएगा।  शुक्रवार को दशाश्वमेध घाट और राजेंद्र प्रसाद घाट पर समितियों की ओर से सिल्ट की सफाई पंप लगाकर की जा रही थी। घाट पर गाद और गंदगी इतनी ज्यादा मात्रा में जमा है कि अर्घ्य से पहले घाटों की सफाई हो पाना थोड़ा मुश्किल नजर आ रहा है। 
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घाटों पर दिन रात सफाई का काम जारी - फोटो : अमर उजाला
अस्सी से लेकर राजघाट के बीच के कई घाटों की स्थितियां भी ठीक नहीं है। अस्सी घाट से तुलसीघाट जाने वाला रास्ता बाढ़ का पानी भरने से सिल्ट मलबा जमने के कारण अभी भी बंद है। आधा दर्जन से अधिक पंप मशीन की मदद से अस्सीघाट रविदास घाट पर जमे सिल्ट की सफाई करने में सफाईकर्मी लगे हैं। 
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घाटों पर दिन रात सफाई का काम जारी - फोटो : अमर उजाला
नगर निगम के कर्मचारी पंप मशीन की मदद से सिल्ट की सफाई करने में लगे हैं। सुरक्षा के लिए बांस की बैरिकेडिंग करवाई जा रही है। अंधेरे में प्रकाश की व्यवस्था करने के लिए बिजली कर्मी खराब लाइटों को बदलने में लगे रहे। नगर निगम के तरफ से घाट किनारे चेजिंग रूम बनवाया गया। तीर्थ पुरोहित राकेश पांडेय, कन्हैया मिश्र, संदीप तिवारी ने बताया कि 1992 में बाढ़ के दौरान छठ व्रतियों को ऐसी ही परेशानी हुई थी। 

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घाटों पर दिन रात सफाई का काम जारी - फोटो : अमर उजाला
सिल्ट की अधिकता ने नगर निगम की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घाटों पर दिन रात सफाई हो रही है, लेकिन फिर भी छठ पूजा तक घाटों की पूरी सफाई होनी की उम्मीद नहीं दिख रही है। नगर निगम की कार्यदायी संस्था विशाल प्रोटेक्शन फोर्स के 265 कर्मी दिन रात घाटों की सफाई में जुटे हैं। इसके अलावा घाटों की सफाई के लिए 75 पंप लगाए गए हैं।
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घाटों पर दिन रात सफाई का काम जारी - फोटो : अमर उजाला
ऐसे में इस बार शहर के कुंड, पोखरे और सरोवरों पर पूजा की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। आदित्यनगर तालाब और भिखारीपुर पोखरे पर भी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
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घाटों पर दिन रात सफाई का काम जारी - फोटो : अमर उजाला
महापौर मृदुला जायसवाल ने शुक्रवार को छठ पूजा को देखते हुए घाट किनारे हो रही सफाई व अन्य व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने घाट पर मौजूद दलदली मिट्टी पर साइनेज लगाने, खराब लाइटों की मरम्मत तथा जहां लाइट नहीं हैं वहां नई लाइट लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों पर बैरिकेडिंग का विशेष ध्यान रखें तथा पुराने चेंजिंग रूम की सफाई के साथ ही नए चेंजिंग रूम भी बनवाएं।
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छठ को लेकर फल मंडी में भीड़ - फोटो : अमर उजाला
बरेका के सूर्य सरोवर पर छठ पूजा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शुक्रवार को व्रतियों को अंदर प्रवेश के लिए पास बांटने का अंतिम दिन था। दोपहर तक लगभग एक हजार पास बांटे जा चुके थे। छठ पूजा समिति के प्रणय झा,आशीष कुमार,अमित कुमार समेत अन्य लोग व्यवस्था में लगे हुए हैं। छठ पूजा समिति के कमलेश सिंह  ने बताया की 111 लीटर गंगा जल से सूर्यसरोवर की शुद्धि की जाएगी। एक व्रती महिला के साथ पांच लोग सरोवर पर जा सकते हैं।

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छठ को लेकर खरीदारी - फोटो : अमर उजाला
छठ के चलते बाजारों में फल, पूजन सामग्री व सूप दउरा की दुकानों पर महिलाओं की चहल-पहल रही। पूजा के लिए जरूरी बांस-सीक से बने सूप, डाला समेत मौसमी फलों सेब, संतरा, चकोतरा, केला, अनानास, सिंघाड़ा, श्रीफल समेत अन्य सामानों की दुकानों पर शुक्रवार को खरीदारों की भीड़ उमड़ी। नहाय खाय पर लौकी का दाल खाने का रिवाज है, ऐसे में शुक्रवार को रोजाना तीस रुपये किलो बिकने वाला लौकी या कद्दू 40 रुपये में बिका। 
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छठ को लेकर खरीदारी करते लोग - फोटो : अमर उजाला
नहाय-खाय के अगले दिन पंचमी को ‘खरना’ पर व्रती दिन भर निर्जल उपवास रहते हैं। शाम को गन्ने के रस की खीर बनाकर देवकरी में पांच जगह मिट्टी के बर्तन में इसे रखकर घर में ही भगवान सूर्य को भोग लगाया जाता है। प्रसाद के तौर पर व्रती इसे ग्रहण करते हैं। तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को 24 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है। शाम को अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देते हैं। चौथे दिन सप्तमी को आधी रात से ही श्रद्धालु पूजन सामग्री लेकर दोबारा नदी किनारे पहुंचने लगते हैं। 
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