फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

PHOTOS: काशी विश्वनाथ सहित 25 हजार मंदिरों के बंद रहे कपाट, ग्रहण के बाद श्रद्धालुओं ने किया गंगा स्नान

Mon, 08 Sep 2025 11:59 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Chandra Grahan 2025: काशी में चंद्रग्रहण के दौरान काशी विश्वनाथ धाम सहित 25 हजार मंदिरों के कपाट बंद रहे। चंदग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक लगने के साथ ही घरों में भी लोगों ने इसका पालन किया। 
विज्ञापन
1 of 5
चंद्रग्रहण के दौरान मंदिरों के बंद रहे कपाट - फोटो : अमर उजाला
चंद्रग्रहण की शुरुआत रात 9:57 बजे हुई। इससे पहले शहर के 25 हजार से ज्यादा मंदिरों के कपाट बंद हो गए। ग्रहण से डेढ़ घंटे पहले काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव के मंदिर तो ढाई घंटे पहले श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। इससे पहले 28 अक्तूबर 2023 को भी चंद्रग्रहण के दौरान सभी मंदिर बंद थे। रविवार को चंदग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक लग गया। 
विज्ञापन

2 of 5
संकट मोचन मंदिर - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद भगवान के भोग में तुलसीदल रखा गया और प्रतिमाओं को कपड़ों से ढक दिया गया। संकटमोचन मंदिर को मध्याह्न की आरती के बाद 12 बजे बंद कर दिया गया। इसके बाद सोमवार को मंगला आरती के साथ ही मंदिर के कपाट खुले। मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर की सफाई हुई। इसके बाद कपाट खोले गए। 
विज्ञापन

3 of 5
ग्रहण से पहले गंगा घाट पर मंत्र जपते लोग - फोटो : अमर उजाला
ग्रहण के स्पर्श के साथ शुरू हुआ स्नान चंद्रग्रहण के स्पर्श के साथ ही गंगा के तट पर स्नान का सिलसिला शुरू हो गया। रात 9:57 बजे चंद्रग्रहण का स्पर्श हुआ।

4 of 5
ग्रहण के बाद गंगा स्नान करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
ग्रहण का मोक्ष 1:27 बजे होने के बाद श्रद्धालुओं ने ग्रहण का स्नान करके दान पुण्य किया। घाट पर बाढ़ के कारण जगह कम होने के कारण लोगों ने ऊपर ही स्नान किया। जबरदस्त भीड़ रही।

इसे भी पढ़ें; Chandra Grahan 2025: तस्वीरों में देखें- काशी में ऐसे दिखा चंद्रमा, आसमान में 82 मिनट तक लाल नजर आया 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
ग्रहण के बाद गंगा स्नान करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
घर-आश्रम और मठों में भी हुआ सूतक का पालन 
चंद्रग्रहण के नौ घंटे पहले ही सूतक लगने के कारण घरों में भी इसका पालन किया गया। सूतक के पहले ही लोगों ने भोजन करने के बाद घरों के मंदिरों पर पर्दा डाल दिया।  

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें