महंत आवास पर निभाई गई परंपरा
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‘भोले के हरदी लगावा देहिया सुंदर बनावा सखी...’,‘पहिरे ला मुंडन क माला मगर दुल्हा लजाला...’, ‘दुल्हा के देहीं से भस्मी छोड़ावा सखी हरदी लगावा ना...’,‘शिव दुल्हा के माथे पर सोहे चनरमा...’,‘अड़भंगी क चोला उतार शिव दुल्हा बना जिम्मेदार’, आदि हल्दी के पारंपरिक शिवगीतों में दुल्हे की खूबियों का बखान किया गया।