लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में भारतीय राजनीति का केंद्रबिंदु बने वाराणसी में वर्तमान में भाजपा की बेचैनी बढ़ी हुई है। ऐसा हुआ है वाराणसी नगर निगम सदन में तोड़फोड़, हंगामे और अब अब बसपा जिलाध्यक्ष की गिरफ्तारी के बाद दिखी विपक्ष की एकजुटता के कारण। इसके अलावा ऐसे कई और कारण हैं जिसके चलते भाजपा में मंथन शुरू हो गया है। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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शॉल को अपने सिर पर रखे पीएम मोदी
- फोटो : अमर उजाला
2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही वाराणसी भारतीय राजनीति का केंद्रबिंदु बना हुआ है। देश के प्रधानमंत्री यहीं से चुनकर संसद में गए हैं। वाराणसी के सभी विधायक भाजपा से हैं। और तो और महापौर पद पर भी भाजपा का कब्जा है लेकिन वर्तमान में यहां भाजपा की स्थिति ठीक नहीं है।
भाजपा नगर निगम सदन सदन में तोड़फोड़ और महापौर से दुर्व्यवहार मामले में अब तक हुई कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है लेकिन विपक्षियों की एकजुटता के मद्देनजर कोई भी कदम उठाने से पहले पार्टी किसी तरह की जल्दबाजी नहीं चाहती। भाजपा कार्यकर्ताओं को इसे लेकर खास तौर से सतर्क किया गया है।
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वहीं, विपक्ष कार्यकारिणी चुनाव और पार्षदों से मुकदमा वापसी के लिए लगातार दबाव बनाए हुए है। पिछली बार पूर्व महापौर रामगोपाल मोहले ने कार्यकारिणी चुनाव नहीं कराया था। विपक्षियों का आरोप है कि भाजपा इस बार भी कार्यकारिणी का चुनाव नहीं होने देना चाहती।
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- फोटो : twitter
इधर, सपा-बसपा गठबंधन के बीच गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में हार के बाद भाजपा पर केंद्र-राज्य सरकार में सहयोगी दलों का दबाव बढ़ गया है। अपना दल (एस) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) चाह रही है कि पटेल-राजभर समुदाय के साथ-साथ पिछड़े वर्ग के एकमुश्त वोट पाने के लिए मिशन 2019 में उनको पर्याप्त भागीदारी दी जाए।
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भाजपा के गठबंधन
अपना दल (एस) और सुभासपा के बड़े नेताओं का मानना है कि सपा-बसपा गठबंधन तो हो ही चुका है, मतदाताओं में विपक्ष के प्रति 2014 के मुकाबले नाराजगी भी घटी है। उन्हें यह भी लगता है कि ओबीसी और दलित समुदाय अगले लोकसभा चुनाव में एक पार्टी-एक व्यक्ति को ध्यान में रखते हुए मतदान नहीं करेगा।
पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्वांचल के पटेल और विधानसभा चुनाव में राजभर समुदाय को काफी हद तक अपने पाले में कर चुकी भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए निषाद समुदाय पर नजर गड़ा दी है। गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में समुदाय की ताकत सामने आने से पार्टी की चिंता बढ़ गई है। इसलिए समुदाय में पैठ बढ़ाने के लिए कुछ नेताओं को आगे बढ़ाने की योजना है।