बीएचयू विधि संकाय में बुधवार को गहमागहमी और कड़ी सुरक्षा के बीच सेमेस्टर परीक्षाएं कराई गईं। इससे पहले जिन छात्रों को कम उपस्थिति के चलते परीक्षा से वंचित कर दिया गया था, उन्होंने संकाय के गेट पर ताला जड़ दिया। चीफ प्रॉक्टर के नेतृत्व में संकाय पहुंचे प्राक्टोरियल बोर्ड और सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों को वहां से खदेड़कर संकाय का ताला तोड़ा, जब जाकर परीक्षा शुरू हो सकी। इस दौरान संकाय परिसर में अफरातफरी का माहौल रहा। आगे की स्लाइड्स में देखें
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उधर, संकाय से खदेड़े गए छात्र बाद में कुलपति आवास पहुंचे, हालांकि वहां भी उनकी बात नहीं सुनी गई। विधि संकाय के करीब 120 छात्रों को कम उपस्थिति के चलते परीक्षा से वंचित कर दिया गया है। छात्रों ने इसके खिलाफ सिंह द्वार पर बीते शनिवार को फिर सोमवार को धरना प्रदर्शन किया।
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छात्रों का आरोप था कि कक्षाएं कम चलीं इस वजह से उनकी उपस्थिति कम है। बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने 40 फीसदी और इससे ऊपर उपस्थिति वाले छात्रों को परीक्षा की अनुमति दे दी। इससे नाराज छात्र बुधवार को परीक्षा शुरू होने से पहले संकाय पहुंच गए और संकाय के गेट पर ताला लगा दिया।
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उधर, परीक्षा देने पहुंचे अन्य विद्यार्थी परेशान हो उठे। हालांकि बाद में सुरक्षाकर्मियों ने इन छात्रों को खदेड़कर बाहर किया और ताला तोड़ा। इसके बाद कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा कराई गई। चीफ प्राक्टर प्रो. रोयना सिंह के अनुसार परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। 40 फीसदी से कम उपस्थिति वालों को परीक्षा नहीं देने दिया गया। उन्होंने ही व्यवधान डालने का प्रयास किया। फिलहाल मामला शांत है।
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बीएचयू के सिंह द्वार पर छात्रों ने फिर दिया धरना
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बताते चलें कि कक्षा में कम उपस्थिति वाले छात्रों की मांग थी कि उनको भी परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए, इस लेकर मंगलवार सुबह से ही केंद्रीय कार्यालय पर भी प्रदर्शन करते रहे। मंगलवार देर देर शाम संकाय प्रशासन ने बैठक कर 30 प्रतिशत से ऊपर उपस्थिति वाले छात्रों को इस शर्त पर परीक्षा में बैठने की अनुमति दी कि अगले सत्र में 100 फीसद उपस्थिति देनी होगी।
वहीं शून्य से 30 प्रतिशत उपस्थिति वालों को कोई भी ढील देने से प्रशासन ने इंकार किया, इसके कारण वे धरने पर देर रात तक बैठे रहे। शिक्षकों का कहना है कि छात्रों को अगले सत्र में उपस्थिति कम नहीं होने की शर्त पर परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई है। लेकिन इस शर्त को भी छात्र मानने के लिए तैयार नहीं हुए। इसके बाद धरना-प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस ने धक्का-मुक्की करके वहां से हटा दिया।