आजमगढ़-लखनऊ मार्ग पर स्थित शहर कोतवाली बाराबंकी के रामस्नेही घाट के पास सोमवार की सुबह हुए सड़क हादसे में आजमगढ़ के जगदीशपुर और चकअब्दुल मलिक गांव के चार लोगों की मौत और एक युवक के घायल होने से क्षेत्र में कोहराम मच गया। कुल पांच लोगों की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ पड़ी। शोक में बाजार बंद रहा। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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जगदीशपुर और चकअब्दुल मलिक गांव निवासी चार लोगों की मौत हो जाने से ना केवल चार महिलाओं की मांग सूनी हो गई। बल्कि 17 बच्चों के सिर से एक झटके में पिता का साया उठ गया। इनमें केदार यादव के पांच बेटे, कमला यादव के दो बेटे और तीन बेटियां, फिरतू यादव के एक बेटा और तीन बेटियां और चंद्रशेखर यादव के दो बेटे और एक बेटी शामिल हैं। पति की मौत के बाद सूनी हुई मांग के चलते जहां पत्नियों का रो-रोकर हाल बेहाल रहा, वहीं एक झटके में पिता का साया सिर से छिनने से इनके बच्चों का भी हाल बेहाल रहा।
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महज दो किलोमीटर की दूरी में स्थित दो गांव के पांच लोगों की लाश घर पहुंचने पर परिवार के लोग दहाड़ें मारकर रोने लगे। रिश्तेदारों ने ढांढस बंधाकर चुप कराया। मृतकों में समाजसेवी केदार यादव के भी शामिल होने से लोगों में शोक की लहर है। गांव में सन्नाटा पसर गया। लोगों की मानें तो क्षेत्र का शायद ही कोई ऐसा परिवार रहा जिसके सुखदुख या मदद के लिए केदार यादव न खड़े हुए हों।
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बाराबंकी सड़क हादसे में जहानागंज थाने के बरहतील जगदीशपुर और चकअब्दुल मलिक गांव के चार लोगों की मौत और एक युवक के घायल होने से क्षेत्र के लोग सन्न रह गए। हादसे में मृत लोगों में जहानागंज थाने के बरहतील जगदीशपुर गांव के ईंट भट्ठा मालिक केदार यादव (60), मूलचंद का बेटा कमला यादव (35), पड़ोसी फिरतू यादव (50) और पड़ोसी गांव चकअब्दुल मलिक निवासी चंद्रशेखर यादव उर्फ भोजू (35) का नाम शामिल है। घायल अमर यादव (25) चकअब्दुल मलिक गांव का निवासी है।
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बरहतील जगदीशपुर गांव निवासी मूलचंद यादव का आजमगढ़ के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। हालत गंभीर देख डाक्टर ने हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया तो यह लोग मूलचंद को लखनऊ लेकर जा रहे थे। एंबुलेंस चालक अमदही गांव निवासी अजय यादव ने घरवालों को हादसे की सूचना दी तो कोहराम मच गया।
कमला पेशे से शिक्षक थे। वह दो बेटे और तीन बेटियों के पिता थे। फिरतू की जहानागंज के बवाली मोड़ पर स्टेशनरी की दुकान थी। वो एक बेटे और तीन बेटियों के पिता थे। चंद्रशेखर की फिरतू के बगल में हार्डवेयर की दुकान थी। वह दो बेटे और एक बेटी के पिता थे। सात भाइयों में छोटे चंद्रशेखर ही घर की देखभाल करता था। उसके अन्य भाई विदेश में रहते हैं।