प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गुजराती लोक, कला-संस्कृति की छटा शनिवार को गंगा तीरे अस्सी घाट पर छा जाएगी। अस्सी घाट को गुजरात के रंग में रंगने की तैयारियों को शुक्रवार देर शाम अंतिम रूप दे दिया गया। गरबा-डांडिया लोक नृत्य और पारंपरिक गीतों के साथ शनिवार की शाम गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी सदाकाल उत्सव का उद्घाटन करेंगे।
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गुजरात सदाकाल उत्सव में पारंपरिक संस्कृति के विविध रंग दिखेंगे
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गुजराती मेर रास के अलावा डांगी नृत्य की प्रस्तुति होगी
- फोटो : अमर उजाला
गुजरात के कई मंत्री सदाकल उत्सव में शामिल होंगे। गुजरात सदाकाल उत्सव में पारंपरिक संस्कृति के विविध रंग दिखेंगे। शुरुआत होगी रामलीला समेत कई फिल्मों में स्वर देने वाले सूफी गायक ओस्मान मीर के गायन से।
इसके अलावा हास्य दरबार के चर्चित कलाकार रंजीत वांग, गुजराती मेर रास के अलावा डांगी नृत्य की प्रस्तुति होगी।
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काशी की विशिष्टता वाले खान-पान के स्टाल भी होंगे
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काशी की विशिष्टता वाले खान-पान के स्टाल भी होंगे
- फोटो : अमर उजाला
11 दिसंबर को हास्य नाटक‘रंग रंगीलो गुज्जू भाई’ की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी। गुजराती रंगमंच के जाने माने अभिनेता सिद्धार्थ संदेरिया भी अभिनय की छटा बिखेरेंगे। इसके अलावा गुजरात प्रदर्शनी भी घाट पर लगाई जाएगी।
इस प्रदर्शनी में कुल 28 स्टाल लगाए जाएंगे। गुजरात के विकास और संस्कृति को दर्शाने वाले मॉडल तो होंगे ही, काशी की विशिष्टता वाले खान-पान के स्टाल भी लगाए जाएंगे।
काशी और गुजरात की संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा
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काशी और गुजरात की संस्कृति का अद्भुत संगम
- फोटो : अमर उजाला
काशी गुजराती समाज के सचिव दिनेश बजाज ने बताया कि इसमें कचौड़ी, जलेबी, मलइयो और गर्म दूध का विशेष आकर्षण होगा। इस उत्सव में काशी और गुजरात की संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
इससे पहले दिन में गुजरात शासन के प्रमुख सचिव एनपी लवंगिया, अग्र सचिव (प्रशासन) अनीता करवाल समेत कई अफसरों ने घाट पर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया।
लोक संस्कृति का आदान-प्रदान किया जाएगा
- फोटो : अमर उजाला
बीते लोकसभा चुनाव के दौरान विकास के जिस गुजरात माडल की चर्चा रही, उसकी झलक अगले दो दिनों तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काशी में दिखेगी।
अस्सी घाट पर आज सदाकात गुजरात महोत्सव का उद्घाटन गुजरात के मुख्यमंत्री करेंगे। काशी गुजराती समाज की ओर से आयोजित दो दिनी कार्यक्रम की शुरुआत काफी रंगारंग होगी।
अनिवासी गुजरातियों के विकास और उनके बीच संस्कृति-परंपरा की बुनियाद मजबूत करने के लिए यह उत्सव किया जा रहा है।