एशियाई खेलों में रोहित यादव के कांस्य जीतने में उनकी मां पुष्पा देवी की अहम भूमिका रही। एक समय ऐसा था जब रोहित खेल को हमेशा के लिए अलविदा कहने का मन बना चुके थे। उस समय उनकी मां पुष्पा देवी ने कहा कि बेटा, अभी उम्र ही क्या है, देश के लिए सोना जीतना है। मां पुष्पा देवी की इसी सीख ने रोहित की किस्मत बदल दी।
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पुष्पा देवी ने बेटे रोहित यादव को दी हिम्मत
- फोटो : अमर उजाला
जापान के नागोया में आयोजित एशियाई खेलों के पोडियम पर जब रोहित यादव के गले में कांस्य पदक पहनाया गया, तो पूरे देश ने उनकी प्रतिभा को सलाम किया। इस चमकते पदक के पीछे एक ऐसा दौर भी था, जब रोहित खेल को हमेशा के लिए अलविदा कहने का मन बना चुके थे। उस नाजुक मोड़ पर अगर उनकी मां पुष्पा देवी एक चट्टान की तरह उनके पीछे न खड़ी होतीं तो शायद देश आज इस ऐतिहासिक पल का गवाह न बन पाता।
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पिता को मिठाई खिलातीं रोहित की मां
- फोटो : अमर उजाला
रोहित की मां पुष्पा देवी ने बेटे के संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स में सातवें नंबर पर रहने के बाद रोहित अंदर से टूट चुके थे। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली असफलता ने उन्हें इस कदर आहत किया कि वे निराशा में घिर गए। भाला फेंकना छोड़कर खेल को अलविदा कहने की बात करने लगे थे। पुष्पा देवी बताती हैं कि जब रोहित ने निराश होकर खेल छोड़ने की बात कही तो एक मां के तौर पर मेरा कलेजा कांप गया। मैंने उसके सिर पर हाथ रखा और समझाया कि बेटा, अभी तेरी उम्र ही क्या है? एक हार से जिंदगी और सपने खत्म नहीं होते। तुझे तो अभी देश के लिए ओलंपिक और बड़े मंचों पर गोल्ड मेडल जीतना है। हिम्मत मत हार, मैदान में डट जा।
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मोबाइल पर खेल देखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
मां की इस ममता भरी डांट और हौसले ने संजीवनी का काम किया। रोहित ने अपनी निराशा को ताकत में बदला, दोबारा मैदान पर पसीना बहाया, भुवनेश्वर में 87.48 मीटर का नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया और आखिरकार नागोया एशियाड में 84.35 मीटर का थ्रोकर देश की झोली में पदक डाल दिया।
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मोबाइल पर बात करते रोहित के पिता
- फोटो : अमर उजाला
जौनपुर के रोहित ने जेवलिन में जीता कांस्य, गांव में मना जश्न
जापान के नागोया में आयोजित 20वें एशियाई खेलों में जौनपुर के स्टार जेवलिन थ्रोअर रोहित यादव ने कांस्य पदक जीता है। उन्होंने देश और जिले का मान बढ़ाया है। सोमवार को रोमांचक फाइनल मुकाबले में रोहित ने 84.35 मीटर दूर भाला फेंककर पोडियम पर तीसरा स्थान हासिल किया। हालांकि, रोहित अपने हालिया नेशनल बेस्ट रिकॉर्ड (87.48 मीटर) को दोहराने से चूक गए। फाइनल मुकाबले में शुरुआत से कड़ा मुकाबला देखने को मिला। श्रीलंका के रोमेश पथिरागे ने 88.55 मीटर का जोरदार थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारत के यशवीर सिंह ने 85.72 मीटर भाला फेंककर रजत पदक पर कब्जा जमाया।
अदारी डभिया गांव में जश्न, बंटी मिठाइयां
मछलीशहर तहसील के अदारी डभिया गांव में जैसे ही रोहित के पदक जीतने की खबर टीवी स्क्रीन पर फ्लैश हुई। परिवार वाले और ग्रामीण खुशी से झूम उठे। पिता सभाजीत यादव और परिवार के सदस्यों को बधाई देने वालों का तांता लग गया। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर जश्न मनाया। एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। रोहित के पिता व पूर्व मैराथन धावक सभाजीत यादव ने कहा कि खेल में हार-जीत लगी रहती है, हालांकि वे रोहित से स्वर्ण की उम्मीद कर रहे थे लेकिन एशिया स्तर की इतनी बड़ी प्रतियोगिता में देश के लिए कांस्य पदक जीतना भी गर्व की बात है।