अश्विन नाट्य महोत्सव के छठवें दिन प्रेम के शाश्वत स्वरूप को प्रकट करते नाटक 'गांव ससुराल, नाम दमाद' का सशक्त मंचन हुआ। कलाकारों ने पूर्वांचल की लोक संस्कृति और पर्व की अहमियत को अभिनय के जरिये बखूबी दर्शाया।
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गांव ससुराल-नाम दामाद नाटक का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : उज्जवल गुप्ता
नागरी नाटक मंडली में चल रहे नाट्य महोत्सव में मंथन संस्था की इस प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। कलाकारों ने रूप सज्जा, संवाद और अभिनय का सुंदर समन्वय करते हुए प्रभावी प्रस्तुति से खूब वाहवही लूटी।
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गांव ससुराल-नाम दामाद नाटक का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : उज्जवल गुप्ता
प्रसंगानुसार एक युवक एक लड़की से विवाह करना चाहता है। लेकिन उसकी शादी दूसरे से हो जाती है। सावन व भादो में कजरी व तीज के त्योहार की परंपराओं को निभाती है और उसे उनमें एक बार फिर प्रेम प्रकट होने लगता है।
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गांव ससुराल-नाम दामाद नाटक का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : उज्जवल गुप्ता
निर्देशन परितोष भट्टाचार्य, आलेख अर्चना शर्मा और गीत व संगीत डॉ. शुभ्रा वर्मा का रहा।