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अमेरिकी टीवी शो में बनारस के अघोरी साधुओं का अपमान, भड़के हिंदू

Wed, 08 Mar 2017 10:17 AM IST
amarujala.com - Written by: शैलेश कुमार शुक्ल
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reza aslan - फोटो : twitter
अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन का नया शो बिलिवर्स पहले ही दिन विवादों में आ गया। अघोरी साधुओं पर दिखाए गए इस शो का पूरे अमेरिका में हिंदू विरोध कर रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया में सीएनएन के खिलाफ जोरदार अभियान चल रहा है। आगे की स्लाइड में जाने पूरा मामला-
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Reza Aslan - फोटो : cnn
टीवी शो बिलिवर्स में अमेरिका के धार्मिक विद्वान रेजा असलान को वाराणसी में अघोरी साधु के साथ बैठकर इंसान के मस्तिष्क के ऊतकों को खाते हुए दिखाया गया है। साथ ही शो में यह बताने की कोशिश की गई है कि हिंदू नरभक्षी होते हैं।
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Reza Aslan - फोटो : cnn
शो में दिखाया गया है कि अघोरी साधू इंसान की खोपड़ी में असलान को शराब पिलाते हैं। वहीं एक जगह अघोरी साधू कहता है कि ज्यादा बोलोगे तो तुम्हारा गला काट देंगे। इस पर असलान कहते हैं कि हमने यहां आकर गलती की।

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Reza Aslan - फोटो : cnn
इस शो के बाद इस्लाम में आस्‍था रखने वाले रेजा असलान की पूरे अमेरिका और भारत में हिंदू कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि रेजा हिंदूफोबिया से ग्रसित हैं और हिंदुओं की नकारात्मक छवि पेश कर रहे हैं।
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Reza Aslan - फोटो : cnn
वहीं कुछ लोगों कहा कहना है कि असलान ने अपने शो में अघोरी साधू के इंसान के मांस को खाने पर ज्यादा फोकस किया। अमेरिका में रह रहे अरनब रॉय ने ट्वीट कर लिखा कि असलान ने हिंदुओं के लिए बेहद पवित्र गंगा मां को विशाल शौचालय बताया।
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aghori sadhu - फोटो : amar ujala
अरनब ने कहा कि दुनिया के सबसे प्राचीन शहर वाराणसी को असलान ने 'सिटी ऑफ डेड ' बताया । यह सरासर गलत है और हिंदुओं की आस्‍था के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि इस शो को बनाने से पहले असलान ने अघोरी साधुओं के बारे में रिसर्च नहीं किया।
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aghori sadhu - फोटो : amar ujala
बता दें कि अघोर का अर्थ होता है गंगा । डाक्टर रुप कुमार बनर्जी के मुताबिक अघोर पीठ के अनुयायियों का मानना है कि जिस प्रकार गंगा संसार की गंदगी अपने में समाहित कर उसे पवित्र कर देती है, उसी प्रकार औघड़ साधू होता है।

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aghori sadhu - फोटो : अमर उजाला
संसार के सभी पापी अघोर साधू के पास जाकर पवित्र हो जाते हैं। यही एक ऐसा स्‍थान है जहां शिव को बिना लाग लपेट के पाया जाता है। यहां किसी भी ढोंग की आवश्यकता नहीं है। सिर्फ गुरु के प्रति समर्पण ही शिव की प्राप्ति है।
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aghori sadhu - फोटो : cnn
शव साधना । जब तक शरीर में प्राण है तब तक शिव है, जब प्राण निकल गया तो वह शव है। अघोरी साधू समाज के सबसे निकृष्ट चीज है, उसी में ईश्वर की प्राप्ति कर लेते हैं। जाति व्यवस्‍था में विश्वास नहीं करते हैं।
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