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काशी एयर शो: रोमांचक क्लाइमेक्स के 9 जांबाज, 3000 घंटे उड़ा चुके हैं जेट; ग्रुप कैप्टन का कॉल साइन ‘डस्टी’

Sun, 25 Oct 2026 07:20 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में एयर शो के रोमांचक क्लाइमेक्स की जिम्मेदारी नौ जांबाज पायलटों के कंधों पर है। ये पायलट अब तक तीन हजार घंटे से अधिक फाइटर जेट उड़ा चुके हैं। आसमान में हैरतअंगेज करतब, सटीक तालमेल और तेज रफ्तार के साथ ये वायुसेना के शौर्य और कौशल का प्रदर्शन कर दर्शकों को रोमांचित कर रहे हैं।
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अजय दशरथी, दिवाकर शर्मा, तुषार शर्मा, भावेश शर्मा और वी. विक्रम। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
एयर शो का रोमांचक क्लाइमेक्स जिसे देख हर कोई चौंक उठा, वह सूर्य किरण एरोबैटिक टीम के नौ विमानों का आसमानी करतब रहा। इन विमानों को उड़ाने से पहले इन पायलट्स की जांबाजी फाइटर जेट पर भी दिख चुकी है। नाै जांबाजों में से छह पायलट सुखोई एमकेआई 30 के ही पायलट रह चुके हैं। 
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नमो घाट पर होगा आकर्षक एयर शो। - फोटो : अमर उजाला
3000 घंटे विमान उड़ाने का अनुभव रखने वाले ग्रुप कैप्टन अजय दशरथी के नेतृत्व में शनिवार को इस टीम का आसमान पर सटीक तालमेल दिखा। ग्रुप कैप्टन अजय दशरथी का कॉल साइन ‘डस्टी’ है। इससे पहले वह सुखोई 30 एमकेआई से उड़ान भरते थे। चेन्नई के अजय जून 2006 में भारतीय वायुसेना में कमीशंड हुए थे। 
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काशी में भव्य एयर शो। - फोटो : अमर उजाला
दूसरे स्थान पर हैं स्क्वॉड्रन लीडर दिवाकर शर्मा। इनका कॉल साइन दिवी है। इन्हें 1200 घंटे का अनुभव है। इससे पहले सुखोई 30 एमकेआई उड़ाया है। 2013 में कमीशंड हुए। हॉक एयरक्राफ्ट का भी काम संभाला है। दूसरे नंबर पर ही स्कवॉड्रन लीडर तुषार शर्मा हैं, जिन्हें टैंगो कहते हैं। इन्हें 1500 घंटे तक विमान उड़ाने का अनुभव है। इन्होंने जगुआर और मिग-21 एयरक्राफ्ट भी उड़ाए हैं। 

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एयर शो में हेलीकाॅप्टर। - फोटो : अमर उजाला
स्कवॉड्रन लीडर एडवर्ड प्रिंस यानी कि एडी को 1500 घंटे तक मिग-21 बिसॉल सहित अन्य विमानों को उड़ाने का अनुभव है। इन्होंने 195वें पायलट कोर्स से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। स्कवॉड्रन लीडर चेन्नई के वी. विक्रम विकी को 1600 घंटे तक सुखोई 30 एमकेआई उड़ाने का अनुभव है। 
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जेट विमान ने दिखाए करतब। - फोटो : अमर उजाला
ये संगीतप्रेमी हैं और इन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। विंग कमांडर तेजेश्वर सिंह को 2300 घंटे तक विमान उड़ाने अनुभव है। चंडीगढ़ के तेजेश्वर इससे पहले सुखोई 30 एमकेआई उड़ाते थे। जयपुर के स्कवॉड्रन लीडर सांजेश सिंह संजू को 1900 घंटे विमान उड़ाने का अनुभव है। 
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नमो घाट पर एयर शो। - फोटो : अमर उजाला
इनका पिछला एयरक्राफ्ट सुखोई 30 एमकेआई ही रहा है। स्कवॉड्रन लीडर भावेश शर्मा के पास 1600 घंटे का अनुभव है। 1400 घंटे तक जेट उड़ाने वाले स्कवॉड्रन लीडर अमन गोयल ने इससे पहले मिग-29 यूपीजी उड़ाया है। सटीकता और सिचुएश्नल अवेयरनेस के लिए जाने जाते हैं। छत्तीसगढ़ के स्कवॉड्रन लीडर गौरव पटेल को 2000 घंटे का अनुभव है। इन्होंने जगुआर उड़ाया है। 
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एयर शो के रिहर्सल में हेलीकाॅप्टर। - फोटो : अमर उजाला
स्क्वॉड्रन लीडर ललित वर्मा ने सुखोई 30 एमकेआई चलाया है। 1600 घंटे का अनुभव है। स्क्वॉड्रन लीडर राहुल सिंह भी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से रहे हैं। मेरठ निवासी हैं। इन्होंने भी पहले सुखोई 30 एमकेआई जेट उड़ाया है। इनके पास 1800 घंटे विमान उड़ाने का अनुभव है। केरल के स्क्वॉड्रन लीडर विष्णु भी सुखोई 30 एमकेआई चलाते रहे हैं। 1800 घंटे विमान उड़ाने का अनुभव है। 

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वाराणसी में एयर शो। - फोटो : अमर उजाला
1600 घंटे तक हवा में बीता हर पल हमारे लिए रहा खास, इसमें युद्ध की भी स्थिति
वाराणसी। नमो घाट पर एयर शो के दौरान वायुसेना के पायलट स्क्वाड्रन लीडर अंकिता सिंह, गौतम त्यागी और भावेश शर्मा ने मीडिया से बातचीत की। भावेश शर्मा ने कहा कि 1600 घंटे तक एयरक्राफ्ट चलाकर हवा में बिताया हर एक पल उनके लिए खास है। 2014 से कमीशंड होने के बाद भारतीय युवा सेना की हर गतिविधियों का हिस्सा बनने का मौका मिला।

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वाराणसी में एयर शो की चल रही तैयारी। - फोटो : अमर उजाला
इस बीच कई तरह की स्थितियों से देश गुजरा। एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव के पायलट स्क्वाड्रन लीडर गौतम त्यागी ने बताया कि काशी में यहां पर भावी पीढि़यों को कुछ प्रेरणा देकर कॅरिअर के रूप में चुने और जो लोग उम्र के पड़ाव से आए बढ़ गए हैं वो प्रेरित होकर अच्छा जीवन बिताएं।
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वाराणसी में एयर शो का गैंड रिहर्सल हो चुका है। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
आप जो नीचे से देखते हैं लेकिन इसके लिए कठिन परिश्रम करना होता है। एक अकेले पायलट नहीं ग्राउंड पर पूरी तकनीकी टीम का काम होता है। स्क्वॉड्रन लीडर अंकिता ने कहा कि ये बहुत ही खूबसूरत शहर है। सारंग एशिया की एकमात्र पांच हेलीकॉप्टरों की टीम है जिसे भारत में एचएएल ने बनाया है।
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