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सार्जेंट विशाल ने होली साथ मनाने का परिजनों से किया था वादा, एयर स्ट्राइक वाले दिन फोन पर कहा...

Fri, 01 Mar 2019 01:19 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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विशाल पांडेय अपने परिवार के साथ - फोटो : amar ujala
कश्मीर के बडगाम जिले में वायु सेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर हादसे में वाराणसी के लाल सार्जेंट विशाल पांडेय ने जान गंवा दी। सार्जेंट विशाल दो महीने पहले तक राजस्थान में रहते थे। इसके बाद उनका तबादला जम्मू-कश्मीर में कर दिया गया था। 26 फरवरी को पाकिस्तान पर हुए एयर स्ट्राइक के बाद से ही विशाल के घरवाले चिंतित थे। उन्हें नहीं पता था कि बेटा घरवालों से किया वादा नहीं निभा पाएगा। देखें आगे की स्लाइड्स में...
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vishal pandey - फोटो : amar ujala
कहां चले गए मेरे लाल... तेरे बिना अब कैसे रहेंगे हम...। विशाल की जान गंवाने की खबर मिलने के बाद बुधवार शाम से ही मां विमला देवी यही शब्द कहकर बिलखती रहीं। उन्हें ढांढस बंधा रहीं मोहल्ले और रिश्तेदार महिलाओं की भी हिम्मत जवाब दे रही थी। पिता विजय शंकर पांडेय एक कमरे में गुमसुम बैठे थे और आंखों से आंसुओं की धार रुक नहीं रही थी। 
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vishal pandey - फोटो : amar ujala
शहीद के बड़े भाई विकास ने बताया कि दो महीने पहले तक विशाल राजस्थान में तैनात थे। जम्मू-कश्मीर ट्रांसफर होने के बाद 26 फरवरी की भोर वायु सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में एयर स्ट्राइक की तो हम सभी विशाल के लिए चिंतित हुए। फोन पर विशाल ने कहा था कि घबराने की कोई बात नहीं है, सब कुछ ठीक है। 

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vishal pandey - फोटो : amar ujala
14 फरवरी को पुलवामा में आतंकी हमले के बाद पिता जी और विशाल में हालात को लेकर लंबी बातचीत हुई थी। विशाल कहते थे कि हिंद की सेना सर्वश्रेष्ठ है और पाकिस्तान को हिंदुस्तान के आगे घुटने टेकने पड़ेंगे। उन्हें अपनी सेना पर पूरा भरोसा था। विकास ने बताया कि विशाल ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई बलिया जिले के नागाजी सरस्वती विद्या मंदिर और स्नातक प्रयागराज स्थित इविंग क्रिश्चियन कॉलेज से उत्तीर्ण की। विशाल संवेदनशील और पढ़ाई के प्रति ध्यान देने के साथ ही घरेलू जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करते थे।
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vishal pandey - फोटो : amar ujala
परिजनों ने बताया कि विशाल फरवरी 2018 में घर आए थे। अब होली पर उन्हें पत्नी और बच्चों के साथ घर आना था। 2009 में विशाल ने हुकुलगंज की यादव गली में मकान बनवाया तो परिवार के सभी लोग यहीं रहने लगे। 2009 में ही सुंदरपुर निवासी बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान में कार्यरत रवि कुमार पांडेय की बेटी माधवी से विशाल का विवाह हुआ। बहन वर्णिता की शादी हो चुकी है, जबकि छोटे भाई आकाश और छोटी बहन वैष्णवी अविवाहित हैं। परिजनों ने बताया कि विशाल अपने काम में इतने कुशल थे कि छुट्टी पर आते, तब भी उनके सहकर्मियों का फोन उनके पास किसी न किसी काम से आता रहता था। 
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vishal pandey - फोटो : amar ujala
विशाल के पिता विजय शंकर ने कहा कि हमें अपने बेटे पर गर्व है। हम खुशनसीब हैं कि हमें उसका पिता कहलाने का सौभाग्य मिला। कहा कि सरकार पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का समूल नाश करे। ऐसी व्यवस्था हो कि किसी का बेटा, भाई या पति देश की सरहद की रक्षा करते समय अपनी जान ना गंवाए। परिजनों ने बताया कि विजय शंकर ने सीमित संसाधनों में भी अपने बच्चों की परवरिश और शिक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ी। वे विशाल पर सदैव गर्व महसूस करते थे और करते रहेंगे।
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vishal pandey - फोटो : amar ujala
सार्जेंट विशाल की खबर काशीपुर कुरहुआ स्थित उनके पैतृक गांव में रहने वाले पट्टीदारों और ग्रामीणों को मिली तो सभी अवाक रह गए। चचेरे चाचा ओम प्रकाश पांडेय, दादी सावित्री देवी, चचेरे भाई धर्मेंद्र पांडेय और चाची शारदा पांडेय की आंखों से आंसू बहने लगे। पड़ोसी चाचा ग्राम प्रधान अनिल पांडेय ने बताया कि विनम्र स्वभाव वाले विशाल एक साल पहले गांव आए थे और कुल देवता की पूजा करके गए थे। उधर, पट्टीदारों और ग्रामीणों में गुस्सा भी देखने को मिला। सभी का कहना था कि सरकार पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दे। भारत सरकार पाकिस्तान को इस कदर विवश कर दे कि आतंकवाद की कमर टूट जाए।
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vishal pandey - फोटो : amar ujala
सार्जेंट विशाल के भाई विकास और पिता विजय शंकर को उनके जान गंवाने की खबर बुधवार की शाम मिली थी। काफी देर तक इसके बारे में विशाल की मां को नहीं बताया गया। लेकिन कितना सब्र रखते और आंखे छलक ही पड़ी और मां को पता चला तो अचेत हो गईं। बेटे के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए मां-बाप और परिजनों ने रात आंखों में ही काट दी। वहीं, मुहल्ले के लोगों को जानकारी हुई तो सभी विशाल के घर पहुंच गए। मोहल्ले के कई घरों में गुरुवार को भी चूल्हा नहीं जला और सभी विशाल के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रहे थे।
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