...तुमने ऐसा क्यों कर दिया। उन्नाव कांड में यह बात बेहद अहम है। दरअसल मृतक काजल के पिता ने यह बात सीएचसी में अपने बेटे कल्लू से कही थी। हालांकि आगे वह कुछ नहीं बोला था, मगर पुलिस के लिए इतना काफी था। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और इस बयान से मामले की तफ्तीश पूरी तरह ऑनर किलिंग की तरफ मुड़ गई है।
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उन्नाव कांड: दफनाए गए बुआ भतीजी के शव
- फोटो : amar ujala
सवाल उठता है कि आखिर इस तरह की बात पिता अपने बेटे से क्यों कहेगा? पुलिस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तफ्तीश आगे बढ़ा रही है। शुक्रवार शाम तक इसमें बड़ा खुलासा हो सकता है। बता दें कि उन्नाव के असोहा में बुधवार शाम साढ़े छह बजे तीनों खेतों में बदहवास हालत में पड़ी मिलीं थीं। सीएचसी में डॉक्टरों ने काजल और कोमल को मृत घोषित कर दिया था। रोशनी को गंभीर हालत में कानपुर के रीजेंसी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने गुरुवार को दोनों के शवों का पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ हुआ कि किशोरियों की मौत जहर से हुई है।
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उन्नाव केस: इसी जगह मिले थे बुआ भतीजी के शव, गंभीर हाल में मिली थी चचेरी बहन
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क्या कुछ विवाद भी हुआ था?
काजल के पिता सूरज पाल की बातों से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे अहम तो यह बात है कि क्या उसे पता है कि वारदात के पीछे कौन है और क्यों है। फिलहाल अभी तक पुलिस ने उससे इस बारे में खास पूछताछ नहीं की है। वहीं एक शख्स ने बताया कि एक-दो महीने काजल के घर पर उसको लेकर बड़ा विवाद हुआ था। हालांकि यह बात कोई नहीं बता सका कि आखिर विवाद क्या और क्यों हुआ था।
तुरंत नहीं दी थी पुलिस को सूचना
परिजन तीनों किशोरियों को उठाकर एक निजी अस्पताल ले गए। वहां पर डॉक्टरों ने उसको बगैर पुलिस को जानकारी दिये भर्ती करने से इंकार कर दिया। उसके बाद परिजन तीनों को लेकर सीएचसी पहुंचे। यहां पर भी वही शर्त डॉक्टर ने रखी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। बाद में डॉक्टरों ने तीनों किशोरियों को देखकर दो को मृत घोषित किया और तीसरी को कानपुर रेफर किया। अब सवाल है कि इतनी बड़ी वारदात होने के बाद पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी। क्या मामले को परिजन छिपा रहे थे। पुलिस इस सवाल का भी जवाब तलाश रही है।
उन्नाव केस: फिर शुरु हुई बुआ भतीजी के शव मिलने की जांच
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पुलिस ने बेरीकेडिंग कर गांव घेरा
पुलिस ने गांव को जाने वाले रास्ते पर तीन जगहों पर बेरीकेडिंग लगाई है। गुरुवार सुबह पहले मीडियाकर्मियों को भी गांव जाने से रोक दिया था, लेकिन मामले के तूल पकड़ते ही आवाजाही शुरू कर दी थी। भारी पुलिस की तैनाती की गई है। लखनऊ के कई थानों की फोर्स भी तैनात की गई है।