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सोनभद्र में मजदूरों पर गिरी चट्टान: 2012 में हुआ था इसी तरह का हादसा, 12 की गई थी जान; सुरक्षा पर सवाल

Sun, 16 Nov 2025 06:13 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।

सार

यूपी के सोनभद्र में बीते शनिवार को 15 मजदूरों के ऊपर चट्टान गिर गया। यहां पर ब्लास्टिंग के लिए होल बनाए जा रहे थे। हादसे की जानकारी मिलते ही माैके पर प्रशासनिक अमला पहुंच गया। रविवार की रात करीब दो बजे एक मजदूर की लाश मिली थी, बाकी लापता बताए जा रहे हैं।
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हादसे के बाद माैके पर रेस्क्यू ऑपरेशन। - फोटो : अमर उजाला
ओबरा थाना क्षेत्र के राजकीय पीजी काॅलेज के पास खदान दरकने की घटना ने फरवरी 2012 में शारदा मंदिर के पास हुए हादसे की याद ताजा कर दी है। उस समय भी गहरी खदान का एक हिस्सा दरकने से 12 की मौत हो गई। हादसे के 24 घंटे के भीतर नौ शव निकाल लिए गए थे लेकिन शेष तीन शव कई दिन तक राहत कार्य चलाकर पूरी तरह मलबा हटाने पर बरामद हुए थे।

वर्ष 2012 में 17 फरवरी को दर्दनाक हादसा हुआ था।  घटना के वक्त खदान में ब्लास्टिंग के बाद पत्थर निकासी का काम चल रहा था। उसी दौरान हादसे के एक छोर पर मौजूद हाइटेंशन टावर गिर पड़े। इससे खदान का एक हिस्सा भरभराकर ढह गया और उसमें कुल 12 मजदूरों की दबकर मौत हो गई। 
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डीएम ने लिया घटनास्थल का जायजा। - फोटो : अमर उजाला
लगभग एक सप्ताह तक चले राहत कार्य में 11 मौतों की जानकारी सामने आई थी। एक ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। लोग इस हादसे को भूल पाते, इससे पहले 15 अक्तूबर 2015 को बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र के रासपहरी में असुरक्षित तरीके से रखे विस्फोटक के ब्लास्ट करने से आठ मजदूरों की मौत हो गई। अब एक बार फिर से बड़ा हादसा सामने आया है। जिस खदान में हादसा हुआ उसे काफी गहरा तो बताया ही जा रहा है। 

इस खदान में वर्ष 2016 से 2026 तक के लिए मेसर्स कृष्णा माइनिंग को पट्टा आवंटित किया गया था। हैरत में डालने वाली बात यह रही कि अमूमन जब भी किसी वीवीआईपी का खनन क्षेत्र में दौरा होता है तो पत्थर खनन से जुड़े इलाके में सारे काम बंद किए जाते हैं। बावजूद किसकी शह पर खनन कार्य जारी था, इसे लेकर जहां तरह-तरह की चर्चाएं बनी हुई थी।वहीं संबंधितों की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की मांग उठाई जाती रही। 

किसी भी खदान में कार्य के वक्त मजदूरों के सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए जाने के निर्देश हैं। बावजूद एक तरह गहरी खाई में तब्दील हो चुकी खदान में ब्लास्टिंग के लिए बनाए जा रहे होल को लेकर कोई सुरक्षा उपाय क्यूं नहीं अपनाए गए? इसको लेकर भी सवाल उठाए जाते रहे। 
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श्री कृष्णा माइनिंग में चल रहा था काम। - फोटो : अमर उजाला
डेढ़ सौ फीट से ज्यादा गहरी खदान होने से राहत कार्य में दिक्कत
ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में शनिवार की दोपहर बाद ड्रिलिंग के दौरान पत्थर की खदान धंस गई। इससे खदान में काम कर रहे कई मजदूरों के दबने की आशंका है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, 18 से ज्यादा लोग मौके पर काम कर रहे थे। हादसे के वक्त खदान में नौ कंप्रेशर मशीनों से ब्लास्टिंग के लिए होल किए जा रहे थे। 

सूचना पर डीएम, एसपी सहित अन्य अफसर मौके पर पहुंचे। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए एसडीआरएफ की टीम बुलाई गई है। हादसे में दो मजदूरों के मौत की चर्चा थी, लेकिन अभी अधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई।

चंद किलोमीटर दूरी चोपन में जनजातीय गौरव दिवस समारोह में मुख्यमंत्री के आगमन के मद्देनजर खनन क्षेत्र में शनिवार को ब्लास्टिंग बंद थी। लेकिन राजकीय पीजी काॅलेज ओबरा के पास मेसर्स कृष्णा माइनिंग के नाम से आवंटित खदान में ब्लास्टिंग के लिए होल बनाने का काम चल रहा था। 

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बिलखती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस काम में नौ कंप्रेशर मशीनें और 18 से ज्यादा मजदूर लगे थे। बताया जा रहा कि दोपहर करीब ढाई बजे अचानक एक तरफ की चट्टान धंस गई। मलबा करीब डेढ़ सौ फीट नीचे गिरा। कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे। आनन-फानन अल्ट्राटेक, ओबरा व अन्य परियोजनाओं के राहत दल की मदद से बचाव कार्य शुरू कराया गया।

डीएम बद्रीनाथ सिंह, एसपी अभिषेक वर्मा सहित पुलिस-प्रशासन के अन्य अफसर मौके पर पहुंचे। राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। ज्यादातर मजदूर पनारी गांव के हैं। 

 प्रधान पति लक्ष्मण यादव ने गांव के दो मजदूरों की मौत का दावा किया। हालांकि आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। पोकलेन से मलबा हटाने का प्रयास किया जाता रहा लेकिन खदान काफी गहरी होने के कारण राहत कार्य में दिक्कत आ रही है।
मेसर्स कृष्णा माइनिंग में हादसा हुआ है। कुछ लोगों के मलबे में दबने की आशंका है। राहत कार्य जारी है। वाराणसी से एनडीआरएफ और मिर्जापुर से एसडीआरएफ की टीम बुलाई गई है। मलबा हटने के बाद ही सही स्थिति स्पष्ट होगी। पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी। - बद्रीनाथ सिंह, डीएम।
 
बिरसा मुंडा जयंती पर इस तरह की घटना काफी दुखद है। सरकार की संवेदना प्रभावित परिवारों के साथ है। कार्य बंद किए जाने की पूर्व सूचना के बाद भी किन परिस्थितियों में कार्य कराया जा रहा था और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - संजीव सिंह गोंड, राज्य मंत्री, समाज कल्याण।
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अफसरों ने घटनास्थल का लिया जायजा। - फोटो : अमर उजाला
घटना के बाद से ये मजदूर लापता : हादसे के वक्त में 15 से अधिक मजदूर काम कर रहे थे। इसमें पनारी के करमसार टोला निवासी इंद्रजीत उसका भाई संतोष यादव, टोला पड़री निवासी कृपाशंकर खरवार, अशोक सिंह, रामखेलावन सहित अन्य शामिल है। घटना के बाद से ही यह मजदूर लापता हैं। इनके मलबे में दबे होने की बात कही जाती रही। सूचना पर इनके परिवार वाले भी मौके पर पहुंचे थे। रो-रोकर बुरा हाल था। इंद्रजीत के भाई का कहना था कि हादसे के वक्त वह घटनास्थल पर ही था। करीब 18 लोग काम कर रहे थे। मलबे में उसके दोनों भाइयों समेत 15 लोग दबे हैं। मलबे में एक शव नजर आ रहा था, लेकिन चेहरा बुरी तरह खराब होने से यह पहचान नहीं हो पा रही थी कि शव किसका है।

डीएम ने दिए मजिस्टि्रयल जांच के आदेश: बिल्ली मारकुंडी के कृष्णा खदान में हुए हादसे की डीएम ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। डीएम बद्रीनाथ सिंह ने बताया कि एडीएम वित्त वागीश शुक्ला को मजिस्ट्रेट नामित किया गया है। घटना के सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। इसके आधार पर जो भी दोषी होगा, कठोर कार्रवाई होगी।

देर रात पहुंची एसडीआरएफ, सर्च लाइट लगाकर शुरू किया बचाव कार्य : मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकालने और राहत कार्य के लिए रात करीब पौने आठ बजे राज्य आपदा राहत बल (एसडीआरएफ) की टीम घटनास्थल पर पहुंची। सर्च लाइट लगाकर राहत कार्य शुरू किया गया। देर रात जिले के आला अफसर, जनप्रतिनिधि मौके पर जुटे हुए थे। हालांकि रात साढ़े आठ बजे तक किसी को बाहर नहीं निकाला जा सका था।
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घायल मजदूर को लेकर जाते हुए। - फोटो : अमर उजाला
सीएम के आगमन पर थे बंदी के आदेश किसकी शह पर चल रहा था काम
ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में घटनास्थल से महज सात किमी दूर सीएम का कार्यक्रम और जिले के बड़े अफसरों के मौजूद होने के बावजूद खदान में कार्य होने व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। 

समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव गोंड ने भी इसको लेकर नाराजगी जताई है। कहा कि यह बड़ी लापरवाही का मामला है। घटना की गहनता से जांच कराई जाएगी। इसके लिए जो भी अफसर या व्यक्ति दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। घटनास्थल पर पहुंचे मंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह घटना बहुत ही दुखद है। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती का कार्यक्रम और उसमें सीएम की मौजूदगी होने के बावजूद हादसे वाली खदान में किसके शह और लापरवाही से कार्य कराया जा रहा था इसकी जांच कराई जाएगी। 
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माैके पर मोजूद अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
कहा कि सरकार की संवेदना हादसे की चपेट में आए मजदूरों के परिवार वालों के साथ है। परिवार वालों को ज्यादा से ज्यादा मदद मुहैया कराई जाएगी। बंदी की पूर्व सूचना के बाद कराए जा रहे कार्य पर सवाल उठाते हुए मंत्री ने कहा कि डीएम और क्रशर एसोसिएशन की तरफ से सभी खदान संचालकों को यह सूचना दी गई थी कि 15 नवंबर को खनन से जुड़े सारे कार्य ठप रहेंगे। 

इस क्रम में तीन दिन से सारा काम ठप था। बावजूद किन हालातों में कार्य कराया जा रहा था और किन वजहों से इतना बड़ा हादसा हो गया? यह जांच का विषय है। फिलहाल 12 मजदूरों के मलबे में दबे होने की बात बताई जा रही है। मलबा हटने के बाद पूरी सच्चाई सामने आएगी। कहा कि इस मामले में कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा। उन्हें शाम पांच बजे इस हादसे की सूचना मिली। उस वक्त वह कार्यक्रम में आए लोगों को उनके घर सुरक्षित भिजवाने में लगे हुए थे। कहा कि अगर इस मामले में खान अधिकारी दोषी हैं तो उन पर भी कार्रवाई होगी। जिस खदान में हादसा हुआ उसमें खदान की गहराई को देखते हुए खनन कार्य पर रोक लगाई थी या नहीं इसकी भी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

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हादसे के बाद माैके पर बैठी महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
20 लाख मुआवजे की मांग
अपना दल एस विधिक मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक कुमार चौबे की तरफ से घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा गया कि मानक से दो से तीन गुना अधिक गहराई में खनन कार्य कराया जा रहा है। वहीं कांग्रेस नेता आशुतोष कुमार दुबे (आशु) ने जारी बयान में कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से चंद किमी की दूरी पर इतना बड़ा हादसा कैसे हुआ, इसका जिम्मेदार कौन है, इसकी जांच कराई जाए। हादसे का शिकार हुए मजदूरों के आश्रितों को कम से कम 20 लाख का मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। 
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युवकों के लापता होने के हाद बिलखते परिजन। - फोटो : अमर उजाला
खदानों के लिए तय हैं यह मानक
पत्थर खनन के लिए सुरक्षा मानक तय हैं। इसमें खनन क्षेत्रों को बस्ती से सुरक्षित दूरी पर रखना, रात में खनन न करना, मजदूरों के लिए हेलमेट-बेल्ट जैसे सुरक्षा उपकरण अनिवार्य करना है। इसके अलावा पारेषण लाइन के टाॅवर से 50 मीटर के दायरे में खनन नहीं होना चाहिए। रात में खनन नहीं हो सकता। खनन सीधी गहराई की बजाय समानांतर गहराई में बेंच बनाकर होना चाहिए। एक साथ दो वाहनों के आने-जाने का संपर्क मार्ग हो। धूल से बचाव के लिए खदान में पानी का छिड़काव होते रहने चाहिए। श्रम अधिनियम के तहत मजदूरों का मानदेय हो।

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