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क्रशर प्लांट हादसा: किसी का पति छिना तो किसी का पिता... एक साथ उठीं चार अर्थियों से मची चीख-पुकार

Mon, 07 Sep 2026 12:19 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।

सार

मिर्जापुर क्रशर प्लांट हादसे में चार मजदूरों की मौत हुई थी। सभी मजदूर सोनभद्र जिले के रहने वाले थे। घटना के बाद सभी मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान चार लोगों की एक साथ अर्थी उठी तो लोगों में चीख- पुकार मच गई। 
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क्रशर प्लांट हादसे में जान गवांने वालों का अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
मिर्जापुर के अहरौरा स्थित क्रशर प्लांट पर हादसे में मृत चार मजदूरों का रविवार को गांव के पास सोन नदी के तट पर अंतिम संस्कार हुआ। तीन मजदूरों का दाह संस्कार किया गया, जबकि अशोक गोंड के शव को परंपरानुसार नदी के किनारे दफन किया गया। एक साथ चार अर्थियां उठने पर परिजनों में चीख-पुकार मच गई। इस दौरान राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड, सपा जिलाध्यक्ष रामनिहोर यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष विजय यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अनिल यादव सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
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मृतक मजदूरों की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
अहरौरा क्षेत्र के भगौती देई क्रशर प्लांट पर शनिवार को दोपहर दो बजे ब्लास्टिंग के दौरान कंपन से कमरा और डग धराशायी हो गए थे। हादसे में सोनभद्र के जुगैल थानाक्षेत्र के बड़गवां गांव निवासी लाल बहादुर बैगा (35), अशोक गोंड (38), राकेश गोंड (30) और दुर्योधन विश्वकर्मा (34) की मौत हो गई थी। मिर्जापुर में पोस्टमार्टम के बाद रविवार की भोर में मजदूरों के शव गांव बड़गवां लाए गए। शव पहुंचते ही परिजनों में चीख पुकार मच गई। पत्नी, बच्चे शव से लिपट कर बिलखने लगे। किसी प्रकार उन्हें ढांढ़स बंधाया गया। सुबह 11 बजे चारों मजदूरों की अंतिम यात्रा निकाली गई।
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क्रशर प्लांट हादसा - फोटो : अमर उजाला
गांव के पास सोन नदी तट पर पहुंचने के बाद लाल बहादुर, राकेश और दुर्योधन के शव का दाह संस्कार किया गया। पारिवारिक परंपरा के अनुसार अशोक गोंड के शव को कब्र में दफन किया गया। राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड ने पीड़ित परिवार को सरकार से हर संभव मदद दिलाने का भरोसा दिया।

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रामजीत सिंह, देवेंद्र गोंड - फोटो : अमर उजाला
कुछ देर पहले तक थे साथ, लौटा तो मलबे में दबा था शरीर
खनन क्षेत्र में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले मजदूरों को इस हादसे ने झकझोर दिया है। घटना से कुछ देर पहले तक चारों मजदूरों के साथ रहने वाले देवेंद्र सिंह गोंड उस मंजर को भूल नहीं पा रहे। हादसे की भयावहता और उससे कुछ देर पहले तक साथियों के साथ को याद कर वह फफक रहे थे। देवेंद्र ने घटना के लिए सुरक्षा प्रबंधों की अनदेखी पर भी सवाल उठाए।
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क्रशर प्लांट हादसे के बाद शवों का किया गया अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
देवेंद्र ने बताया कि गांव से 13 लोग मजदूरी के लिए अहरौरा गए थे। इस क्षेत्र की खदानों में वह पहले से काम करते आ रहे हैं। घटना के दिन वह भी दुर्योधन, अशोक, राजेश और लाल बहादुर के साथ ही थे। दोपहर में ब्लास्टिंग का समय होने के कारण चारों क्रशर प्लांट पर बने मकान में अंदर जाकर आराम करने लगे थे। वह दो नंबर प्लांट की तरफ चला गया था। 
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क्रशर प्लांट हादसा - फोटो : अमर उजाला
पहली बार ब्लास्टिंग तक सब कुछ ठीक था। इसके कुछ देर बाद दूसरी बार तेज ब्लास्टिंग हुई तो काफी दूर तक उसका असर महसूस हुआ। वह हादसे की खबर सुनकर पहुंचा तो जिस मकान में वह साथियों को छोड़ गया था, वह मलबे में तब्दील हो गया था। चारों के शव अंदर दबे थे। मौके पर भीड़ जुटी थी। वह गांव पर सूचना देने के लिए मोबाइल लेकर थोड़ी दूर पर गया। इसी बीच मुंशी, मैनेजर मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालकर ले जाने लगे।
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क्रशर प्लांट हादसा - फोटो : अमर उजाला
करीब 5-6 किमी दूर पीछाकर उन्हें रोका। इसके बाद पुलिस-प्रशासन के लोग पहुंच गए। मृत अशोक के चाचा रामजीत सिंह ने बताया कि हादसे के बाद वह लगातार क्षेत्रीय विधायक को फोन करते रहे लेकिन फोन रिसीव न होने से तत्काल कोई मदद नहीं मिल सकी। उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता देने की मांग की।

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क्रशर प्लांट हादसा - फोटो : अमर उजाला
अहरौरा में हादसे के बाद फिर चर्चा में आया मधुसूदन सिंह का नाम
मिर्जापुर के अहरौरा में क्रशर प्लांट पर हुए हादसे के बाद फिर से मधुसूदन सिंह का नाम चर्चा में है। करीब नौ माह पहले ओबरा में हुए खदान हादसे में सात मजदूरों की मौत हुई थी। उस खदान के मालिक का नाम भी मधुसूदन सिंह ही था। सत्ताधारी दल से जुड़े एक जनप्रतिनिधि के करीबी माने जाने वाले मधुसूदन सिंह की खदान में महज नौ माह के भीतर दोबारा हादसे ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। 

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सोनभद्र खदान हादसा (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
ओबरा के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र स्थित कृष्णा माइनिंग वर्क्स की खदान में ड्रिलिंग के दौरान बड़ी चट्टान धसकने से सात मजदूर मलबे में दब गए थे। चार दिन तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद मजदूरों के शव बरामद करने में सफलता मिली थी। यह घटना उस दिन हुई थी, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिले में थे। उनकी मौजूदगी के कारण सुरक्षा कारणों से पूरे क्षेत्र में खनन कार्य को बंद रखने का प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया था। इसके बावजूद निर्देशों को दरकिनार कर कराए जा रहे ड्रिलिंग कार्य ने बड़े हादसे का रूप ले लिया।
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हादसे के बाद शवों का अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
इस घटना के बाद पत्थर खदानों में नियमों की अनदेखी, हैवी ब्लास्टिंग, मजदूरों के सुरक्षा इंतजामों की कमी सामने आई थी। तब खान सुरक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी खनन क्षेत्र में मानकों का सख्ती से पालन कराने और खनिज विभाग को निगरानी के निर्देश दिए थे। सोनभद्र की खदानों में कुछ हद तक सुधारात्मक कार्य कराए गए। मनमाने हैवी ब्लास्टिंग पर अंकुश लगा है, मगर पड़ोसी जिले में इससे कोई सबक नहीं लिया गया। लोगों के लिए हैरानी की बात यह रही कि जिस मालिक की खदान में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया था, अब दोबारा उसी की खदान में हैवी ब्लास्टिंग और मनमाने खनन कार्य के आरोप लगे हैं।
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