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कैराना पर टिकीं देश की नजरें: पलायन मुद्दे से फिर जीत का सपना, क्या गठबंधन का 'भाईचारा' लाएगा रंग, समझिए इस वीआईपी सीट का महत्व

Mon, 24 Jan 2022 01:16 PM IST
कपिल kapil गौरव त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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कैराना में अमित शाह। - फोटो : amar ujala
कभी शास्त्रीय संगीत के लिए मशहूर यूपी-हरियाणा की सीमा पर बसा कैराना इन दिनों पलायन को लेकर फिर से चर्चाओं में है। पलायन के मुद्दे से ही भाजपा 2017 में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई थी। ऐसे में यह सीट राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण हो गई है। इस बार भी भाजपा इस मुद्दे को फिर से हवा दे रही है। अबकी बार भाजपा सरकार की उपलब्धियों को भी मुद्दों में शामिल किया गया है।

सपा-रालोद गठबंधन भाईचारा कायम रहे के नारे के साथ इस सीट पर काबिज रहने का सपना संजो रहा है। भाजपा ने पूर्व सांसद हुकुम सिंह की पुत्री मृगांका सिंह को फिर से चुनावी मैदान में उतारा है, जबकि सपा-रालोद गठबंधन से वर्तमान विधायक नाहिद हसन प्रत्याशी हैं। जो नामांकन के अगले ही दिन गैंगेस्टर के मामले में जेल चले गए। इसके बाद से उनकी छोटी बहन इकरा उनके चुनाव की बागडोर संभाल रही हैं। बसपा ने राजेंद्र सिंह उपाध्याय और कांग्रेस ने अखलाक को टिकट दिया है। आम आदमी पार्टी से तरसपाल चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर मुकाबला भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के बीच ही दिखाई दे रहा है।
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कैराना पहुंचे अमित शाह। - फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री के बाद गृहमंत्री ने की पलायन पीड़ितों की मुलाकात 
कैराना सीट जीतने की पटकथा भाजपा ने काफी पहले से लिखनी शुरू कर दी थी। नवंबर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पलायन के पीड़ितों से मुलाकात कर इस मुद्दे को हवा दी थी। अब चुनाव घोषित होने पर केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे को उठाया है। पार्टी प्रत्याशी के लिए उन्होंने घर-घर जाकर वोट भी मांगे। ऐसे में साफ है कि बीजेपी इस मुद्दे को फिर से भुनाकर दोबारा यूपी की सत्ता पाना चाहती है।
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कैराना में अमित शाह। - फोटो : amar ujala
मतदाताओं के मन की बात 
चौक बाजार निवासी अमन गुप्ता बताते हैं कि भाजपा सरकार के बाद से कानून व्यवस्था सुधरी है। अपराध में कमी आई है। साथ ही विकास कार्य भी हुए हैं। भाजपा सरकार ने कैराना के विकास पर काफी ध्यान दिया है। पहले यहां कारोबार करना भी मुश्किल था। अब व्यापारी बेखौफ अपना कारोबार करते हैं। जामा मस्जिद निवासी राशिद का कहना है कि यहां हिंदू-मुस्लिम हमेशा से मिल-जुलकर रहते आ रहे हैं, हां पहले के मुकाबले आपराधिक घटनाएं कम होती हैं। पलायन के मुद्दे को जानबूझ हवा दी गई। बड़ी संख्या में यहां के लोग कारोबार के सिलसिले में बाहर रहते हैं। इसे पलायन नहीं कहा जा सकता। कांधला तिराहा पर मिले शमीम बताते हैं कि चुनाव में पिछली बार की तरह धर्म और जाति के आधार पर ही वोटिंग होगी। अन्य मुद्दे यहां गौण हो जाएंगे।

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अमित शाह। - फोटो : amar ujala
दो घरानों के बीच सियासी अदावत  
कैराना सीट लंबे अरसे से पूर्व सांसद बाबू हुकुम सिंह और हसन परिवार की सियासी अदावत चली आ रही है। जिसमें कभी एक परिवार तो कभी दूसरा भारी पड़ता रहा है। 2014 के उप चुनाव और 2017 के आम चुनाव में हसन परिवार ने जीत दर्ज की है। नाहिद हसन यहां से विधायक बने हैं।
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अमित शाह। - फोटो : amar ujala
2017 का चुनाव का परिणाम
नाहिद हसन        सपा    98830
मृगांका सिंह       भाजपा  77668
अनिल चौहान     रालोद  19992
दिवाकर देशवाल  बसपा   6888
कुल मतदाता   317178
पुरुष           170538
महिला         146640
अन्य          13
जातिगत मतदाता :  मुस्लिम 1.37 लाख, गुर्जर 27550, कश्यप 40423, सैनी 12190, अनुसूचित जाति 9808, ठाकुर 4930, जाट 24650, ब्राह्मण 8862, वैश्य 6154 नाई/बढ़ई 10400, कोरी 8364, बावरिया 6250, अन्य 22 हजार।
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