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Sambhal Shiv Mandir: कुएं और शिवलिंग की होगी कार्बन डेटिंग, संभल DM ने एएसआई को लिखा पत्र; जानें क्या है विधि?

Sun, 15 Dec 2024 07:24 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संभल

सार

मंदिर परिसर की सफाई और बिजली की व्यवस्था पूरी कर ली गई है। नगर हिंदू सभा के संरक्षक विष्णु शरण रस्तोगी के अनुसार, यह मंदिर 1978 के बाद पहली बार खोला गया है।
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संभल शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
संभल जिला प्रशासन ने रविवार को शंकर मंदिर और वहां स्थित कुएं की कार्बन डेटिंग के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को पत्र लिखा है। शहर में सांप्रदायिक दंगों के बाद 1978 से बंद पड़े इस मंदिर को फिर से खोला गया है। उन्होंने बताया कि मंदिर में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया है और मंदिर पर 24 घंटे सुरक्षा रखी जा रही है।
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संभल मंदिर में पूजा करते लोग - फोटो : संवाद
मंदिर में सुरक्षा गार्ड तैनात
जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने कहा कि यह कार्तिक महादेव का मंदिर है। यहां एक कुआं मिला है। यह अमृत कूप है। यहां स्थायी रूप से सुरक्षा गार्ड तैनात कर दिए गए हैं और सीसीटीवी कैमरे भी लगा दिए गए हैं। मंदिर में पूजा भी शुरू हो गई है। यहां अतिक्रमण है, जिसे हटाया जा रहा है।
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संभल में खोले गए मंदिर में पूजा - फोटो : संवाद
मंदिर जाने वाले मार्ग को सीसीटीवी से किया गया कवर
पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार ने बताया कि मंदिर की ओर जाने वाली सभी सड़कों को सीसीटीवी कैमरों से कवर कर दिया गया है और वहां एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया जा रहा है। एसपी ने कहा, मंदिर में 24 घंटे सुरक्षा रहेगी और स्थायी पुलिस तैनाती सुनिश्चित की जा रही है। प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) के जवानों को घटनास्थल पर तैनात किया गया है।

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संभल मंदिर के बाहर पुलिस प्रशासन - फोटो : संवाद
मंदिर के पुनर्निर्माण की तैयारी
मंदिर परिसर की सफाई और बिजली की व्यवस्था पूरी कर ली गई है। नगर हिंदू सभा के संरक्षक विष्णु शरण रस्तोगी के अनुसार, यह मंदिर 1978 के बाद पहली बार खोला गया है। उपजिलाधिकारी वंदना मिश्रा ने बताया कि मंदिर की मूल संरचना को बहाल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर की सफाई कर दी गई है और बिजली व्यवस्था की जा चुकी है। यह कदम अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत उठाया गया, जो केवल सार्वजनिक संपत्ति पर बने अवैध ढांचों के खिलाफ था। 
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संभल मंदिर - फोटो : संवाद
मंदिर की दशकों पुरानी कहानी
नगर हिंदू सभा के संरक्षक विष्णु शरण रस्तोगी ने बताया कि 1978 के बाद यह मंदिर बंद हो गया था। उन्होंने कहा, हम खग्गू सराय इलाके में रहते थे, जहां यह मंदिर स्थित है। 1978 के बाद हमने अपना घर बेच दिया और इलाका खाली कर दिया। इसके बाद कोई पुजारी यहां रहने को तैयार नहीं हुआ। 15-20 परिवार वहां से चले गए और मंदिर बंद हो गया। अब दशकों बाद इसे फिर से खोला गया है।
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संभल में खोले गए मंदिर में पूजा - फोटो : संवाद
समुदाय को सौंपा जाएगा मंदिर
जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने कहा कि यह मंदिर संबंधित समुदाय को सौंप दिया जाएगा और अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मंदिर के दोबारा खुलने और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में खुशी की लहर है। यह मंदिर अब नियमित पूजा और दर्शन के लिए तैयार किया जा रहा है।
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संभल मंदिर में कुएं की खुदाई - फोटो : संवाद
क्या होती है कार्बन डेटिंग?
कार्बन डेटिंग उस विधि का नाम है जिसका इस्तेमाल कर के किसी भी वस्तु की उम्र का पता लगाया जा सकता है। इस विधि के माध्यम से लकड़ी, बीजाणु, चमड़ी, बाल, कंकाल आदि की आयु पता की जा सकती है। यानी की ऐसी हर वो चीज जिसमें कार्बनिक अवशेष होते हैं, उनकी करीब-करीब आयु इस विधि के माध्यम से पता की जा सकती है। इसी कारण वादी पक्ष की चार महिलाओं ने ज्ञानवापी परिसर में सर्वे में मिले कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग या किसी अन्य आधुनिक विधि से जांच की मांग की है।
 

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संभल के मोहल्ला खग्गूसराय में मिले मंदिर में साफ-सफाई करते एएसपी व सीओ। - फोटो : संवाद
क्या होती है कार्बन डेटिंग की विधि?
दरअसल हमारी पृथ्वी के वायुमंडल में कार्बन के तीन आइसोटोप पाए जाते हैं। ये कार्बन- 12, कार्बन- 13 और कार्बन- 14 के रूप में जाने जाते हैं। कार्बन डेटिंग की विधि में कार्बन 12 और कार्बन 14 के बीच का अनुपात निकाला जाता है। जब किसी जीव की मृत्यु होती है तब ये वातावरण से कार्बन का आदान प्रदान बंद कर देते हैं। इस कारण उनके कार्बन- 12 से कार्बन- 14 के अनुपात में अंतर आने लगता है।यानी कि कार्बन- 14 का क्षरण होने लगता है। इसी अंतर का अंदाजा लगाकर किसी भी अवशेष की आयु का अनुमान लगाया जाता है।

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संभल के खग्गूसराय में मिला ताला बंद मंदिर - फोटो : संवाद
क्या पत्थर पर भी कारगर है कार्बन डेटिंग?
आम तौर पर कार्बन डेटिंग की मदद से केवल 50 हजार साल पुराने अवशेष का ही पता लगाया जा सकता है। पत्थर और चट्टानों की आयु इससे ज्यादा भी हो सकती है। हालांकि, कई अप्रत्यक्ष विधियां भी हैं जिनसे पत्थर और चट्टानों की आयु का पता लगाया जा सकता है। कार्बन डेटिंग के लिए चट्टान पर मुख्यत: कार्बन- 14 का होना जरूरी है। अगर ये चट्टान पर न भी मिले तो इस पर मौजूद रेडियोएक्टिव आइसोटोप के आधार पर इसकी आयु का पता लगाया जा सकता है। 
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संभल के मोहल्ला खग्गूसराय में मिले कुआं की खोदाई के दौरान मिट्टी निकालते एएसपी श्रीश्चंद्र - फोटो : संवाद
1949 में हुई थी कार्बन डेटिंग की खोज
कार्बन डेटिंग के विधि की खोज 1949 में हुई थी। अमेरिका के शिकागो यूनिवर्सिटी के विलियर्ड फ्रैंक लिबी और उनके साथियों ने इसका अविष्कार किया था। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें 1960 में रसायन का नोबल पुरस्कार दिया गया था। कार्बन डेटिंग की मदद से पहली बार लकड़ी की उम्र पता की गई थी। 
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