उस समय हाजी आबिद हुसैन, मौलाना कासिम नानौतवी, मौलाना फजलुर्रहमान उस्मानी देवबंदी, मौलाना जुल्फिकार अली देवबंदी, मौलाना याकूब नानौतवी व मौलाना शाह रफीउद्दीन देवबंदी ने यह फैसला लिया कि एक ऐसा मदरसा कायम किया जाए जिसका जिम्मेदार न तो कोई सरकारी विभाग हो और न ही कोई व्यक्ति विशेष। उसकी पूर्ण जिम्मेदारी कौम की होगी।