सपा के कद्दावर नेता आजम खां की तरह जौहर यूनिवर्सिटी भी किसी न किसी रूप में शुरुआत से चर्चाओं में रही है। सपा शासन में सबसे ताकतवर कबीना मंत्री रहते आजम खां ने जब यूनिवर्सिटी की बुनियाद डाली तब हुए समारोह में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव समेत यूपी के 30 से ज्यादा मंत्रियों की रामपुर में मौजूदगी बड़ी चर्चा बनी थी तो यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक दर्जा मिलने का सफर भी कई बार सुर्खियों में रहा।
इस विधेयक को न तत्कालीन राज्यपाल टीवी राजेश्वर के कार्यकाल में मंजूरी मिली और न ही उनके बाद महामहिम का आसन संभालने वाले बीएल जोशी के समय में। सात साल इंतजार के बाद इस विधेयक को मंजूरी मिली साल 2014 में, जब उत्तराखंड के राज्यपाल अजीज कुरैशी के पास यूपी के गवर्नर का अतिरिक्त प्रभार था।