फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pratapgarh : बीएसपी सरकार ने राजा भैया पर लगाया था पोटा, संघर्ष के लिए कूद पड़े थे मुलायम

Mon, 10 Oct 2022 10:11 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़

सार

दो नवंबर 2002 में राजा भैया व उनके पिता समेत अन्य लोगों के खिलाफ पोटा की कार्रवाई की गई थी। जिसके विरोध में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने आंदोलन शुरू किया था। नेताजी पूर्व मंत्री राजाराम पांडेय को साथ लेकर जीआईसी में आयोजित जनसभा को संबोधित करने भी आए थे।
विज्ञापन
1 of 7
Pratapgarh News : मीराभवन स्थित सपा कार्यालय का उद्घाटन करते मुलायम सिंह यादव। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
बसपा शासन में राजा भैया उनके पिता के खिलाफ पोटा की कार्रवाई की गई थी। जिसका धरती पुत्र कहे जाने वाले मुलायम सिंह यादव ने मुखर विरोध किया था। राजा भैया के साथ बसपा सरकार की ज्यादती के विरोध में संघर्ष करने खुद सड़क पर उतरे। 40 दिनों तक सपाइयों के प्रदर्शन किया था। राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के चलते बसपा शासन ने कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया को विधायकों को धमकाने के मामले में जेल में डाल दिया गया था।


दो नवंबर 2002 में राजा भैया व उनके पिता समेत अन्य लोगों के खिलाफ पोटा की कार्रवाई की गई थी। जिसके विरोध में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने आंदोलन शुरू किया था। नेताजी पूर्व मंत्री राजाराम पांडेय को साथ लेकर जीआईसी में आयोजित जनसभा को संबोधित करने भी आए थे। जिले में लगातार राजा भैया के समर्थन में आंदोलन चलता रहा। हालांकि भाजपा ने बसपा को दिया समर्थन वापस ले लिया। जिसके बाद प्रदेश में मुलायम सिंह की सरकार बनी।


तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद आधे घंटे के भीतर ही राजा भैया पर से पोटा के तहत सभी मुकदमे खारिज करने का आदेश दिया था। यही नहीं मुलायम सरकार में राजा भैया को खाद्य मंत्री भी बनाया गया था। सपाई बताते हैं कि अखिलेश से सियासी खींचतान के बावजूद राजा भैया नेताजी को जन्मदिन की बधाई देने उनके आवास पर गए थे।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 7
Pratapgarh News : सहोदरपुर में रामसुफल पांडेय की बेटी की शादी में पहुंचे मुलायम सिंह यादव। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
कैसे न आता शादी में, गुरुजी को नाराज थोड़ी करना था
अमेठी तहसील के अम्मरपुर निवासी राम सुफल पांडेय को अपना अध्यात्मिक गुरु मानते थे। ज्योतिष में उनकी अच्छी पकड़ को देखते हुए मुलायम सिंह भी उनके शिष्य बन गए। पंडित रामसुफल पांडेय इटावा में बीडीओ की नौकरी के दौरान मुलायम सिंह को राजनीति में उच्च पद की प्राप्ति की बात कही थी। राम सुफल पांडेय के घर नेताजी का आना जाना लगा रहता था। वर्ष 11 मई 1995 में मुलायम  के अध्यात्मिक गुरु पंडित राम सुफल पांडेय अपने बेटे की शादी रेलकर्मी वीरेंद्र नाथ त्रिपाठी की बेटी मधु से तय की थी। चूंकि वीरेंद्र नौकरी करने के साथ ही रेलवे कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहते थे।


उन्होंने मुलायम को निमंत्रण दिया था। अचानक उनके आने का कार्यक्रम बना। रेलवे मैदान पर उनका उड़नखटोला उतरा। जहां सपा नेताओं ने उनका स्वागत किया था। इसके बाद मुलायम ने रेलवे कॉलोनी पहुंचकर वर वधू को आशीर्वाद दिया था। इस बीच करीबियों ने उनसे पूछा, आपके आने की उम्मीद बहुत कम थी। तब नेताजी ने जवाब दिया था कि कैसे न आता, शादी में गुरुजी को नाराज कैसे करता।
विज्ञापन

3 of 7
Pratapgarh News : 1993 के विधानसभा चुनाव में बेल्हा पहुंचे थे मुलायम सिंह यादव। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
हाजी साहब लाल बहादुर को टिकट दे रहा हूं, चुनाव जिताना आपकी जिम्मेदारी
प्रतापगढ़। वर्ष 1993 के विधानसभा चुनाव के पहले रथ यात्रा लेकर निकले सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव 25 जून को अपने करीबी बलराम सिंह यादव, मुजफ्फर अली के साथ जिलाध्यक्ष हाजी अब्दुल रज्जाक के घर पहुंचे। यहीं से जिले में विधानसभा चुनाव का आगाज किया। अचानक मुलायम सिंह यादव सबके सामने बोल पड़े कि लाल बहादुर सिंह को सदर से टिकट दे रहा हूं। चुनाव जितवाना आपकी जिम्मेदारी है। इसके बाद वह लखनऊ चले गए। पूर्व अध्यक्ष हाजी रज्जाक साहब के बेटे पूर्व प्रधान जफरुल हसन कहते हैं कि नेताजी हमेशा उनके परिवार को सम्मान देते थे। उनकी कमी हम सभी को खलेगी। 


1989 में क्रांति रथ लेकर पहुंचे थे बेल्हा
वर्ष 1989 में धरतीपुत्र मुलायम सिंह ने अपने साथी राजेंद्र सिंह के साथ क्रांति रथ यात्रा निकाली थी, जो बेल्हा भी पहुंची थी। यहां पुराने व नए समाजवादी विचारधारा के लोगों को एक करने के लिए कुंडा से विधायक रहे जयराम यादव व पूर्व मंत्री रामकिंकर सरोज को जिम्मेदारी दी गई थी। मुलायम ने सभी को क्रांति रथ यात्रा के बारे में अवगत कराते हुए संघर्षों के लिए तैयार रहने को कहा था। उनकी क्रांति रथ यात्रा ने जनपद में नई क्रांति का कारण बन गई थी। देखते ही देखते मुलायम गरीबों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों के मसीहा बन गए। 

4 of 7
Pratapgarh News : कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी के साथ मुलायम सिंह यादव। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
2012 में मिली थी चार सीटें, 2014 में आए थे प्रचार करने
अपनों के बीच नेताजी के नाम से जाने जाने वाले मुलायम सिंह यादव की खासियत थी कि वह बड़े से लेकर छोटे व्यक्ति के दिलों में आसानी से जगह बना लेते थे। तभी तो सपा की बागडोर किसान के बेटे सियाराम यादव व भैयाराम पटेल को सौंपी थी। वह वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में प्रचार करने बेल्हा आए थे। सदर, पट्टी, रानीगंज और विश्वनाथगंज विधानसभा में जनसभाएं की थीं। उस चुनाव में जिले की सात में से चार सीट सपा प्रत्याशियों ने जीती थीं। कुंडा और बाबागंज सीट पर सपा ने समर्थन दिया था। वह आखिरी बार वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित करने आए थे। इसके बाद वह नहीं आ सके। पूर्व विधायक रामलखन यादव के निधन पर परिजनों को फोन कर दुख जताया था।
विज्ञापन

5 of 7
Pratapgarh News : पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव राजाभैया के साथ। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
बेटी शादी में नहीं आए पाए थे, नाराज तो नहीं हो, रसगुल्ला भी खाया था
शहर के मीराभवन स्थित सपा कार्यालय का छह जून 2006 को उद्घाटन करने व दूसरे सरकारी कार्यों को पूरा करने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव राजा भैया के साथ उनके प्रताप सदन आवास पहुंचे। कुछ देर वहां रुकने के बाद वह सीधे जिलाध्यक्ष सियाराम यादव के घर पहुंचे। वहां पहुंचते ही उनकी बड़ी बेटी को बुलाया, जिसकी शादी हो चुकी थी। उसमें मुलायम सिंह यादव शामिल नहीं हो सके थे। उन्होंने बेटी के हाथ में शगुन पकड़ाते हुए कहा था कि बेटी नाराज तो नहीं हो। आशीर्वाद देते हुए बोले कि जब जरूरत हो बताना। इस दौरान सामने रखा रसगुल्ला खाया। दूसरा रसगुल्ला मांगने पर राजा भैया ने टोका तो बोले खाने दो भाई, कुछ नहीं होगा।
विज्ञापन

घाटे में चल रही एटीएल को मुलायम ने दिया था रमेश सिपानी के हाथ
जिले के कटरामेदनीगंज में ट्रैक्टर फैक्ट्री एटीएल की स्थापना होने के बाद 1350 लोगों को रोजगार मिला था। 20 नवंबर 1990 को घाटे में चलने के कारण फैक्ट्री बंद हो गई थी। इसके बाद 21 फरवरी 1991 को तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार ने इसे निजी हाथों में दे दिया था। बैंगलूरू के उद्योगपति रमेश सिपानी ने कंपनी का संचालन शुरू किया। इसके बाद ट्रैक्टर का निर्माण बंद हो गया, मगर डीजल इंजन का निर्माण कर दूसरे प्रांतों को भेजा जाने लगा। कर्ज के बोझ  तले दबी फैक्ट्री 15 मई 1998 को पूरी तरह बंद हो गई। इससे कर्मचारी बेरोजगार हो गए। कुछ कर्मचारियों को सरकार ने अन्य विभागों में समायोजित किया। वर्ष 1999 में कर्मचारियों और कर्ज देने वालों ने बकाए के भुगतान के लिए मामला कोर्ट में चला गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रमोद तिवारी को दिया था आदर्श विधायक खिताब
सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव व कांग्रेसी दिग्गज प्रमोद तिवारी के रिश्तों की मिठास सदैव सियासी जगत में भी जगजाहिर रही है। 23 मार्च 2005 को विधानसभा में मुख्यमंत्री रहते मुलायम सिंह यादव ने यूपी में पहले आदर्श विधायक का खिताब प्रमोद तिवारी को सौंपा था। प्रमोद तिवारी से नेताजी के रिश्ते को अखिलेश भी निभाते चले आ रहे हैं। मुलायम सिंह के कहने पर ही इस बार प्रमोद की बेटी आराधना मिश्रा मोना के खिलाफ सपा ने उम्मीदवार नहीं उतारा।


बेल्हा से धरतीपुर का रहा है गहरा नाता

बेल्हा से सपा संरक्षक, पूर्व रक्षामंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का गहरा नाता रहा है। वह अपनों पर आंख बंद कर भरोस जताते थे। कमियों पर नाराजगी जताते तो दुलारते भी थे। जितना अमीर को सम्मान देते थे। उतना गरीबों के साथ भी हमदर्दी दिखाते थे। नेताजी के साथ 18 साल तक सत्ता व विपक्ष की राजनीति करने वाले राजा भैया भी उनके संघर्षों के कायल हैं। पूर्व जिलाध्यक्ष भैयाराम पटेल के अनुसार नेताजी कभी अमीर गरीब में फर्क नहीं समझा। यदि अदना सा कार्यकर्ता उन्हें आवाज दिया तो उसकी समस्या सुनकर निस्तारण जरूर कराते थे। 


पूर्व जिलाध्यक्ष सियाराम यादव कहते हैं कि जिलाध्यक्ष पद के लिए पूर्व सांसद सीएन सिंह व उनके बीच खींचतान चल रही थी। वह अपने करीबी हाजी मुन्ना को जिलाध्यक्ष बनाना चाहते थे। तमाम कोशिशों व अमर सिंह और सुब्रत राय के दखल के बाद भी नेताजी ने उनका सम्मान कम नहीं होने दिया। वह टिकट मांगने गए थे। जहां एक पूर्व विधायक ने विरोध किया। जिसे नेताजी ने कड़ी फटकार लगाई थी। सदर विधानसभा के कंधई थाना क्षेत्र के रहने वाले स्व. राजाराम यादव के लिए भी नेताजी के दरवाजे हमेशा के लिए खुले रहते थे। जिले में आगमन वह पुराने नेताओं व उनके परिवार वालों से जरूर मिलते। उनका सुख दुख पूछने के बाद जरूरत समझने पर लखनऊ बुला लेते।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें