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PHOTOS: सिर पर मुस्लिम टोपी और कंधे पर कांवड़, देखकर हर कोई हैरान, हमले को लेकर सुर्खियों में रहे थे बाबू खान

Sun, 24 Jul 2022 12:57 AM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
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बाबू खान। - फोटो : amar ujala
बागपत के गांव रंछाड़ निवासी बाबू खान मुजफ्फरनगर के पुरकाजी पहुंच चुके हैं। इससे पहले बाबू खान ने गंगा मैया में स्नान करने के बाद पूजा-अर्चना की और कांवड़ में गंगा जल रखकर बागपत के पुरा महादेव मंदिर के लिए रवाना हो गए। वहीं बाबू खान के सिर पर मुस्लिम टोपी और कंधे पर कांवड़ देखकर लोग हैरान रह गए। 

बाबू खान पर हुआ था हमला
2019 में बाबू खान पर जानलेवा हमला हुआ था। पुलिस ने इस मामले में चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। बताया गया कि बाबू खान द्वारा कावड़ लाने का उसके परिवार के लोग विरोध करते थे। वहीं 29 सितंबर 2019 को वह घर में भगवान शिव की पूजा कर रहा था। इसी दौरान परिवार के चार लोगों ने उस पर लाठी-डंडों व धारदार हथियारों से हमला कर दिया था। घायल होने पर बाबू खान को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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बाबू खान - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद बाबू खान ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए डीएम और एसपी से शिकायत की थी। इस मामले में कल्लू, उसके बेटे आसिफ और राशिद के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।
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कांवड़ लेकर निकले बाबू खान - फोटो : अमर उजाला
बाबू खान ने बताया कि इस्लाम हमें सभी धर्मों का सम्मान करने की सीख देता है। बताया कि सुबह पांच बजे गांव की मस्जिद में नमाज पढ़ते हैं और फिर शिव मंदिर पर जाकर साफ-सफाई करते हैं। बाबू खान का कहना है, मैंने इस्लाम धर्म नहीं छोड़ा है, सिर्फ कांवड़ लाने में आस्था है। इसलिए हर साल कांवड़ लेने के लिए हरिद्वार आता हूं। 

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बाबू खान - फोटो : अमर उजाला
बाबू खान ने बताया कि जब वह पहली बार कांवड़ लेने के लिए आये थे तो घर में खूब झगड़ा हुआ। परिवार को जैसे-तैसे समझाया। 2018 में पुरा महादेव मंदिर पर जलाभिषेक करने के बाद अगले दिन मस्जिद में सुबह पांच बजे वाली नमाज पढ़ने के लिए गया। वहां पर लोगों ने बहिष्कार कर दिया। मस्जिद से बाहर निकाल दिया। इसके लिए मैंने कानूनी लड़ाई लड़ी और मस्जिद से मुझे बाहर निकालने वाले कई लोग जेल भी गए थे।
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बाबू खान। - फोटो : amar ujala
बाबू खान बताते हैं कि वह आजादपुर मंडी दिल्ली में ट्रक चलाते थे। 2018 में कांवड़ यात्रा चल रही थी जब वह कैराना पुलिस चौकी के नजदीक पहुंचा तो वहां पर जाम लगा हुआ था। हजारों कांवड़िए आगे चल रहे थे। वहीं पर मेरे मन में ख्याल आया कि अगर मैं भी कांवड़िया होता तो इसी तरह कांवड़ लेकर आ रहा होता।
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