Devansh Gupta UPSC CSE Topper 2025: मुरादाबाद मंडल के सितारे सिविल सेवा में चमके हैं। आठ होनहारों ने सफलता पाई है। सिविल सेवा में चयनित होने वालों में छह युवक मुरादाबाद के हैं, एक अमरोहा की बेटी और चंदौसी के युवक ने भी सफलता का परचम लहराया है।
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यूपीएससी की परीक्षा में चमके मुरादाबाद मंडल के होनहार
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मुरादाबाद में सिविल सेवा-2025 के घोषित परिणाम में मंडल के सितारों ने अपनी चमक बिखेरी है। सिविल सेवा में आठ होनहारों ने सफलता का परचम लहराया है। इसमें मुरादाबाद के छह युवक शामिल हैं। अमरोहा की बेटी और चंदौसी के युवक ने भी सफलता की उड़ान भरी है।
सफलता हासिल करने वाले होनहारों का कहना कि युवाओं को अपने लक्ष्य को चुनना चाहिए। उसी को ध्यान में रखकर पूरी एकाग्रता से तैयारी करनी चाहिए। परिणाम आने पर यदि असफल हो जाते हैं, तो डरने या घबराने के बजाय पूरी हिम्मत से आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि असफलता हमें अपने आकलन का एक और मौका देती है।
हमें याद रखना चाहिए कि तैयारी में लगाया गया समय कभी खराब नहीं होता। यह हमें अपनी मंजिल तक पहुंचाने की एक प्रक्रिया है जो हमें इतना काबिल बना देती है कि हर परिस्थिति में हम मजबूती से खड़े हो पाते हैं। मुरादाबाद के देवांश गुप्ता को 77वीं, सृजित कुमार को 84वीं रैंक, ऋषभ शर्मा को 116वीं, गरिमा सिंह को 240वीं, अंकित कुमार सिंह को 842वीं, पीयूष मौर्य को 889वीं रैंक मिली है। वहीं अमरोहा की सुरभि यादव ने 14वीं और चंदाैसी के देव डुडेजा ने 152वीं रैंक हासिल की है।
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सुरभि शर्मा ने अमरोहा का नाम किया रोशन
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यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर की बेटी बनी आईएएस, हासिल की 14वीं रैंक
अमरोहा में सिविल सेवा परीक्षा (यूपीएससी) में अमरोहा की बेटी सुरभि यादव ने शानदार सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने देशभर में 14वीं रैंक प्राप्त की है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है। इंस्पेक्टर पिता राकेश कुमार यादव और मां अखिलेश देवी की आंखें खुशी से नम हो गईं, जबकि गांव और रिश्तेदारों में मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया गया।
मूलरूप से नौगावां सादात क्षेत्र के गांव नसीर नगला निवासी राकेश कुमार यादव उत्तर प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं और वर्तमान में ईओडब्ल्यू वाराणसी में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने कॅरिअर की शुरुआत यूपी पुलिस में कांस्टेबल के पद से की थी। वर्ष 2007 में वह दरोगा बने और वर्ष 2021 में पदोन्नत होकर इंस्पेक्टर बने। परिवार में पत्नी अखिलेश देवी, बेटी सुरभि यादव और बेटा राजशेखर यादव हैं।
परिवार में शिक्षा का माहौल हमेशा से रहा, जिसने बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। राकेश यादव की पोस्टिंग के दौरान परिवार बरेली में रहने लगा था। सुरभि यादव ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बरेली से ही पूरी की। उन्होंने दसवीं की परीक्षा एसआर इंटरनेशनल स्कूल बरेली से और 12वीं की परीक्षा आर्मी पब्लिक स्कूल बरेली से उत्तीर्ण की।
इंटरमीडिएट में सुरभि ने 96 प्रतिशत अंक प्राप्त कर मंडल में पहला स्थान हासिल किया था। इसके बाद सुरभि ने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से बीए ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली से इतिहास विषय में एमए की डिग्री प्राप्त की।
सुरभि का सपना शुरू से ही यूपीएससी के माध्यम से देश सेवा करना था। हालांकि, उनका सफर आसान नहीं रहा। सिविल सेवा परीक्षा 2023 के फाइनल में वह मात्र दस अंकों से चयन से चूक गई थीं। लेकिन उसी परीक्षा के अंकों के आधार पर उन्हें युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत माय भारत योजना में एडिशनल डायरेक्टर/डीवाईओ के पद पर नियुक्ति मिली। वह बीते जनवरी से इस पद पर कार्यरत हैं।
तीन प्रयासों में सफलता नहीं मिलने के बावजूद सुरभि ने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य के प्रति लगातार मेहनत जारी रखी। शुक्रवार को घोषित हुए यूपीएससी के परिणाम में उन्होंने देश में 14वीं रैंक हासिल कर अपनी मेहनत का फल पा लिया। सुरभि की इस सफलता पर उनके पिता राकेश कुमार यादव ने कहा कि बेटी ने दसवीं पास करने के बाद ही यूपीएससी करने और देश सेवा करने का संकल्प ले लिया था।
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यूपीएसीस में सफलता के बाद देवांश गुप्ता
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देवांश गुप्ता को मिली 77वीं रैंक
मुरादाबाद के दीनदयाल नगर निवासी देवांश गुप्ता ने 77वीं रैंक प्राप्त की है। उनका यह पांचवां प्रयास था और मेंस परीक्षा व साक्षात्कार दूसरी बार था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में पुणे से मैंने बीए एलएलबी किया था। वहां पर यरवदा सेंट्रल जेल में कैदियों के लिए काम करने का मौका मिला। उस वक्त मुझे महसूस हुआ कि यहां पर काम करने का दायरा सीमित है। इसकी अपेक्षा सिविल सर्विस में धरातल पर काम करने के अवसर ज्यादा हैं। इसके बाद मैंने यूपीएससी में आवेदन किया। पहली दो बार की परीक्षा मैंने पाठ्यक्रम को समझने के लिए दी थी।
देवांश ने बताया कि आसपास हो रहे घटनाक्रम के प्रति जागरूक रहने के लिए उन्होंने प्रतिदिन अखबार पढ़ा। उन्होंने प्रतिदिन पांच से छह घंटे पढ़ाई की। उन्हें वेब सीरीज देखना पसंद है। उन्हें दोस्तों के साथ लांग ड्राइव पर जाना पसंद है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां प्रोफेसर किरन साहू को दी। वह गोकुलदास हिंदू गर्ल्स कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की सादगी बहुत पसंद है। वह मेरे प्रेरणास्रोत हैं। उन्हें किताब पढ़ना और डायरी लिखना पसंद है।
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माता-पिता के साथ सृजित कुमार
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दूसरे प्रयास में सृजित को मिली 84वीं रैंक
मूलरूप से शाहजहांपुर और वर्तमान में केंद्रीय पुलिस अस्पताल परिसर निवासी सृजित कुमार ने दूसरे प्रयास में 84वीं रैंक प्राप्त की है। पिछले वर्ष उनकी 277वीं रैंक आई थी और आईआरएस सेवा मिली थी। उन्होंने बताया कि मैंने सबसे ज्यादा ध्यान उत्तर लिखने के तरीके पर दिया। जिन विषयों में कम अंक आए थे, उनका रिवीजन बढ़ा दिया था। जब तक प्रश्न हल नहीं हो जाता था, चाहे कितनी भी बार प्रयास क्यों न हो, मैं हल करने के बाद भी रुकता था।
इसकी वजह जब प्रश्नपत्र में सवाल आए तो मुझे अनुमान था कि उनको लिखना किस तरह से है। पिछली बार पहला प्रयास होने की वजह से उत्तर लिखने का अनुमान भी कम था। उन्होंने ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से घर पर रहकर ही पढ़ाई की है। उन्होंने प्रतिदिन सात से आठ घंटे पढ़ाई की। उन्हें गिटार बजाने का शौक है ।
पापा मेरे प्रेरणास्रोत
मेरे पापा सुभाषचंद्र गंगवार मुरादाबाद में एसपी यातायात के पद पर कार्यरत हैं। वह मेरे प्रेरणास्रोत हैं। उनको देखकर ही मुझे यूपीएससी की परीक्षा में बैठने की प्रेरणा मिली। जब भी मैं उनसे इस बारे में चर्चा करता था तो वह हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते हैं। मेरे पापा और मम्मी नीलिमा सिंह यही कहते हैं कि जो लक्ष्य तुमने ठाना है तो तुम अपनी मेहनत से उसे जरूर पा सकते हो। उन्होंने हमेशा परिणाम की चिंता न करने की सीख दी।
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यूपीएससी की परीक्षा पास करने के बाद देव डूडेजा के परिजन
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चाय वाले के बेटे ने फिर रच दिया इतिहास, यूपीएससी में 152वीं रैंक हासिल की
चंदौसी की पंजाबी कॉलोनी के रहने वाले चाय वाले के बेटे देव डुडेजा ने यूपीएससी 2025 की परीक्षा में 152वीं रैंक प्राप्त कर इतिहास रच दिया। देव डुडेजा ने चौथी बार में पाई। तीसरी बार की वर्ष 2022-25 की परीक्षा में उन्होंने 327वीं रैंक हासिल की थी। उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा आईआरएस में ज्वाइंट आयुक्त के लिए हुआ है और वह नागपुर में दिसंबर 2025 से पंद्रह माह की ट्रेनिंग कर रहे हैं।
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देव की सफलता पर खुशी जताते परिजन
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देव डुडेजा की इस सफलता पर परिवार और नाते-रिश्तेदारों में खुशी का माहौल है। घर पर बधाई देने वालों का आना जाना लगा हुआ है। देव डुडेजा के पिता इंद्रमोहन डुडेजा अपने दोनों बड़े भाई प्रेम डुडेजा और ब्रजमोहन डुडेजा के साथ एसएम डिग्री कॉलेज के सामने चाय की दुकान चलाते हैं। मां चंद्रप्रभा कंपोजिट विद्यालय ग्राम मई में सहायक अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं।
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यूपीएससी की परीक्षा पास करने वाले पीयूष माैर्य परिजनों के साथ
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भाई ने दिया हौसला...पहले ही प्रयास में पाई सफलता
मुरादाबाद के प्रेमनगर लाइनपार निवासी पीयूष मौर्य ने 889वीं रैंक हासिल की है। उनकी यह सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि यह उनका पहला प्रयास था। पीयूष ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र से स्नातक किया था। उन्होंने स्नातक के दूसरे साल में ही यूपीएससी की तैयारी शुरु कर दी थी।
पीयूष का कहना है कि स्नातक पढ़ाई के दौरान ही मैंने एनसीईआरटी की सभी किताबों को पढ़ लिया था। मैंने वैकल्पिक विषय भी दर्शनशास्त्र लिया था, उसे भी पहले ही पूरा कर लिया था। उन्होंने कहा कि शुरुआत में मैं प्रतिदिन आठ से नौ घंटे पढ़ाई करता था, लेकिन प्री और मेंस परीक्षा के दौरान मैंने दस से 12 घंटे पढ़ाई की। हालांकि कई बार ऐसा भी हुआ कि बीच में एक दो दिन पढ़ाई नहीं कर पाता था तो इस गैप को पूरा करने के लिए अतिरिक्त ध्यान देता था। स्नातक करने के बाद पूरी तरह से इसी में एकाग्रता से तैयारी शुरु कर दी।
पीयूष ने बताया कि पहले ही प्रयास में सफल हो जाने से बहुत संतुष्टि मिली है। हालांकि रैंक सुधारने के लिए दोबारा परीक्षा देने के बारे में सोचूंगा, लेकिन अभी इस सफलता को जश्न अपने परिवार के साथ मनाना है। उनके पिता सोमपाल सिंह तहसील में रेवेन्यू इंस्पेक्टर हैं। मम्मी उर्मिला सिंह भी हमेशा मेरा हौंसला बढ़ाती हैं।
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यूपीएससी की परीक्षा पास करने के बाद अंकित कुमार सिंह
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अंकित ने तीन बार पीसीएसएस उत्तीण की
लगातार मेहनत करो तो एक-दो बार नहीं बल्कि चौथी बार अधिकारी बन सकते हैं। यह संभव किया है बुद्धि विहार निवासी अंकित कुमार सिंह ने। यूपीएससी के परिणाम में अंकित को 842 रैंक मिली है। उनके पिता सेवानिवृत्त एसडीओ (पीडब्ल्यूडी) जयगोपाल सिंह ने बताया कि एससी वर्ग की वजह से आईपीएस कैडर मिलने की संभावनाएं हैं।
अंकित ने बताया कि पीसीएस के माध्यम से वर्ष 2019 में डिप्टी जेलर के पद पर चयन हुआ था। इसके बाद वर्ष 2020 में जिला समाज कल्याण अधिकारी के रूप में सफलता मिली। वर्ष 2021 में ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर के रूप में चयन हुआ। वर्तमान में वह जेवर के ब्लॉक डेवलपमेंट अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि 2019 में आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद लगातार तीन बार पीसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। तीन साल तक समाज कल्याण अधिकारी के रूप में किया।
अंकित ने बताया कि मेरी पत्नी जोया सिंह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया दिल्ली में मैनेजर हैं। वह भी यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं। नौकरी के साथ यूपीएससी की भी तैयारी कर रहा था। यह पांचवां प्रयास था और दूसरा साक्षात्कार था। पिछली बार वर्ष 2023 में आठ अंक से रह गए थे। इसलिए खंड विकास अधिकारी के लिए प्रतिनियुक्ति पर आया, ताकि दिल्ली के नजदीक रहकर पढ़ाई कर सकूं। नियमित रूप से चार से पांच घंटे नौकरी से समय निकालकर पढ़ाई की।
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माता-पिता के साथ ऋषभ शर्मा
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जवाब में वास्तविकता रखने की रणनीति ने दिलाई सफलता
एलआईयू की सीओ आभा शर्मा के बेटे ऋषभ शर्मा की 116वीं रैंक आई है। ऋषभ का यह उनका दूसरा प्रयास था और साक्षात्कार पहला था। उन्होंने एनआईटी इलाहाबाद से बीटेक करने के बाद सिविल सेवा की तैयारी शुरु की। ऋषभ ने बताया कि पिछली बार प्रीलिम्स में उत्तीर्ण हो पाया था और इस बार तीनों चरणों में सफलता मिल गई। ऋषभ ने बताया कि वह अखबार की बड़ी खबरों से करेंट अफेयर्स के नोट्स बनाने में मदद लेते थे।
ऋषभ ने बताया कि मूलरूप से हम बरेली के रहने वाले हैं। मेरे पिता संजीव शर्मा एलआईसी में चीफ मैनेजर हैं, जबकि मम्मी आभा शर्मा एलआईयू में हैं। मैंने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को समाज से मिलने वाले सम्मान को देखा है। कॉलेज के वरिष्ठ साथी आईएएस बन चुके हैं। मैंने दो साल कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरी की। तब अहसास हुआ कि मेरी क्षमताओं का सही उपयोग सिविल सेवा में हो सकता है, इसलिए मैंने प्रयास शुरु कर दिए।
तकनीक का सही उपयोग करना सीखें
उन्होंने कहा कि युवाओं को सोशल मीडिया पर भ्रमित करने वाला कंटेंट भी है। ऐसे में एआई का सही तरह से उपयोग करना सीखें। पढ़ाई के साथ एक्स्ट्रा कैरिकुलम एक्टिविटी पर ध्यान दें। यह पूर्ण व्यक्तित्व विकास में सहायक होती हैं। उन्होंने कहा कि असफलता मिलने पर हमें अपने करीबी लोगों के पास रहना चाहिए। अभिभावक और दोस्त आपकी क्षमताओं के बारे में आपको याद दिलाते हैं। दूसरों की नजरों में अपने प्रति आत्मविश्वास देखने से सफलता की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इन्हीं चीजों ने मेरा हौसला बढ़ाने में काफी मदद की।
मुरादाबाद में परिजनों के साथ गरिमा सिंह
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लिखने की गति में किया सुधार, मांग के अनुरूप दिया जवाब...मिली सफलता
मूलरूप से स्वार के गांव दढि़याल फत्तावाला और वर्तमान में मानसरोवर कालोनी निवासी गरिमा सिंह की 240वीं रैंक आई है। उन्होंने बताया कि यह मेरा चौथा प्रयास था। पहले दो बार प्री उत्तीर्ण नहीं हो पाया था और पिछली बार साक्षात्कार दिया था। उन्होंने कहा कि अभी तक मेरी लिखने की गति धीमी थी। इसलिए जवाब लिखते हुए कुछ बिंदु छूट जाते थे। मैंने सबसे पहले लिखने की गति में सुधार किया।
सवाल की मांग के अनुरूप जवाब लिखना सीखा। सामाजशास्त्र पर ज्यादा ध्यान दिया। निरंतरता में प्रतिदिन सात से आठ घंटे पढ़ती थी। शुरुआत में स्वाध्याय किया और बाद में कोचिंग की मदद ली। इसके बावजूद मैंने अपने नोट्स में खुद पढ़कर सुधार किया। मैं अखबार नियमित पढ़ती थी। जो भी अच्छा शब्द लगता तो उसे अपने नोट्स में जोड़ती थी ताकि जवाब लिखने में गुणवत्ता आए। जागरूक नागरिक बनने के लिए अखबार पढ़ना बहुत जरूरी है।
गरिमा ने बताया कि मम्मी मनोज सिंह गृहिणी हैं। बड़े भैया हर्ष कुमार सिंह रक्षा मंत्रालय में एएसओ के रूप में कार्य कर रहे हैं। मैंने दो वर्ष तक यूपीएससी की तैयारी भैया और भाभी सुरभि चौहान के साथ रहकर की। वह हमेशा यही कहते थे कि तुम्हारे अंदर काबिलियत है कि तुम अपने लक्ष्य को हासिल कर सकती हो। परेशान मत होने के बजाय यह बताओ कि तुम्हारी सफलता के लिए हम क्या योगदान कर सकते हैं। जब भी निराश होती थी तो भतीजे ऋषिकेश के साथ समय बिताती थी।