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CRPF आतंकी हमला: मां को है आज भी इंतजार, कहा था कल आ जाऊंगा, फैसला अच्छा पर जख्म भरेंगे कैसे

Sun, 03 Nov 2019 11:02 AM IST
शाहरुख खान मोहम्मद सलाम खां, अमर उजाला, अमरोहा
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सीआरपीएफ आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला
शून्य में निहारती शहीद आनंद की मां हीरावती देवी। जैसे कल ही की बात हो जब बेटे की तरफ से पैगाम आया था कि कल से एक माह की छुट्टी शुरू हो रही है। आ जाऊंगा पर वह कल कभी आया ही नहीं। उसी रात आंतकी हमले में आनंद ने शहादत का जाम पी लिया। मां को आज भी इंतजार है। रुंधे गले और डबडबाई आंखों से कहती हैं कि सभी दोषियों को फांसी की सजा होती तो और बेहतर होता। इससे कुछ सुकून तो मिल सकेगा पर ये रिसते जख्म कैसे भरेंगे।
 
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शहीद आनंद की मां हीरावती - फोटो : अमर उजाला
हीरावती को हर पल बेटा खोने का गम सताता है। इस बात का तो गर्व है कि बेटे ने शहादत पाई पर वह बेटे के जाने के सदमे से नहीं उबर पाई हैं। कहतीं हैं कि बेटे को किन परिस्थितियों में पाला था, यह वही जानती हैं। ड्यूटी पर देश के लिए जान देने के बावजूद सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिली। पेंशन और नौकरी आनंद की पत्नी को मिली। जो आनंद के शहीद होने एक दो महीने बाद ही मायके चली गई। फिर लौट के नहीं आई। मां को किसी तरह की कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। 
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कोर्ट परिसर में कड़ी सुरक्षा - फोटो : अमर उजाला
दरअसल नौगांवा सादात थाना क्षेत्र के गांव देहरा निवासी आनंद कुमार अपने बड़े भाई जितेंद्र सिंह के नक्शे कदम पर चलते हुए 25 अप्रैल 2001 को सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। छह साल आठ महीने की सर्विस में आनंद कुमार आसाम, जम्मू कश्मीर, मणिपुर आदि प्रदेशों में ड्यूटी की। बाद में गांव से करीब 70 किमी दूर सीआरपीएफ सेंटर रामपुर में तैनाती हो गई। एक जनवरी 2008 को आनंद के परिवार के लिए दुख की रात साबित हुई। साल 2008 के पहले दिन रात करीब ढाई बजे आतंकवादियों ने सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर रामपुर पर हमला कर दिया। स्वचालित हथियारों और ग्रेनेड से लैस आतंकवादियों ने पहले गेट नंबर एक पर तैनात संतरियों पर फायरिंग की और ग्रेनेड फेंके। गेट पर तैनात जवानों ने इस हमले का जवाब दिया। आतंकियों के इस हमले में आनंद कुमार ने शहादत को चूम लिया। अपने गांव से इतने करीब आने के बाद आनंद हमेशा-हमेशा के लिए दूर हो गए। 

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कोर्ट परिसर में कड़ी सुरक्षा - फोटो : अमर उजाला
तीस दिन की छुट्टी पर जाने वाले थे आनंद
आनंद के बड़े भाई जितेंद्र सिंह बताते हैं कि आतंकी हमले के समय मेरी और आनंद की तैनाती सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर रामपुर में ही थी। दोनों का परिवार साथ में रहता था। आनंद की तीस दिन की छुट्टी स्वीकृत हो गई थी, लेकिन नाइट ड्यूटी नहीं बदली गई थी। ऐसे में आनंद को एक जनवरी की रात कंट्रोल रूम में ड्यूटी करनी पड़ी। अगले दिन से उसकी तीस दिन की छुट्टी थी, लेकिन एक जनवरी की रात मेरे परिवार के लिए दुखों का पहाड़ टूट चुका था। 
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crpf camp in rampur - फोटो : अमर उजाला
शहीद आनंद कुमार की प्रोफाइल
जीडी, सीआरपीएफ 31 बटालियन
गांव देहरा, थाना नौगांवा सादात
जन्म एक अगस्त 1979
सीआरपीएफ में भर्ती 25 अप्रैल 2001
शहीद हुए एक जनवरी 2008  
सर्विस अवधि छह साल, आठ महीने
 
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सीआरपीएफ आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला
भर्ती के चार साल बाद हुई थी शादी 
शहीद आनंद कुमार वैवाहिक का जीवन का सुख ज्यादा दिन नहीं ले पाए। सीआरपीएफ में भर्ती होने के चार साल बाद उनकी शादी देहात थानाक्षेत्र के गांव नन्हेड़ा निवासी बबीता से हुई थी, लेकिन शादी के 32 महीने बाद ही वह शहीद हो गए। उनकी कोई औलाद नहीं थी।
 
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सीआरपीएफ आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला
ग्राम समाज की जमीन पर भाई ने बनाया स्मारक
शहीद आनंद कुमार के बड़े भाई हेड कांस्टेबल जितेंद्र सिंह के मुताबिक भाई शहीद होने पर सरकार से शहीद स्मारक, कन्या इंटर कालेज और अस्पताल खोलने की मांग की गई थी। कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला। जहां भाई का अंतिम संस्कार किया गया था। वहीं पर ग्राम समाज की जमीन में स्मारक बनाया गया। वह भी अपने खर्च पर। करीब तीन लाख रुपये खर्च कर स्मारक की बाउंड्री, मूर्ति स्थापना के लिए फाउंडेशन बनवाया गया। 
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शहादत के दिन हुई प्रतिमा का अनावरण - फोटो : अमर उजाला
शहादत के दिन हुई प्रतिमा का अनावरण
सीआरपीएफ सिपाही आनंद कुमार एक जनवरी 2008 को आतंकियों के हमले में शहीद हुए थे। इसी शहादत के दिन ही उनके गांव देहरा में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया। एक जनवरी 2019 को शहीद की प्रतिमा का अनावरण हुआ।
 
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