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14 अप्रैल को शबनम ने सलीम को 55 कॉल किए, एक बच्चा बच गया था उसे फिर खुद ही ठिकाने लगा दिया

Sat, 27 Feb 2021 05:37 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा
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शबनम। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
शबनम-सलीम की प्रेम कहानी और उनके खूनी इतिहास को कौन नहीं जानता। अपने प्रेम को मुकम्मल करने के लिए दोनों ने मिलकर परिवार के सात लोगों का बेरहमी से कत्ल कर दिया था। शबनम की कहानी इतनी भयावह और बर्बरतापूर्ण है कि उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के जिस गांव में वो रहती थी, वहां दूर-दूर तक लोग आज भी अपनी बेटी का नाम शबनम नहीं रखते हैं। शबनम बावनखेड़ी गांव में रहती थी। इसी गांव में वह अपने पूरे परिवार के साथ रहती थी। शबनम के पिता पढ़े-लिखे थे और एक स्कूल में अध्यापक थे। उसके दो भाई, मां-बाप सब लोग साथ रहते थे। शबनम खुद डबल एमए थी। वो भी एक स्कूल में शिक्षिका थी और बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाती थी। उन दिनों लोग उसे और उसकी दरियादिली को बेहद पसंद करते थे।
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अमरोहा कांड के बाद की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
सब कुछ अच्छा चल रहा था कि शबनम को बावनखेड़ी के ही एक लड़के से प्यार हो गया, जिसका नाम था सलीम। सलीम और शबनम में आसमान जमीन का फर्क था। एक तरफ शबनम खुद भी पढ़ी-लिखी, शिक्षित और संपन्न परिवार से थी, तो वहीं सलीम केवल छठी पास था। शबनम के परिवारवालों को जब उनके रिश्ते की जानकारी हुई तो उन्होंने आपत्ति जताई और उनकी शादी के खिलाफ हो गए। 
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अमरोहा कांड के बाद की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
वहीं, दूसरी ओर प्यार में अंधे शबनम और सलीम को कुछ समझ नहीं आ रहा था। समाज, परिवार और रिश्तेदारों की परवाह किए बिना दोनों अपने प्यार को परवान चढ़ाते गए। वो इस कोशिश में भी लगे रहे कि शायद परिवारवाले मान जाएं और कल को शादी हो जाए। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ...और इसी दौरान वो काली रात आई जिसने सबकुछ बदलकर रख दिया। 
 

 

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शबनम - फोटो : Social Media
14 अप्रैल 2008 की रात को न केवल बावनखेड़ी, बल्कि पूरे अमरोहा के लोग आजतक नहीं भूले। उस रात एक पड़ोसी पुलिस को फोन करके कहता है कि उनके सामने जो घर है, उसमें कई लाशें पड़ी हुई हैं। यह सुनते ही पुलिस के होश उड़ जाते हैं और टीम तुरंत मौके पर पहुंचती है। घर पहुंचकर जब पुलिस ने नजारा देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वहां एक साथ सात शव पड़े हुए थे। ये शव शबनम के मां-बाप, दोनों भाई, एक भाभी, एक मौसेरी बहन और एक सात महीने के मासूम भतीजे के थे। 
 
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शबनम - फोटो : अमर उजाला
वहीं घर में कोने में एक तरफ बैठकर शबनम दहाड़े मारकर रो रही थी। वह परिवार में बची अकेली सदस्य थी। हर किसी को उस समय शबनम के साथ हमदर्दी थी। पुलिस ने फौरन सभी लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और शबनम से शुरूआती पूछताछ की। इस दौरान शबनम ने बताया कि रात के वक्त छत से कुछ लोग आए थे और उन्होंने घर में घुसकर सभी लोगों को मार डाला। 
 
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अमरोहा कांड के बाद की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
अगले दिन सुबह होने तक बात आग की तरह फैल जाती है और लोग सड़कों पर उतर जाते हैं। घटना की जानकारी लखनऊ तक पहुंचती है तो सरकारी गलियारे में खलबली मच जाती है। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती भी जल्दबाजी में वहां पहुंचकर इकलौती बची शबनम के लिए पांच लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा कर देती हैं। इधर पुलिस पूरे घर का मुआयना कर जांच कर ही रही थी कि एक दो दिन बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई। इस रिपोर्ट के बाद पुलिस का पूरा नजरिया ही बदल गया। 
 
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अमरोहा कांड के बाद की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट में लिखा था कि जब सभी को कुल्हाड़ी से मौत के घाट उतारा जा रहा था तो किसी ने कोई विरोध नहीं किया था। इसके साथ ही परिवार के सभी सदस्यों को जहर भी दिया गया था। यह जानकर पुलिस कुछ पल के लिए सन्न रह गई। उनका तर्क था कि कोई अपराधी अगर हत्या करने के लिए आया है तो अपने साथ जहर लेकर क्यों आएगा। जहर तो धोखे से दिया जाता है। इन्हीं सब उधेड़बुन के बीच शक की सुई शबनम की ओर घूमती है और पुलिस उसके द्वारा बताई गई शुरूआती कहानी पर नए सिरे से जांच शुरू करती है। 
 

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अमरोहा कांड के बाद की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
पुलिस को जांच में पता चला कि घर के मुख्य दरवाजे से किसी का प्रवेश नहीं हुआ था। पड़ोसियों ने भी बताया कि जब वे घटना के बाद आए तो मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था। शबनम के घर की दीवार जमीन से 14 फीट ऊंची थी, जिसपर बिना किसी मजबूत सहारे के चढ़कर छत तक नहीं पहुंचा जा सकता था। दीवार पर किसी तरह का कोई निशान नहीं था जिससे यह पता चले कि कोई छत पर चढ़ा था। बाहरी दीवारों पर खरोंच तक के निशान नहीं थे और न ही सीढ़ी का दरवाजा खुला हुआ था। इस सब के बाद पुलिस को यह समझ आने लगा था कि जो कोई भी घर के अंदर आया वो जबरदस्ती नहीं घुसा था। न ही किसी के साथ हाथापाई हुई थी। पहले सबकी जहर से मौत हो चुकी थी और बाद में उन्हें कुल्हाड़ी से मारा गया था। 

 

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अमरोहा कांड के बाद की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद पुलिस ने सबसे पहले शबनम का मोबाइल कब्जे में लिया और डीटेल खंगाले। उससे जो बात सामने आई वो हैरान करने वाली थी। पता चला कि 14 अप्रैल को शबनम ने सलीम को 55 कॉल किए थे। वारदात के करीब पांच मिनट पहले और वारदात के पांच-10 मिनट
बाद दो अंतिम कॉल भी सलीम को ही किए गए थे। वहीं पूरे महीने में सलीम को करीब 900 कॉल किए गए थे। इससे यह स्पष्ट हो गया कि शबनम लगातार सलीम के संपर्क में थी। पुलिस सीधे सलीम को गिरफ्तार करती है और उससे पूछताछ करती है। कुछ समय बाद सलीम टूट जाता है और पुलिस को सब सच बता देता है।
 

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अमरोहा कांड के बाद की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
इस पूछताछ के दौरान घर में शबनम की तबीयत खराब हो जाती है और अस्पताल में जांच करने पर पता चलता है कि वह सात महीने की गर्भवती है। अबतक पुलिस के सामने भेद खुल ही चुका था। आगे सलीम ने बताया कि सब लोग हमारी शादी के खिलाफ थे और हम एक दूसरे के बिना जी नहीं सकते थे इसलिए हमने मिलकर यह फैसला किया। मैं जहर लेकर आया था, शबनम ने दरवाजा खोला, सबको रात की चाय दी गई और उसमें जहर मिलाया गया। सबने चाय पी जिसके बाद उनकी मौत हो गई। वहीं शबनम के मासूम भतीजे को गला घोंटकर मारा गया, जिसके बाद सबको कुल्हाड़ी से मारा गया।
 
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अमरोहा कांड के बाद की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
शबनम इस दौरान अपने ही परिवारवालों को मरते हुए देखती रही। जब दोनों को भरोसा हो गया कि सब मर चुके हैं तो शबनम ने दरवाजा खोलकर सलीम को वापस भेज दिया और अंदर आकर चीखने लगी। इसके बाद पड़ोसियों को जानकारी हुई और मामला सामने आया। फिलहाल शबनम जेल में बंद है और राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका को ठुकरा दिया है। उनका एक बेटा भी है, जिसे शबनम के एक परिचित अपने बच्चे की तरह पाल रहे हैं। अब पूरे देश को कातिल शबनम और सलीम पर अंतिम फैसले का इंतजार है।
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