संभल की शाही जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने के दावे पर शुक्रवार को चंदौसी कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट कमिश्नर ने सर्वे रिपोर्ट पेश करने के लिए समय मांगा। मस्जिद पक्ष ने वादी से दस्तावेज़ों की प्रतियां मांगी, और अगली सुनवाई 8 जनवरी तय की गई। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को मामले की सुनवाई से रोकते हुए प्रशासन को कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
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चंदाैसी में कोर्ट परिसर में बढ़ाई गई सुूरक्षा
- फोटो : संवाद
जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने के केस में शुक्रवार को भारी पुलिस बल की सुरक्षा में सिविल जज सीनियर डिवीजन संभल स्थित चंदौसी आदित्य कुमार सिंह की कोर्ट में सुनवाई हुई। इस बीच दोनों पक्षों के वकील कोर्ट में पहुंचे। कोर्ट कमिश्नर ने रिपोर्ट पेश करने के लिए कुछ दिन का समय मांगा। इसके अलावा मस्जिद पक्ष के लोगों ने वादी के अधिवक्ता से दावे इत्यादि की कॉपी उपलब्ध कराने को कहा। कोर्ट ने अगली सुनवाई आठ जनवरी तय की है।
उधर, सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम निर्देश देते हुए निचली अदालत से संभल जामा मस्जिद मामले पर सुनवाई न करने को कहा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने की भी हिदायत दी है।
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चंदाैसी में कोर्ट परिसर में बढ़ाई गई सुूरक्षा
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बताते चलें कि 19 नवंबर को सिविल जज सीनियर डिविजन संभल स्थित चंदौसी की अदालत में संभल की शाही जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने को लेकर कैला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरि, हरिशंकर जैन समेत आठ वादकारियों ने छह लोगों के विरुद्ध दावा दायर किया था। न्यायालय ने उसी दिन कोर्ट कमिश्नर रमेश सिंह राघव को नियुक्त करके सर्वे (कमीशन) किए जाने के आदेश देते हुए आगामी तिथि 29 नवंबर सुनवाई के लिए नीयत की गई।
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चंदाैसी में कोर्ट परिसर में बढ़ाई गई सुूरक्षा
- फोटो : संवाद
कोर्ट कमिश्नर उसी शाम जामा मस्जिद में टीम के साथ सर्वे करने के लिए पहुंचे थे। इसके बाद बीते रविवार की सुबह डीएम व एसपी की सुरक्षा में दोबारा सर्वे के लिए पहुंचे तो संभल में बवाल हो गया। इसमें पांच लोगों की जान चली गई। शुक्रवार को इस मुकदमे की सुनवाई को लेकर पुलिस प्रशासन सुबह से ही सतर्क नजर आया।
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संभल में हिंसा
- फोटो : संवाद
10.43 मिनट पर डीएम राजेंद्र पैंसिया व एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई न्यायालय परिसर में पहुंचे तथा सुनवाई होने वाले न्यायालय का मुआयना किया और न्यायालय परिसर में मौजूद अधिवक्ताओं से भी वार्ता की। 11 बजे न्यायालय में सुनवाई प्रारंभ हुई। अधिवक्ताओं की कलमबंद हड़ताल खत्म होने के कारण किसी अन्य मुकदमे में सुनवाई नहीं हुई। सिर्फ शाही जामस्जिद बनाम हरिहर मंदिर के मुकमदे में आवाज लगी।
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संभल में हिंसा
- फोटो : संवाद
मस्जिद की ओर से अधिवक्ता शकील वारसी व कासिम जमाल ने कोर्ट में दावे की नकलें मांगीं। इसी बीच वकील कमिश्नर रमेश सिंह राघव ने कमिशन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा। जामा मस्जिद की ओर से उपस्थित अधिवक्ता शकील वारसी ने कहा कि यदि और समय दिया जाता है तो यह दोबारा मस्जिद का मुआयना करने जाएंगे तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।
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संभल में पथराव करने वालों के पोस्टर जारी
- फोटो : पुलिस
जिस पर न्यायालय ने 10 दिन का समय एडवोकेट कमिश्नर को मुआयना की रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दे दिया। अगली सुनवाई के लिए आठ जनवरी 2025 नियत कर दी गई। वादी की ओर से अधिवक्ता श्रीगोपाल शर्मा, डीजीसी सिविल प्रिंस शर्मा, यूनियन ऑफ इंडिया की ओर से विष्णु शर्मा सुनवाई के दौरान उपस्थित रहे।
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Sambhal Masjid Survey Dispute
- फोटो : संवाद
न्यायालय नहीं पहुंचे विष्णु शंकर जैन व जफर अली
वादी पक्ष के उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन व शाही जामा मस्जिद संभल के सदर जफर अली एडवोकेट के सुनवाई के दौरान नहीं पहुंचने से प्रशासन ने राहत की सांस ली। सुनवाई के दौरान दोनों अधिवक्ताओं के न्यायालय पहुंचने की पूर्ण संभावना थी। जफर अली के अधिवक्ता शकील वारसी ने बताया कि शाही मस्जिद की इंतजामिया कमेटी व प्रशासन ने जफर अली एडवोकेट को जुमा नमाज के कारण संभल में ही बने रहने के लिए कहा। जिस कारण जफर अली एडवोकेट न्यायालय में उपस्थित नहीं हो सके।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
हाईकोर्ट के आदेश तक ट्रायल कोर्ट कोई कार्रवाई न करे: सुप्रीम कोर्ट
संभल हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश देते हुए निचली अदालत से संभल जामा मस्जिद मामले पर सुनवाई न करने को कहा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने की भी हिदायत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने को कहा है और कहा कि अब हाईकोर्ट के निर्देश पर ही कोई कार्रवाई हो सकेगी।
दरअसल मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर कर मस्जिद का सर्वे कराने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि वह उच्च न्यायालय क्यों नहीं गए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कुछ अहम निर्देश दिए, जिनके मुताबिक निचली अदालत को इस मामले पर सुनवाई करने से रोक दिया गया है।