फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

8 लोगों में 7 का कत्ल, फिर ऐसे टूटी शबनम की खामोशी, पुलिसकर्मी ने सुनाई घटना की खौफनाक कहानी

Thu, 18 Feb 2021 05:18 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
विज्ञापन
1 of 5
बावनखेड़ी हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
देश की चर्चित मर्डर मिस्ट्री में से एक बावनखेड़ी हत्याकांड का खुलासा करना पुलिस के लिए बड़ा चुनौतीपूर्ण था। केस के विवेचक आरपी गुप्ता (सेवानिवृत्त निरीक्षक) ने बताया कि एक तरफ वारदात को लेकर जनता में आक्रोश था तो दूसरी ओर सख्त कानून व्यवस्था के लिए जानी जाने वालीं मायावती प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं। जो पल-पल की जानकारियां लें रही थीं।

विवेचक ने बताया कि घटना के वक्त घर में आठ सदस्य मौजूद थे। शबनम को छोड़कर सभी की हत्या कर दी गई थी। घर में इकलौती बची शबनम ने अपने पहले बयान में बताया था कि बदमाश मकान की पिछली दीवार पर सीढ़ी लगाकर छत पर चढे़ और जीने से मकान में दाखिल हुए थे, जबकि जीने का दरवाजा अंदर से बंद था। जांच में सामने आया कि मकान की पिछली दीवार पर न तो सीढ़ी लगाने का कोई निशान था और न हीं पैरों के निशान मिले थे। 
विज्ञापन

2 of 5
शबनम - फोटो : अमर उजाला
शबनम ने कहा था कि गर्मी महसूस होने पर वह जीने का दरवाजा खोलकर छत पर टहलने गई थी। इसी दौरान बदमाश घर में दाखिल हो गए थे। मौके पर सभी की लाशों को चादर ओढ़ा दी गई थी। मन में सवाल उठा कि शबनम को कैसे पता चल गया था कि सभी की हत्या हो चुकी है। घर से नशीली गोलियां भी मिली थीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हत्या करने से पहले सभी को नशा या जहर देने की पुष्टि हुई थी, जबकि शबनम बेहोश तक नहीं हुई थी। 

उन्होंने बताया कि बार-बार पूछताछ करने पर शबनम बीमार होने लगती थी। शबनम को उपचार के बहाने अस्पताल लेकर पहुंचे और खामोशी से उसका मेडिकल कराया गया था, तब रिपोर्ट से पता चला था कि शबनम गर्भवती है। फोन खंगालने पर उस रात शबनम की उसके प्रेमी सलीम के मोबाइल नंबर पर 52 बार बातचीत की जानकारी मिली। यहां से पुलिस को केस में लीड मिलती चली गई थी। इसके बाद दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो घटना से पर्दा उठ गया।
विज्ञापन

3 of 5
केस के विवेचक आरपी गुप्ता (सेवानिवृत्त निरीक्षक) - फोटो : अमर उजाला
जनता की डिमांड पर तैनात किए गए थे आरपी गुप्ता
हसनपुर थाने के तत्कालीन प्रभारी आरपी गुप्ता ने बताया कि जिस रात घटना हुई तब उनकी तैनाती अमरोहा कोतवाली में थी। बावनखेड़ी हत्याकांड के बाद लोगों ने जाम लगा दिया था। जनता ने मांग रखी थी कि हसनपुर में आरपी गुप्ता की तैनाती की जाए। अफसरों ने हसनपुर के कोतवाल को निलंबित कर आरपी गुप्ता को तैनात किया था। वर्ष 2004 में आरपी गुप्ता की इसी थाने में तैनाती रही थी।

52 दिन में दाखिल की थी बावनखेड़ी कांड की चार्जशीट
बावनखेड़ी हत्याकांड की विवेचना पुलिस महकमे के इतिहास के पन्नों में दर्ज है। विवेचक आरपी गुप्ता ने बताया कि उन्होंने इस 52 दिन में केस की तफ्तीश पूरी करने के बाद 300 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी। जिसमें 45 गवाह भी बनाए गए थे।

4 of 5
हत्याकांड के दूसरे दिन बावनखेड़ी गांव पहुंची तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश सरकार ने विवेचक को दिया था 50 हजार का इनाम
देश की चर्चित मर्डर मिस्ट्री में से एक बाननखेड़ी की विवेचना की जिम्मेदारी आरपी गुप्ता ने बखूबी निभाई थी। उन्होंने इस केस का खुलासा किया था। सरकार की ओर से आरपी गुप्ता को 50 हजार का इनाम दिया गया था।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
शबनम और सलीम - फोटो : अमर उजाला
यह था मामला
14 अप्रैल 2008 की रात अमरोहा जनपद के हसनपुर थानाक्षेत्र के गांव बावनखेड़ी में प्रेेमी सलीम के साथ मिलकर मास्टर शौकत अली की बेटी शबनम ने अपने ही परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी थी। पिता शौकत अली, मां हाशमी, भाई अनीस और राशिद, भाभी अंजुम, फुफेरी बहन राबिया की कुल्हाड़ी से गला काटकर हत्या की थी। जबकि मासूम भतीजे अर्श की गला दबाकर हत्या की थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें