मैनाठेर बवाल के दाैरान डीआईजी पर हमले के मामले में 16 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। फैसला सुनते ही कोर्ट में मौजूद सभी दोषी सन्न रह गए। इसके अलावा कचहरी परिसर में मौजूद परिजन भी रो पड़े। अगर उस वक्त खुफिया एजेंसियों द्वारा गृह विभाग को भेजी गई रिपोर्ट को देखेंगे तो पता चलेगा कि भीड़ को भड़काया गया था। कुछ नेताओं ने चौराहों पर खड़ा होकर एलान किया था कि हमें बदला लेना है।
इसमें कुछ सियासी लोगों के नाम का भी उल्लेख था। लेकिन जब भीड़ ने बवाल कर दिया और बेकाबू हो गई थी नेताजी खामोशी के साथ वहां से निकल गए थे। उस वक्त हजारों की भीड़ सड़क पर आ गई थी। किसी के हाथ में लोहे का सरिया था तो कोई डंडे पकड़े था। क्योंकि उस वक्त पुलिस पर भी फायरिंग की गई थी लिहाजा साफ है कि लोगों के पास अवैध असलहे भी थे। छह जुलाई 2011 को इस घटना की शुरूआत सुबह के वक्त हुई थी। शुरू में कुछ ही लोग सड़कों पर आए थे।
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मैनाठेर कांड में डीआईजी पर हमले के दोषियों को सजा
- फोटो : अमर उजाला
दबिश देने वाले पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही थी। उस वक्त संबंधित पुलिस क्षेत्राधिकारी और थानाध्यक्ष भी मौके पर थे। लेकिन जब बवाल बढ़ा तो आसपास से भी पुलिस को बुला लिया गया था। जब पुलिस का पहुंचना शुरू हुआ तो मौजूद कुछ सियासी लोगों ने भीड़ को भड़काना शुरू कर दिया।
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सजा सुनते ही रो पड़े परिजन
- फोटो : अमर उजाला
दोपहर को एक बजे तक 10 हजार से भी ज्यादा की भीड़ सड़क पर आ चुकी थी। भीड़ ने यहां पहुंची पुलिस पर हमला शुरू कर दिया। मकान की छतों से पत्थर फेंके जाने लगे। फायरिंग तक की जा रही थी। हालात बिगड़ते देख पुलिस अधिकारी मुरादाबाद मुख्यालय से संभल की तरफ कूच कर गए थे।
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कोर्ट परिसर में खड़े परिजन
- फोटो : अमर उजाला
जब अधिकारी मौके पर पहुंचे तो भीड़ ने हमला शरू कर दिया। गृह विभाग को जो रिपोर्ट भेजी गई थी उसमें साफ कहा गया था कि जिस तरह भीड़ पहुंची थी उससे साफ लग रहा था कि पहले से तैयारी करके आए थे। लोगों ने सड़क किनारे वाले मकान की छतों पर पत्थर रख रखे थे। पेट्रोल भरी बोतलों को भी पुलिस के ऊपर फेंका गया था।
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मैनाठेर कांड की सुनवाई के दाैरान कोर्ट की सुरक्षा कड़ी
- फोटो : अमर उजाला
200 से ज्यादा वाहनों को पहुंचा था नुकसान
मैनाठेर बवाल में 200 से भी ज्यादा वाहनों को नुकसान हुआ था। पुलिस के सबसे ज्यादा वाहन फूंके गए थे। थाने और चौकी में खड़े वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था। इतना ही नहीं कुछ वाहनों को भीड़ में शामिल लोग थाने से खींचकर ले गए थे। जिन्हें बाद में पुलिस ने बरामद भी कर लिया था।पीएसी की गाडि़यों को भी आग के हवाले कर दिया गया था। सबसे ज्यादा नुकसान पुलिस की गाडि़यों को ही भीड़ ने पहुंचाया था।
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कोर्ट परिसर की सुरक्षा कड़ी की गई
- फोटो : अमर उजाला
वायरलैस सेट तक लोग उखाड़कर ले गए थे। पुलिस वालों के हथियार भी छीनने की कोशिश की गई थी। जो हथियार छीन लिए गए थे पुलिस ने उन्हें बाद में बरामद कर लिया था। उस वक्त मैनाठेर भेजे गए तत्कालीन डीजी बृजलाल ने अमर उजाला के साथ हुई बातचीत में बताया था कि भीड़ को लोगों ने भड़काया था। भीड़ को भड़काने वाले उस वक्त चिन्हित भी कर लिए गए थे। लेकिन जब सत्ता बदली तो उनके खिलाफ कार्रवाई को ही रोक दिया गया था। पुलिस अफसरों पर कार्रवाई न करने के लिए दबाव बनाया था।
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कोर्ट परिसर की सुरक्षा कड़ी की गई
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस को रोकने के लिए बंद कर दिए थे रास्ते
पुलिस किसी भी तरह से घटनास्थल पर न पहुंचे इसके लिए संभल मार्ग को जगह जगह से बंद कर दिया गया था। डींगरपुर के पास तो सड़क पर पत्थर रख दिए गए थे। लोग जाम लगाकर सड़क पर बैठ गए थे। पुलिस को हाईवे से हटकर ग्रामीण रास्तों से होते हुए मौके पर पहुंचना पड़ा था। दो स्थानों पर तो पेड़ काटकर सड़क पर डाला गया था। जब भीड़ हटी तो पुलिस ने इन पेड़ों को सड़क से हटवाया था। भीड़ की सारी कोशिश यह थी कि पुलिस किसी भी तरह से मौके पर न पहुंचे।
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Mainathed Kand
- फोटो : अमर उजाला
क्योंकि मैनाठेर थाने की पुलिस को भीड़ पहले ही वहां से हटा चुकी थी। थाने में आग लगा दी गई थी। वाहन फूंक दिए गए थे। जब थानाध्यक्ष मैनाठेर ने मुख्यालय को फोन किया तो पुलिस बल आसपास के जिलों से वहां के लिए भेजा गया था। लेकिन लोगों ने एक साजिश के तहत जगह जगह रास्ते बंद कर दिए थे। मुरादाबाद से रवाना हुई पुलिस को गांव के रास्तों से होते हुए मौके पर पहुंचना पड़ा था। इससे भी घटनास्थल पर फोर्स को पहुंचने में देरी हुई थी।
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कोर्ट परिसर में खड़े परिजन और पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
नेताओं ने बिगाड़ दिए थे हालात, छेड़खानी में फंसे समर्थक को बचाना चाहता था विधायक का बेटा
मैनाठेर बवाल की कहानी मुरादाबाद से लेकर संभल तक नेताओं ने रची थी। असालतनगर बघा गांव में पुलिस जिस आरोपी को पकड़ने गई थी वो एक विधायक के बेटे का समर्थक था। उसे गिरफ्तारी से बचाने के लिए ही साजिश रची गई थी। मैनाठेर थाना क्षेत्र के असालतनगर बघा गांव में पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी को दबिश दी थी। छह जुलाई 2011 की सुबह करीब आठ बजे आरोपी के परिवार ने साजिश के तहत हंगामा किया।
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सजा सुनते ही फफक पड़े परिजन
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धार्मिक पुस्तक का अपमान करने का आरोप लगाया। यह बात पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल गई थी। असालतनगर बघा गांव के सामने ही सैकड़ों लोग जुट गए थे। इसी दौरान मुरादाबाद और संभल के नेता और जनप्रतिनिधि भीड़ के बीच पहुंच गए थे। उनसे पहले ही कुछ लोग माइक लेकर वहां आ गए थे। मुरादाबाद और संभल के एक नेता ने माइक हाथ में लिया और तकरीर शुरू कर दी थी।
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डीआईजी पर हमला करने के दोषी
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इस दौरान उन्होंने कहा कि पुलिस ने धार्मिक पुस्तक का अपमान किया है। इस पर भीड़ भड़क गई और पुलिस व सरकारी वाहनों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। पहले भीड़ ने मैनाठेर थाने को निशाना बनाया और वाहनों में आग लगा दी थी। किसी तरह पुलिस कर्मी अपनी जान बचाकर थाने की छत पर पहुंच गए थे लेकिन भीड़ ने छत तक पहुंचने का प्रयास किया था।
मैनाठेर थाना प्रभारी की गाड़ी भी फूंक दी थी। इसके बाद भीड़ ने मुरादाबाद से संभल जा रही पीएसी की गाड़ी को आग लगा दी और डींगरपुर पुलिस चौकी को भी निशाना बनाया। लगातार भीड़ बेकाबू होती जा रही हैं। इसके बाद डीआईजी मौके के लिए रवाना हो गए थे। पुलिस जिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए गई थी वो एक सपा नेता और विधायक के बेटे का दोस्त था। पुलिस का दावा है कि उन्होंने ही अपने लोगों के साथ थाने पर हमला किया था।