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मैनाठेर कांड: सजा सुनते ही फूट-फूटकर रोने लगे दोषी, कोर्ट परिसर में खड़े परिजन भी बिलख पड़े, जानें पूरा केस

Sun, 29 Mar 2026 02:39 PM IST
Vimal Sharma जितेंद्र कुमार, अमर उजाला, मुरादाबाद

सार

मैनाठेर बवाल मामले में मुरादाबाद की अदालत ने 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फैसला सुनते ही कोर्ट कक्ष में मौजूद सभी दोषी फूट-फूटकर रोने लगे, कोई सिर पकड़कर बैठ गया तो कोई जमीन पर बैठकर बिलखता नजर आया। जैसे ही सजा की खबर बाहर पहुंची, कचहरी परिसर में मौजूद परिजन भी रो पड़े।
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मैनाठेर कांड की सुनवाई के दाैरान अदालत परिसर में माैजूद लोग - फोटो : अमर उजाला

मुरादाबाद में 15 साल पहले मैनाठेर क्षेत्र में उत्पात मचाने वाले 16 दोषी शनिवार को बेबस नजर आए। आजीवन कारावास की सजा सुनते ही कोर्ट में फूट-फूटकर रोने लगे। इसकी जानकारी जैसे ही कोर्ट के बाहर आई तो उनके परिजन भी बिलख पड़े। कुछ देर के लिए कचहरी का माहौल भावुक हो गया।

एडीजे-दो की अदालत में मैनाठेर बवाल के दोषियों को शनिवार को सजा सुनाई जानी थी लेकिन उनके परिजन सुबह से ही कचहरी में पहुंच गए थे। कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस सभी दोषियों को जिला जेल से कचहरी लेकर पहुंची और सीधे एडीजे-दो की कोर्ट के सामने गेट के पास वाहन लगा दिया।

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कोर्ट परिसर में खड़े परिजन - फोटो : अमर उजाला
दोपहर करीब एक बजे एडीजे-दो की कोर्ट ने 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट कक्ष में मौजूद सभी दोषी फूट-फूटकर रोने लगे। किसी ने अपना सिर पकड़ लिया तो कोई जमीन पर बैठकर रोने लगा। बताया जा रहा है कि एक-दूसरे को पकड़कर बिलखते नजर आए। दोषी कासिम के पिता इकबाल तो कोर्ट के सामने पार्क में पेड़ के नीचे बैठकर रोने लगे। बोले कि मेरा इकलौता बेटा है। 
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मैनाठेर कांड की सुनवाई के बाद कोर्ट परिसर में खड़े परिजन - फोटो : अमर उजाला

मैनाठेर थाने की सुरक्षा बढ़ाई
 मैनाठेर बवाल के दोषियों को शनिवार को सजा सुनाई गई। क्षेत्र में किसी तरह का बवाल या हंगामा न हो। इसके लिए पुलिस भी अलर्ट रही। मैनाठेर थाने में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

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मैनाठेर कांड की सुनवाई - फोटो : अमर उजाला

जिस मुकदमे को सपा करा रही थी वापस, अदालत ने उसमें दोषियों को सुनाई सजा: पूर्व डीजीपी
पूर्व डीजीपी एवं राज्यसभा सांसद बृजलाल ने मैनाठेर बवाल के दोषियों को आजीवन कारावास की सजा के एलान का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सपा अपने कार्यकाल में इस मुकदमे को वापसी करने में जुटी थी लेकिन अदालत इस मामले में शुरुआत से गंभीर थी और उस वक्त की सरकार की ओर से दाखिल की गई अर्जी को खारिज करते हुए मुकदमे की सुनवाई जारी रखी थी।

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कोर्ट परिसर की सुरक्षा कड़ी की गई - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि 2012 में सत्ता परिवर्तन के साथ ही आईपीएस अफसर पर हमले की घटना को सपा सरकार मामूली मानने लगी थी। कुछ नेता और उनके समर्थकों को खुश करने के लिए सपा सरकार ने इस मुकदमे को वापस लेने का निर्णय लिया था लेकिन कोर्ट ने सपा की अर्जी खारिज कर दी थी।
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कोर्ट परिसर में दोषियों के परिजन - फोटो : अमर उजाला
उसका ही नतीजा है कि आज अदालत ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उनका कहना है कि बाकी मुकदमों की भी दोबारा जांच की जाए ताकी मैनाठेर बवाल की साजिश रचने वाले आरोपी भी सलाखों के पीछे जाएं।
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कोर्ट परिसर की सुरक्षा कड़ी की गई - फोटो : अमर उजाला
धमकी और तबादलों भी नहीं डरे थे वादी रवि कुमार
डीआईजी पर हमले के मामले में उनके पीआरओ रवि कुमार ने एफआईआर दर्ज कराई थी। रवि कुमार भी इस घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वह भी भीड़ में फंस गए थे और डीआईजी के साथ ही रहे थे। उन्होंने बताया कि इस मुकदमे को वापस लेने के लिए उन पर तरह तरह से दबाव बनाए गए। कभी ट्रांसफर की धमकी दी गई तो कभी अन्य तरह की धमकी दी गई लेकिन उन्होंने उस मंजर को देखा। इस तरह भीड़ ने हमला किया था। अदालत के फैसले से बहुत खुश हैं।

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मैनाठेर कांड में सजा सुनाए जाने से पहले कोर्ट परिसर की सुरक्षा कड़ी की गई - फोटो : अमर उजाला

डीआईजी पर हमले में 16 दोषियों को आजीवन कारावास 
वर्ष 2011 में छह जुलाई को मैनाठेर क्षेत्र में मुरादाबाद के तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर जानलेवा हमला कर सड़कों पर खुलेआम उत्पात मचाने में 16 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। अपर जिला न्यायाधीश-2 कृष्ण कुमार सिंह की अदालत ने शनिवार को सजा सुनाने के साथ सभी दोषियों पर 55-55 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। सजा सुनाए जाते ही सभी को जेल भेज दिया गया। अदालत में इन सभी को 23 मार्च को दोषी करार दिया था।

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मैनाठेर कांड में सुनाई गई सजाा - फोटो : अमर उजाला
मैनाठेर क्षेत्र के असालतनगर बघा गांव में छह जुलाई 2011 को छेड़खानी के आरोपी युवक की तलाश में पुलिस ने दबिश दी थी। आरोपी के परिवार ने पुलिस पर धार्मिक पुस्तक का अपमान करने का आरोप लगाकर हंगामा कर दिया था। इसके बाद मुरादाबाद-संभल रोड पर तीन जगह लोगों ने जाम लगाकर बवाल किया था। मैनाठेर थाने और डींगरपुर पुलिस चौकी में आग लगा दी थी।

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मैनाठेर कांड के दोषी - फोटो : अमर उजाला
हालात काबू करने निकले तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह और डीएम राजशेखर को भी भीड़ ने घेर लिया था। डीएम के निकल जाने पर भीड़ डीआईजी अशोक कुमार पर टूट पड़ी थी। खुद को बचाने की कोशिश में डींगरपुर स्थित पेट्रोल पंप पर पहुंचे डीआईजी पर बेरहमी से हमला करते हुए भीड़ ने उनकी पिस्टल छीन ली थी। कई थानों की फोर्स द्वारा घेराबंदी शुरू करने पर भीड़ डीआईजी को मरणासन्न हालत में छोड़कर भागी थी।

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मैनाठेर कांड के दोषी - फोटो : अमर उजाला
इस मामले में डीआईजी के तत्कालीन पीआरओ रवि कुमार ने 33 नामजद और 300 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने 25 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इनमें छह आरोपी नाबालिग होने के कारण उनकी फाइल दूसरी अदालत में भेज दी गई थी। डीआईजी पर हमले के मामले में सुनवाई एडीजे-2 कृष्ण कुमार सिंह की अदालत में चली। शनिवार को 16 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

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मैनाठेर कांड के दोषी - फोटो : अमर उजाला
सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की हो चुकी है मौत
मैनाठेर बवाल में तत्कालीन डीआईजी के हमले और उत्पाद में आरोपी बनाए गए लोगों में से तीन की मामले की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। सुनवाई का सिलसिला आगे बढ़ने पर 23 मार्च को 16 आरोपियों को दोषी करार दिया गया। शनिवार को सजा सुनाए जाने के बाद सभी न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिए गए।

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मैनाठेर कांड के दोषियों को सुनाई गई सजा - फोटो : अमर उजाला

इन दोषियों को सुनाई गई सजा
मंजूर अहमद निवासी डींगरपुर, मो. अली, हाशिम निवासी ललवारा थाना मैनाठेर, मो. कमरुल, मो. मुजीफ निवासी मसेबी रसूलपुर थाना मैनाठेर, मो. यूनुस, अंबरीश निवासी शाहपुर चामरान, कासिम निवासी परियावली थाना असमोली जिला संभल, मो. मोबीन उर्फ मोहम्मद मोहसिन निवासी बरखेड़ा थाना डिडौली जिला अमरोहा, मो. मुजीब, तहजीब आलम निवासी असदपुर थाना मैनाठेर, जाने आलम निवासी मिलक नवाब मैनाठेर, मो. नाजिम निवासी असदपुर मैनाठेर, मैनाठेर के लालपुर निवासी रिजवान और ताहरपुर निवासी मो. फिरोज।

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मैनाठेर कांड में सजा सुनाए जाने के बाद रोते परिजन - फोटो : अमर उजाला

किन धाराओं में कितनी सजा 

  • धारा 147 (दंगा) दो साल की सजा,
  • धारा 148 (घातक हथियार के साथ दंगा) तीन साल की सजा
  • धारा 307 (हत्या का प्रयास) 10 साल की सजा-10 हजार जुर्माना (जुर्माना नहीं देने पर एक माह की अतिरिक्त सजा)
  • धारा 336 (जान को खतरे में डालना) दो माह की सजा 
  • धारा 332 (सरकारी कर्मचारी को चोट पहुंचाना) दो साल की सजा 
  • धारा 353 (सरकारी काम में बाधा/हमला) दो साल की सजा
  • धारा 436 (आगजनी) आजीवन कारावास-20 हजार जुर्माना (जुर्माना नहीं देने पर दो माह की अतिरिक्त सजा)
  • धारा 427 (नुकसान पहुंचाना) दो साल की सजा
  • धारा 395 (डकैती) आजीवन कारावास,-20 हजार का जुर्माना (जुर्माना नहीं देने पर दो माह की अतिरिक्त सजा)
  • धारा 397 (डकैती में हथियार का इस्तेमाल) सात साल की कठोर सजा, धारा सात (आपराधिक विधि संशोधन अधिनियम) छह माह की सजा।
  • धारा 3 (लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम) तीन साल की सजा,
  • धारा 4 (लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम) पांच साल की सजा-पांच हजार रुपये जुर्माना (जुर्माना नहीं देने पर 15 दिन अतिरिक्त सजा)। सभी सजाएं एक साथ (समायोजित) चलेंगी। जेल में पहले बिताया समय सजा में जोड़ा जाएगा।
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