मैनाठेर बवाल मामले की सुनवाई के दौरान तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह ने अदालत में बताया कि जुलाई 2011 को भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया। वह डीएम राजशेखर के साथ मौके पर पहुंचे थे। हालात बिगड़ने पर डीएम वहां से चले गए। इस बीच करीब 500 से अधिक लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया था।
मुरादाबाद के मैनाठेर में हुए बवाल के दाैरान तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह ने भी कोर्ट पहुंचकर उस घटना का एक-एक मंजर बयां किया। जिसमें उन्होंने भीड़ के हमले से लेकर डीएम के मौके से भागने तक की पूरी कहानी बताई। उन्होंने बताया कि छह जुलाई 2011 को मैनाठेर के असालतपुरा बघा गांव में लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जाम लगा दिया था।
तत्कालीन एसपी देहात समेत फोर्स को भेजा गया था लेकिन उनके समझने पर भीड़ नियंत्रित नहीं हुई और भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया था। वह डीएम राजशेखर को साथ लेकर वहां जा रहे थे। भीड़ के पास जाकर अपनी गाड़ी रोक दी थी। वह गाड़ी से नीचे उतरे। गनर से लाउड हेलर और लाठी मंगाई।
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मैनाठेर कांड के दोषी
- फोटो : अमर उजाला
इसी बीच डीएम अपनी गाड़ी में बैठकर मौके से भाग गए थे। डीआईजी और पीआरओ रवि कुमार ही बचे थे। दोनों पर 500 से ज्यादा की भीड़ ने हमला कर दिया था। डीआईजी ने रक्षात्मक कार्रवाई करते हुए हवाई फायरिंग की लेकिन भीड़ ने आक्रामक होकर उनपर और पीआरओ पर हमला कर दिया था। डीआईजी के सिर और शरीर में गंभीर चोटें आईं।
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मैनाठेर कांड के दोषी
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वह बेहोश हो गए थे। इंस्पेक्टर एसकेएस प्रताप और उनके हमराह पुलिस कर्मियों ने डीआईजी और पीआरओ को अस्पताल पहुंचा था। तीन दिन बाद डीआईजी को होश आया। इसके बाद साईं अस्पताल से रेफर कर दिया गया था। फोर्टिस अस्पताल नोएडा और एम्स दिल्ली में करीब एक साल तक इलाज चला था। इसके बाद ही डीआईजी सामान्य हो पाए थे।
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मैनाठेर कांड के दोषी
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दोषियों को सलाखों तक पहुंचाने में अहम रही सेल्समैन की गवाही
मुरादाबाद। 15 साल पुराने बहुचर्चित मैनाठेर बवाल में शनिवार को आए फैसले में साक्ष्य और गवाहों के बयान अहम रहे। सबसे अहम गवाही एमएस तुर्की पेट्रोल पंप के सेल्समैन संतराम की रही। उन्होंने कोर्ट पहुंचकर घटना का आंखों देखा मंजर बयां किया। इस घटना में वह खुद भी चोटिल हो गए थे। शनिवार को कोर्ट के इस फैसले पर प्रशासन से लेकर शासन तक सभी की निगाह रही।
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मैनाठेर कांड के दोषी
- फोटो : अमर उजाला
एडीजीसी ब्रजराज सिंह ने बताया कि अभियोजन की ओर से कोर्ट में 51 गवाहों के बयान कराने के लिए के लिए सूची बनाई थी लेकिन 22 गवाह ही कोर्ट पहुंचे। जिसमें सेल्समैन संतराम की गवाही अहम रही। उसने अपने बयानों में बताया कि मैनाठेर के डींगरपुर चौराहे पर पाकबड़ा की ओर जाने वाले रास्ते पर भीड़ मौजूद थी।
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मैनाठेर कांड के दोषियों को सुनाई गई सजा
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उस वक्त वह पेट्रोल पंप के ऑफिस में थे। डीआईजी भीड़ को समझा रहे थे लेकिन भीड़ आक्रोशित हो गई। डीआईजी और उनके पीआरओ पर हमला कर दिया था। हमले से बचने के लिए डीआईजी और उनके पीआरओ पेट्रोल पंप की ओर भागे थे। उनकी पीछे-पीछे भीड़ भी आ गई थी। डीआईजी और दरोगा ने भीड़ को भगाने के लिए फायर भी किए लेकिन भीड़ नहीं हटी थी।
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मैनाठेर कांड में सुनवाई के बाद रो पड़े परिजन
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद भीड़ ने ऑफिस के बाहर फायर कर दिए। एक फायर संतराम के हाथ में भी लगा था। भीड़ ने पेट्रोल पंप के ऑफिस में तोड़फोड़ कर दी थी और कैश भी लूट लिया था। संतराम वहीं गिर गए थे। इसके बाद पुलिस पहुंची तो भीड़ भाग गई थी। संतराम ने बताया कि उसे उसके भांजे ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। संतराम ने अपने बयानों में उस दिन का पूरा घटनाक्रम बयां किया। इस फैसले में संतराम की गवाही अहम रही। खास बात है कि संतराम अपने बयान से पलटे नहीं और न ही किसी लालच में आया। उन्हें धमकियां तक दी गईं लेकिन वह अपनी बात पर बने रहे।
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मैनाठेर कांड में सजा सुनाए जाने के बाद रोते परिजन
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सजा पाए 16 दोषियों में अमरोहा का मोबीन भी शामिल... परिवार सदमे में
चर्चित मैनाठेर प्रकरण में शनिवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 16 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इन दोषियों में अमरोहा जनपद के डिडौली क्षेत्र के गांव बरखेड़ा राजपूत निवासी मोहम्मद मोबीन उर्फ मोहम्मद मोहसिन भी शामिल है। फैसले के बाद उसके परिवार में मातम जैसा माहौल है। पत्नी, बच्चे और वृद्ध मां का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने मोबीन को गलत फंसाने का आरोप लगाया है। साथ ही इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
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कोर्ट परिसर में खड़े परिजन
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हाईकोर्ट जाएंगे परिजन
मैनाठेर बवाल में दोषी ठहराने के बाद आजीवन कारावास की सजा पाए 16 दोषियों के परिजन हाईकोर्ट में जाने की तैयारी कर रहे हैं। मैनाठेर के मिलक नवाब निवासी जाने आलम के परिजनों का कहना है कि उसे गलत फंसाया गया है। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर ली है। जाने आलम के घर का माहौल भी गमगीन हो गया।
कोर्ट परिसर की सुरक्षा कड़ी की गई
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उसकी पत्नी और पांच छोटे बच्चे आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद परेशान हैं। उसके घर पर ग्रामीणों की भारी भीड़ है। शाहपुर चमरान निवासी अमरीश के परिवार ने भी अदालत के फैसले को चुनौती देने का मन बना लिया है। इसी तरह अन्य परिजन भी हाईकोर्ट जाएंगे।