मैनाठेर बवाल में 16 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद उसने परिजनों में खामोशी छा गई। कई ग्रामीणों ने बताया कि उकसावे में आकर लोगों ने युवाओं को बवाली बना दिया था। इसके चलते उन्हें जीवन भर जेल में रहना होगा।
मैनाठेर बवाल में 16 दोषियों को उम्रकैद की सजा की जानकारी ने बेरहम हमले के शिकार आईपीएस अशोक कुमार सिंह, उनके पीआरओ रहे रवि कुमार समेत उन तमाम लोगों ने राहत की सांस ली है लेकिन गांव असालतपुरा बघा के उन तमाम घरों में मातम जैसा नजारा है, जिनके परिजनों को सजा सुनाई गई है।
शनिवार शाम से देर रात तक गांव में इसी मामले की चर्चा होती रही। ग्रामीण स्वीकार कर रहे थे कि कुछ लोगों के जरा से उकसावे ने दर्जनों युवाओं को बवाली बना दिया था। सियासी स्वार्थों के लिए सुलगाई गई चिंगारी इतने भयानक शोले में तब्दील हुई कि जिस की आग से कई परिवार आज तक झुलस रहे हैं।
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डीआईजी पर हमला करने के आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों में इस बात का मलाल भी है कि जिन नेताओं के बहकावे में आकर ग्रामीणों ने आपा खोया, वे बाद में न किसी का हाल जानने पहुंचे, न ही पैराकारी में मददगार बने। बवाल के बाद के मुकदमों के कारण भागदौड़ से लेकर उस पर होने वाले खर्च को भी ग्रामीणों ने अकेले ही झेला। अपनों को बचाने की पैरवी में कई ग्रामीणों को मकान और जमीन और घर तक बेचने पड़ गए थे। मुकदमों की जद में आने वाले रोजगार से दूर हो गए।
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डीआईजी पर हमला करने के आरोपी
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अदालत से मामले की सजा सुनाई जाते ही कचहरी में मौजूद कई ग्रामीणों की आंखें छलक आईं तो असालतपुरा बघा में रातभर जागते लोग उन परिवारों के हालात पर चिंता जताते रहे, जिनके घर में एक ही कमाने वाला था और वह घर का मददगार बनने की बजाय जेल में उम्रकैद की सजा काटेगा।
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डीआईजी पर हमला करने के आरोपी
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पुलिस पर हमला कानून व्यवस्था को चुनाैती, नरमी असंभव : कोर्ट
बहुचर्चित मैनाठेर कांड में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि पुलिस चौकी और पीएसी की गाड़ियों को जलाना तथा तत्कालीन डीआईजी पर जानलेवा फायरिंग करना कानून व्यवस्था को खुली चुनौती है। पुलिसकर्मियों से मारपीट को भी अदालत ने गंभीर अपराध माना। फैसले में साफ कहा गया कि ऐसे मामलों में दोषियों के प्रति नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है।
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डीआईजी पर हमला करने के आरोपी
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शनिवार को सजा सुनाए जाने से पहले अभियुक्तों के वकीलों ने अदालत से कम सजा देने की अपील की। उनका कहना था कि कई आरोपी बेहद गरीब हैं उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं और घर में कमाने वाला कोई दूसरा सदस्य नहीं है। कमरुल और जाने आलम के वकील ने बताया कि जाने आलम पांच बच्चों का पिता है और उसके माता-पिता भी नहीं हैं। जबकि कमरुल के परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर है।
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मैनाठेर कांड में सजा का एलान होते ही रो पड़े परिजन
- फोटो : अमर उजाला
कुछ अन्य आरोपियों के वकीलों ने यह भी कहा कि कुछ आरोपी बीमार हैं, कुछ पहले ही जेल में समय काट चुके हैं और उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वहीं सरकार की ओर से एडीजीसी ब्रजराज सिंह ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने मिलकर गंभीर हिंसक घटना को अंजाम दिया था। इस दौरान तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह और उनके पीआरओ रवि कुमार को चोटें आईं।
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मैनाठेर कांड के दोषियों को सुनाई गई सजा
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस चौकी और पीएसी की गाड़ियों में आग लगा दी गई, डीआईजी की पिस्टल और पीआरओ का मोबाइल लूट लिया गया और जिलाधिकारी की गाड़ी में भी तोड़फोड़ की गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों को देखने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपियों के कृत्य से पूरे इलाके में डर और दहशत का माहौल बन गया था। अदालत ने साफ कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए यह मामला नरमी का नहीं, बल्कि कड़ी सजा देने का है।
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कोर्ट परिसर में रो पड़े परिजन
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इसके बाद अदालत ने सभी 16 दोषियों को दंगा, हत्या के प्रयास, आगजनी, डकैती, सरकारी कर्मचारियों पर हमला और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों में दोषी ठहराते हुए अलग-अलग अवधि की सजा और जुर्माना लगाया। आगजनी और डकैती जैसे गंभीर मामलों में सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
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कोर्ट परिसर में खड़े परिजन
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डींगरपुर के तत्कालीन प्रधान ने कराया था डीआईजी पर हमला
मुरादाबाद। तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर हमला करने वाली भीड़ का नेतृत्व डींगरपुर का तत्कालीन प्रधान कामिल कर रहा था। उसने ही पहले पीएसी वाहन में आग लगवाई और फिर तत्कालीन डीआईजी पर हमला कर दिया था। पुलिस ने जिन 25 लोगों के खिलाफ इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। उसमें प्रधान को मुख्य आरोपी बनाया था लेकिन सुनवाई के दौरान उसकी मौत हो चुकी है।
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मैनाठेर कांड में सजा का एलान
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शनिवार को अदालत ने इस चर्चित मामले में 47 पेज का फैसला सुनाया। डीआईजी के पीआरओ की ओर से दर्ज कराए गए बयानों में बताया गया कि छह जुलाई 2011 की दोपहर मैनाठेर क्षेत्र में जाम लगाकर प्रदर्शन किए जाने की सूचना पर डीआईजी ने फोर्स मौके पर भेज दी थी। इसके बाद डीआईजी डीएम के साथ मौके पर जा रहे थे। अभी डींगर पुर चौराहे पर ही पहुंचे थे कि भीड़ इकट्ठा थी।
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मैनाठेर कांड में सजा सुनाए जाने से पहले कोर्ट परिसर की सुरक्षा कड़ी की गई
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जिसका नेतृत्व डींगरपुर के प्रधान कामिल कर रहा था। उसने पीएसी वाहन में आग लगवा दी थी। डीआईजी गाड़ी से उतरकर समझाने लगे तो भीड़ ने हमला कर दिया था। वह अपनी जान बचाने को पेट्रोल पंप की ओर भागे तो भीड़ उनका पीछा करते हुए पेट्रोल पंप तक पहुंच गईथी।
डीआईजी ने अपनी और पीआरओ की जान बचाने के लिए अपनी सर्विस पिस्टल से फायरिंग की लेकिन भीड़ ने ईंट-पत्थर मारकर उनकी पिस्टल हाथ से गिरा दी थी। इसके बाद पीआरओ ने पिस्टल उठाई और फायर किए थे। काफी देर तक हमला किया जाता रहा। आस-पड़ोस के जिलों से फोर्स आ गई और कामिल समेत 25 लोग मौके से दबोच लिए थे, जबकि आठ आरोपी भाग गए थे।