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Delhi Blast: शवों के उड़े थे चीथड़े, क्षत-विक्षत देख चीख पड़े परिजन, लोकेश और अशोक की कपड़ों से हुई पहचान

Tue, 11 Nov 2025 06:34 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

दिल्ली धमाके में मारे गए हसनपुर के लोकेश अग्रवाल और मंगरौला के अशोक कुमार के शव मंगलवार सुबह घर पहुंचे तो परिवार में कोहराम मच गया। धमाका इतना भीषण था कि दोनों के शव क्षत-विक्षत हो गए थे। उनकी पहचान कपड़ों से की गई। चेहरों के झुलस जाने के कारण उन्हें पहचानना मुश्किल था।
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दिल्ली ब्लास्ट में अमरोहा के दो लोगों की माैत - फोटो : संवाद

दिल्ली धमाके में मारे गए दो दोस्त लोकेश अग्रवाल व अशोक कुमार के शव मंगलवार सुबह घर पहुंचे, तो परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। धमाका इतना भीषण था कि दोनों के शव पूरी तरह क्षत-विक्षत हो चुके थे और उनके चीथड़े उड़ गए थे। शवों की भयानक हालत देखकर परिजन व रिश्तेदार चीख पड़े। धमाके से दोनों के चेहरे झुलस चुके थे और उन्हें पहचानना मुश्किल हो रहा था।

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हादसे में जान गंवाने वाले लोकेश अग्रवाल और अशोक - फोटो : संवाद
कारोबारी लोकेश के समधी, राजेश अग्रवाल ने घटना की वीभत्सता बयां करते हुए बताया कि दिल्ली पुलिस द्वारा मोबाइल पर दिखाए गए मृतकों के फोटो से उनकी पहचान कर पाना असंभव था। इसके बाद जब मोर्चरी में रखे शवों को देखा, तो कपड़ों से उनकी पहचान हो सकी।
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गमगीन परिजन - फोटो : संवाद
राजेश अग्रवाल ने बताया चेहरे का सिर्फ एक हिस्सा ही थोड़ा-बहुत बचा था, वरना पूरा शरीर देखने लायक नहीं बचा था। इसी तरह, मंगरौला निवासी अशोक के शव की हालत भी बहुत खराब थी। उनके भी चीथड़े उड़ गए थे। शवों की यह भयानक स्थिति देखकर हर कोई सहम गया। दोनों के घर जुड़ी भीड़ में सभी की आंखें नम थीं।

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दिल्ली ब्लास्ट में बेटे की माैत के बाद गमगीन परिजन - फोटो : संवाद
दोनों दोस्त बाइक में थे सवार, एक धमाके ने छीन ली जान
दिल्ली कार धमाके में हसनपुर के खाद कारोबारी लोकेश अग्रवाल (52) व मंगरौला निवासी डीटीसी कंडक्टर अशोक कुमार (34) की जान चली गई। दोनों दोस्त थे। अशोक दिल्ली में रहते थे। वहीं, दिल्ली के अस्पताल में भर्ती समधन (बेटे की सास) को देखने पहुंचे कारोबारी ने अशोक को दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर मिलने के लिए बुलाया था।
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अमरोहा में गमगीन परिजन - फोटो : संवाद
इसके बाद दोनों बाइक से आनंद विहार मेट्रो स्टेशन जा रहे थे जहां से लोकेश को हसनपुर के लिए बस पकड़नी थी। मंगलवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव घर पहुंचे तो मातम पसर गया। दोनों परिजन बदहवास हो गए। अंतिम दर्शन करने पहुंचे लोगों की आंखें नम हो गईं। दोपहर में दोनों के शवों का अंतिम संस्कार कर दिया। उधर, दोनों दोस्तों की मौत से लोगों में गम और गुस्सा है।
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अमरोहा में गमगीन परिजन - फोटो : संवाद
सुबह 10:20 बजे अंतिम संस्कार के लिए ले जाते समय कुछ ग्रामीणों ने अशोक के शव को सड़क किनारे रख दिया और हंगामा करने लगे। उन्होंने अशोक को शहीद का दर्जा और आर्थिक मदद दिलाने की मांग की। एसडीएम पुष्करनाथ चौधरी और सीओ दीप कुमार पंत के आश्वासन के बाद करीब एक घंटे बाद लोग शांत हुए। परिजनों के मुताबिक खाद विक्रेता लोकेश अग्रवाल सोमवार सुबह दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती समधन को देखने गए थे।
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दिल्ली ब्लास्ट में अमरोहा निवासी की माैत - फोटो : संवाद

लौटते समय लोकेश ने अशोक को फोन कर लाल किला मेट्रो स्टेशन पर मिलने के लिए बुलाया था। इसके बाद अशोक दोस्त लोकेश के साथ बाइक से आनंद बिहार बस अड्डे जा रहे थे यहां से लोकेश को हसनपुर के लिए बस पकड़नी थी। दोनों दोस्त लालकिला के गेट नंबर एक के सामने पहुंचे तो अचानक एक कार में तेज धमाका हुआ और इसकी चपेट में आकर दोनों की मौत हो गई।

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दिल्ली ब्लास्ट में अमरोहा के दो लोगों की माैत। गमगीन परिजन - फोटो : संवाद
पहले अशोक कुमार की मौत की पुष्टि हुई थी लेकिन जांच के दौरान दिल्ली पुलिस को घटनास्थल पर एक मोबाइल मिला जो लोकेश का था। दिल्ली पुलिस ने लोकेश की मौत की जानकारी हसनपुर कोतवाली पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस ने लोकेश के भाई को घटना की जानकारी दी थी। लोकेश ने अपने पीछे दो बेटे और एक बेटी छोड़ी है। सीओ दीप कुमार पंत ने बताया कि दिल्ली धमाके में हसनपुर के मंगरौला निवासी अशोक के अलावा हसनपुर के लोकेश अग्रवाल की भी मौत हुई है।
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दिल्ली ब्लास्ट में अमरोहा के दो लोगों की माैत। गमगीन परिजन - फोटो : संवाद
दोनों के शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। उधर, अशोक के शव को अंतिम संस्कार को ले जाते समय सुबह करीब 10.20 बजे कुछ ग्रामीणों ने रास्ते में ही शव को रोककर सड़क किनारे रख दिया। करीब एक घंटा तक हंगामा किया। अशोक को शहीद का दर्जा व आर्थिक मदद की मांग की गई। एसडीएम पुष्करनाथ चौधरी और सीओ दीप कुमार पंत के आश्वासन पर लोग शांत हुए।
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