यूपी के अमरोहा में एक युवक ने अपनी बहन को बर्बरता से मार डाला। भाई ने बहन पर गंडासे से वार किए। पहले सिर.. फिर गर्दन और चेहरे पर दो वार किए। पुलिस ने हत्यारोपी भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। आरोपी ने कहा कि मैंने उसे गुस्से में मार डाला।
अमरोहा के कैलसा में जमीन में हिस्सा मांगने पर हत्या के आरोपी शिवराज ने अपनी नर्स बहन संयोगिता की हत्या गन्ना काटने के गंडासे से की थी। उसने पहला प्रहार सिर पर किया। इसके बाद दो वार गर्दन व चेहरे पर किए और जीवित समझ कर दुपट्टे से गला भी दबा दिया।
सिर पर प्रहार इतना तेज था कि भीतर की हड्डी टूट गई और दिमाग भी फट गया। घटना के समय संयोगिता खाना खाए हुए थी। इससे साफ है घटना के कुछ देर पहले तक घर में सबकुछ ठीक था। इसी दौरान संयोगिता ने खाना खाया होगा।
मंगलवार की दोपहर तीन डॉक्टरों के पैनल ने संयुक्त के शव का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं, पुलिस ने हत्यारोपी श्योराज को हिरासत में ले लिया है। पूछताछ के दौरान उसने पुलिस को यही बताया कि संयोगिता जमीन में हिस्सा मांग रही थी।
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अमरोहा में संयोगिता की हत्या
- फोटो : संवाद
घटना के समय थोड़ी सी कहासुनी हुई और गुस्से में आकर मार डाला। हत्या के आरोपी श्योराज को उसके हाथों बहन की हत्या होने का अफसोस है। उसका कहना है कि हत्या करना इरादा नहीं था बस गुस्से में मार दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में संयोगिता के सिर, चेहरे और गर्दन पर गहरी चोट के तीन निशान मिले हैं। एसपी अमित कुमार आनंद ने बताया कि हत्यारोपी शिवराज को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
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संयोगिता हत्याकांड
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर और गर्दन पर धारदार हथियार के चोट के निशान मिले है। उसने संयोगिता का दुपट्टे से गला भी घोटा था। उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त वस्तु को बरामद करने की कोशिश की जा रही है। मामले में मां हुकुम देवी की तहरीर पर सोमवार की देर रात श्योराज के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई थी।
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अमरोहा में संयोगिता की हत्याकांड की जांच करती पुलिस
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यह था मामला
अमरोहा देहात थाना क्षेत्र के नन्हेड़ा अलियारपुर गांव में दिवंगत भगवान दास का परिवार रहता है। वह सिंचाई विभाग में चपरासी थे। परिवार में पत्नी हुकुम देवी के अलावा बेटा श्योराज और तीन बेटी शकुंतला, ममता और संयोगिता हैं। बड़ी बेटी शकुंतला और ममता की शादी हो चुकी है।
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जांच करती पुलिस
- फोटो : संवाद
संयोगिता अविवाहित हैं। पांच साल से मुरादाबाद के निजी अस्पताल में नर्स थीं लेकिन 16 अक्तूबर को पिता के निधन के बाद गांव में ही रहने लगीं। पिता की जमीन में संयोगिता के हिस्सा मांगने के कारण भाई श्योराज से विवाद चल रहा था।
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हत्या की सूचना के बाद माैके पर जुटे ग्रामीण
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सोमवार सुबह 11 बजे इस बात को लेकर फिर कहासुनी हुई। गुस्से में आकर श्योराज ने सिर में धारदार हथियार मारकर संयोगिता की हत्या कर दी। वारदात के वक्त मां बाथरूम में थीं, जबकि श्योराज की पत्नी मनु और बच्चे खेत पर थे।
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जांच करती पुलिस
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स्नान करने के बाद कमरे में आईं हुकुम देवी ने बेटी को लहूलुहान हालत में पड़ा देखा तो उनकी चीख निकल गई। आरोपी श्योराज घटना को अंजाम देकर भाग गया था। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर साक्ष्य जुटाए थे।
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अमरोहा में संयोगिता हत्या केस की जांच करती पुलिस
- फोटो : संवाद
16 बीघा जमीन बनी खूनी खेल की वजह
परिजनों के मुताबिक भगवान दास के नाम पर 16 बीघा जमीन है। उनकी मौत के बाद श्योराज इस जमीन पर खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन पोषण करता था। जो बहन पांच साल पहले गांव के ही रहने वाले दूसरे समुदाय के युवक के साथ मुरादाबाद में लिव इन में रहने लगी वह जमीन के खातिर वापस लौट आएगी शिवराज को इसकी उम्मीद नहीं थी।
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अमरोहा में संयोगिता हत्या केस की जांच करती पुलिस
- फोटो : संवाद
पिता भगवान दास की मौत के बाद से ही संयोगिता ने जमीन में हिस्सा मांगना शुरू कर दिया था। इसी बात को लेकर घर में विवाद रहने लगा। इसी जमीन के कारण श्योराज अपनी बहन संयोगिता की हत्या कर खूनी बन गया।
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परिजनों से पूछताछ करती पुलिस
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भाई और मां के नाम होने वाली थी पिता की जमीन
भगवान दास की मौत के बाद उनके हिस्से की जमीन बेटे श्योराज और उनकी पत्नी हुकुम देवी के नाम आने वाली थी। जमीन की फौती करने के लिए श्योराज ने आवेदन किया था जिसके आधार पर हल्का लेखपाल ने रिपोर्ट लगाकर उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर दी है। लेखपाल ने बताया कि जांच में सामने आया था कि भगवान दास की सबसे छोटी बेटी संयोगिता पांच साल पहले मुरादाबाद चली गई थी।
अमरोहा में संयोगिता हत्या केस की जांच करती पुलिस
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वह वहीं पर किसी व्यक्ति के साथ लिव-इन में रह रही है। जिसके आधार पर भगवान दास के हिस्से की जमीन उनके बेटे श्योराज और पत्नी हुकुम देवी के नाम पर दर्ज की जा रही थी। लेखपाल ने बताया कि जमीन में हिस्सा लेने के लिए संयोगिता ने कभी भी मुझे या प्रशासनिक अधिकारियों से कोई मांग नहीं की थी।