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विश्व प्रवासी पक्षी दिवस: जिस रास्ते से आते हैं, उसी रास्ते से लौटते हैं विदेशी परिंदे

Sun, 12 May 2019 05:00 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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नदी में तैरते रेड क्रेस्टेड पोकार्ड बर्ड - फोटो : अमर उजाला
11 मई 2019 को  विश्व प्रवासी पक्षी दिवस के रूप में मनाया गया। जीवन के विविध रूपों में पक्षी अपने रंग रूप आवाज के कारण सबसे अधिक आकर्षक करने वाला रूप है। पक्षियों में प्रवास एक अद्भुत प्राकृतिक प्रक्रिया है। विभिन्न प्रवासी पक्षी प्रवास के लिए सैकड़ों मील की दूरी तक यात्रा करते हैं और जलस्रोत के किनारे दो से तीन महीने के लिए अपना डेरा डालने के बाद लौट जाते हैं। 
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नदी किनारे आराम फरमाते विदेशी पेंटेड स्ट्रोक बर्ड - फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर और आसपास के जनपदों में भी पक्षियों के प्रवास के कई ठिकाने हैं, जिनमें सहारनपुर का हथिनीकुंड बैराज के पास खारा नहर, मुजफ्फरनगर का हैदरपुर और शामली जनपद में मामौर झील प्रमुख हैं। 

 
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रुडी शेल्डडक बर्ड - फोटो : अमर उजाला
जलीय संरचना (वेट लैंड) वाले इन स्थानों पर दूसरे राज्यों के साथ ही विदेशों के पक्षी भी आकर प्रवास करते हैं। पक्षी मौसम के अनुकूल अपना प्रवास तलाशते हैं। जहां इनके लिए भोजन, प्रजनन हेतु प्रवास एवं उनके  शरीर के अनुकूल वातावरण मिलता है। 

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इंडियन स्कीमर बर्ड - फोटो : अमर उजाला
प्रमुख प्रवासी पक्षी 
कुर्च (रेड नेप्ड लिबिस), सुर्खाब बतख ( रडी शेलडक), चौबाहा (टेमिनक्स), काला सिर का ढोमरा (ब्लैक हेडेड गुल), ढोमरा ( स्टेंडर बिल्ड गुल), पोपिल ( एशियन ओपन बिल), इंडियन स्कीमर, पेंटेड स्टोर्क, रेड क्रस्टेड पोकार्ड, गजपांव (ब्लैक विंगड स्टिल), छोटा लालसर (पिंक हेडेड डक), सिलेटी सवन (ग्रेयग गूज), छोटा राजहंस (लेसर फ्लेमिंगो), शीकंपर (नार्दर्न पिनटेल), डेकरी (कॉमन मार्दन), सिलही (लेसर विसलिंग डक)। 
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हस्तिनापुर सेंचुरी - फोटो : अमर उजाला
माता -पिता से मिलता है प्रवास का ज्ञान 
सहारनपुर परिक्षेत्र के वन संरक्षक वीके जैन बताते हैं कि पक्षियों को प्रवास का ज्ञान अपने माता पिता से मिलता है। दूसरे देशों से आने वाले पक्षी एक निर्धारित रूट से आते हैं और उसी रूट से लौट जाते हैं। एक झुंड में यह चलते हैं और 20 से 25 दिन तक कुछ समय कहीं ठहरने के पश्चात मूवमेंट कर सकते हैं। 
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हस्तिनापुर सेंचुरी
वीके जैन ने बताया कि शरीर के अनुकूल मौसम न मिलने की वजह से ही पक्षी प्रवास के लिए निकलते हैं, जैसे ही मौसम अनुकूल हो जाता है, तो लौट जाते हैं। उन्होंने बताया कि 15 दिसंबर के बाद से फरवरी तक प्रवासी पक्षियों का आगमन रहता है और दो से तीन महीने प्रवास करने के बाद पक्षी उसी रास्ते से लौट जाते हैं। 
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हस्तिनापुर सेंचुरी
इसलिए करते हैं प्रवास 
वन संरक्षक वीके जैन के मुताबिक दूसरे देश से आने वाले पक्षियों को जब वहां अनुकूल मौसम नहीं मिलता है, तो वह दूसरे देश का रुख करते हैं। जहां सर्दी ज्यादा पड़ती है, तो प्रवास पर निकलते हैं और जहां गर्मी ज्यादा पड़ती है तो ठंडे इलाकों की तरफ प्रवास करने निकलते हैं। उन्होंने बताया कि तिब्बत, मंगोलिया, चीन, आस्ट्रेलिया जैसे देशों से पक्षी प्रवास पर निकलते हैं। 

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